IPL की शुरुआत की कहानी: BCCI ने पहले किया था नजरअंदाज, फिर बदली टी20 क्रिकेट की दुनिया

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नई दिल्ली : इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की शुरुआत साल 2008 में हुई थी और फिलहाल इसका 19वां सीजन खेला जा रहा है। पिछले 18 वर्षों में आईपीएल ने ऐसी लोकप्रियता हासिल की है कि इसकी तर्ज पर दुनिया के कई देशों में टी20 लीग शुरू हो गईं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आज आईपीएल को विश्व की सबसे बड़ी और सबसे सफल टी20 लीग माना जाता है। हालांकि, जिस टूर्नामेंट ने आज भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को आर्थिक रूप से नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है, उसे शुरुआती दौर में बोर्ड ने गंभीरता से नहीं लिया था। लेकिन एक बड़ी घटना ने न सिर्फ भारत, बल्कि पूरी दुनिया में टी20 क्रिकेट का भविष्य बदलकर रख दिया और वहीं से आईपीएल के नए युग की शुरुआत हुई।

BCCI की चिंता से जन्मी थी IPL की शुरुआत

टी20 क्रिकेट की जब शुरुआत हुई उस वक्त भारतीय बोर्ड इसके पक्ष में नहीं था। उस वक्त भारतीय टीम बहुत ज्यादा टी20 क्रिकेट खेलती भी नहीं थी। टी20 क्रिकेट के पहले विश्व कप तक भारत सबसे कम टी20 इंटरनेशनल मैच खेलने वाली टीमों में से एक थी। भारतीय बोर्ड ने 2007 टी20 वर्ल्ड कप के लिए भी टीम बेमन ही भेजी थी। उसमें कई बड़े खिलाड़ी नहीं थे। मगर जैसे-जैसे टूर्नामेंट आगे बढ़ा और फिर भारत के चैंपियन बनते ही इस प्रारूप की प्रतिष्ठा बढ़ने लगी।

दरअसल आईपीएल की शुरुआत बीसीसीआई के अंदर पैदा हुए एक डर के चलते हुई थी। बोर्ड को 2007-08 में लगने लगा था कि बोर्ड की प्रतिष्ठा घट जाएगी। क्योंकि उस वक्त टी20 क्रिकेट चरम पर पहुंच रहा था और 2007 में भारत के टी20 चैंपियन बनने के साथ ही इसकी तस्वीर भी बदलने लगी थी। उसी वक्त भारत में एक टी20 लीग जारी थी, जिसका नाम था इंडियन क्रिकेट लीग (आईएसएल)। इस लीग में एक से बढ़कर एक धाकड़ क्रिकेटर खेलते थे। सुभाष चंद्रा के एसेल ग्रुप ने इस लीग की शुरुआत करवाई थी।

आईएसएल एक सिटी बेस्ड फ्रेंचाइजी वाला टूर्नामेंट था। दुनियाभर के कई धाकड़ खिलाड़ी इसमें शामिल हुए। फिर 1983 के वर्ल्ड कप विनर कप्तान कपिल देव को इसका डायरेक्टर बना दिया गया। यहां से भारतीय क्रिकेट बोर्ड के अंदर डर पैदा हुआ। बोर्ड को लगने लगा कि इस लीग के बढ़ते कद से बीसीसीआई का कद छोटा हो सकता है। इस डर ने शरद पवार की अध्यक्षता वाले तत्कालीन भारतीय क्रिकेट बोर्ड को सोचने पर मजबूर किया और फिर ललित मोदी के साथ चर्चा हुई इंडियन प्रीमियर लीग के फॉर्मेट पर।

फ्रेंचाइजी से ऑक्शन तक, IPL का अनोखा मॉडल कैसे बना?

