युवा स्टार वैष्णवी का बयान, सानिया से तुलना पर दी प्रतिक्रिया, कप को लेकर जताया भरोसा

0

नई दिल्ली : बिली जीन किंग कप के प्लेऑफ क्वालिफायर्स में भारत के लिए पहला मैच खेलने वाली वैष्णवी अडकर ने अपने शानदार प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया। विश्व रैंकिंग में 385वें स्थान पर काबिज इस युवा खिलाड़ी ने न्यूजीलैंड और कोरिया के खिलाफ जीत हासिल कर अपनी काबिलियत साबित की। फरवरी में खेले गए डब्ल्यू 100 टूर्नामेंट के फाइनल में भी उनकी प्रतिभा देखने को मिली, जहां वह सानिया मिर्जा (2001) के बाद इस स्तर के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय बनीं। उनके प्रदर्शन के कारण उनकी तुलना सानिया मिर्जा से की जा रही है, मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बातचीत में वैष्णवी ने साफ कहा कि यह उनके लिए सम्मान की बात है, फिर भी वह किसी की परछाई बनने के बजाय अपनी अलग पहचान बनाना चाहती हैं और ‘अगली सानिया’ नहीं, बल्कि ‘वैष्णवी’ के रूप में जानी जाना चाहती हैं।

भारतीय टेनिस का नया चेहरा कौन हैं वैष्णवी अडकर?

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुणे के 12 सदस्यों के परिवार में पली-बढ़ी वैष्णवी की टेनिस यात्रा 7 वर्ष की उम्र में शुरू हुई। घर के शोर-शराबे से बचने के लिए मां ने चारों भाई-बहनों को टेनिस के लिए प्रेरित किया। वैष्णवी ने बताया कि अंडर-14, 16 एकल में राष्ट्रीय खिताब नहीं जीत पाने के बाद अंडर-18 में खिताब मिला तो आत्मविश्वास बढ़ा और बिली जीन किंग कप में पदार्पण करने में सफल रही।

तीन साल में ग्रैंडस्लैम खेलने का लक्ष्य तय

अपनी आक्रामक शैली के लिए मशहूर वैष्णवी दो बार के ग्रैंडस्लैम विजेता रोहन बोपन्ना से प्रशिक्षण ले रही हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वह बताती हैं कि बोपन्ना और बालू सर (बालाचंद्रन मणिक्कथ) ने उन्हें समझाया कि हर गेंद पर जोर लगाना जरूरी नहीं होता, कई बार डिफेंस भी मैच का रुख तय करता है। मेरा लक्ष्य 3-4 वर्षों में ग्रैंडस्लैम खेलने का है।

जोकोविच-सेरेना बने प्रेरणा स्रोत

नोवाक जोकोविच की 38 वर्ष की उम्र में भी हर आखिरी अंक के लिए लड़ने की जिद वैष्णवी को काफी प्रेरित करती है। वहीं सेरेना विलियम्स का हर परिस्थिति में हार न मानने वाला जज्बा उनके उत्साह को और बढ़ाता है, जिससे उन्हें लगातार बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here