आईपीएल का प्लान बनना शुरू हो चुका था और बोर्ड के अधिकारियों के मन में इस वक्त सबसे बड़ा सवाल था कि आखिर कैसे पैसा आएगा। टीमों पर पैसा कौन लगाएगा। खिलाड़ी कैसे टीम में आएंगे। इसके बाद बोर्ड ने टी20 क्रिकेट के बढ़ते कद को अपना हथियार बनाया। संयोग कुछ ऐसा बना कि भारतीय टीम ताजा-ताजा समय में ही विश्व चैंपियन बनी थी। लोग टी20 क्रिकेट को पसंद करना शुरू कर चुके थे। इसके बाद बोर्ड और बड़े-बड़े उद्योगपतियों को भी टी20 क्रिकेट में भविष्य दिखने लगा।

फिर बोर्ड ने टीमें खरीदने के लिए टेंडर जारी किए और खिलाड़ियों को शामिल करने के लिए ऑक्शन की योजना बनाई। उसके बाद आईपीएल टीमों के अधिकार रिलायंस इंडस्ट्रीज, विजय माल्या, प्रीति जिंटा, शाहरुख खान जैसी बड़ी हस्तियों ने खरीदे। इस तरह आईपीएल में ग्लैमर की भी एंट्री हुई। उस वक्त भारतीय टीम की भी इंटरनेशनल लेवल पर प्रतिष्ठा बढ़ चुकी थी। भारत ने ऑस्ट्रेलिया में जाकर सीबी सीरीज जीती। इससे भारतीय क्रिकेट टीम के स्टेक्स और हाई हो गए। फिर बड़े-बड़े ब्रॉन्ड्स ने भारतीय क्रिकेट में इनवेस्ट करने का मन बनाया। उसी समय आयोजित हुए आईपीएल के पहले सीजन के ऑक्शन।

जब कट्टर प्रतिद्वंद्वी बने एक-दूसरे के साथी

इसके बाद आईपीएल में दुश्मन दोस्त बन गए। शोएब अख्तर और सौरव गांगुली एक टीम में थे। शाहिद अफरीदी और वीवीएस लक्ष्मण को एकसाथ खेलते देखा गया। सचिन तेंदुलकर और सनथ जयसूर्या की ओपनिंग जोड़ी की चर्चा होने लगी। इस तरह आईपीएल में विदेशी खिलाड़ियों की एंट्री हुई। इंटरनेशनल क्रिकेट में मंकीगेट जैसी घटनाओं को भुलाकर आईपीएल में सभी विदेशी खिलाड़ी साथ-साथ खेलते थे। कई अपने देश के खिलाड़ियों के खिलाफ खेलते थे। इस तरह शुरू हुआ आईपीएल का पहला सीजन जो ब्रेंडन मैकुल्लम की पहले मैच में पहली पारी से ही उफान पर था।

18 अप्रैल 2008: जब शुरू हुआ IPL का सुनहरा सफर

18 अप्रैल 2008… बेंगलुरु का चिन्नास्वामी स्टेडियम और आमने-सामने थीं Kolkata Knight Riders और Royal Challengers Bengaluru की टीमें। यही वह दिन था जब आईपीएल इतिहास का पहला मुकाबला खेला गया। इस मैच में Brendon McCullum ने 73 गेंदों पर 10 चौकों और 12 छक्कों की मदद से नाबाद 158 रन की विस्फोटक पारी खेलकर लीग का ऐसा आगाज किया, जिसने टी20 क्रिकेट की दिशा ही बदल दी। आज आईपीएल का 19वां सीजन खेला जा रहा है और इसकी लोकप्रियता लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है।

इन वर्षों में आईपीएल ने कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड देखे हैं। लीग में 30 गेंदों पर शतक लगा, 13 गेंदों में अर्धशतक बना, एक टीम सिर्फ 49 रन पर सिमटी, 280 से ज्यादा का स्कोर भी देखने को मिला और 175 रन की व्यक्तिगत पारी भी खेली गई। तमाम उतार-चढ़ाव और विवादों के बावजूद आईपीएल का प्रभाव कम नहीं हुआ, बल्कि समय के साथ इसकी प्रतिष्ठा और बढ़ती गई। अब ऐसी खबरें भी सामने आ रही हैं कि 2028 से इस लीग में मैचों की संख्या बढ़ाकर 94 तक की जा सकती है, जबकि फिलहाल टूर्नामेंट 74 मुकाबलों के फॉर्मेट में खेला जा रहा है।

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