क्या वैभव सूर्यवंशी में दिखती है नए सचिन की झलक? क्रिकेट जगत में बढ़ी चर्चा

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नई दिल्ली : वैभव सूर्यवंशी का जन्म बिहार के समस्तीपुर में साल 2011 में हुआ था, वही साल जब सचिन तेंदुलकर का लंबे समय से देखा गया वनडे वर्ल्ड कप जीतने का सपना पूरा हुआ था। 2 अप्रैल 2011 को जब टीम इंडिया ने 28 साल बाद विश्व कप ट्रॉफी उठाई, तब वैभव को इस दुनिया में आए महज छह दिन ही हुए थे। अब 15 साल बाद वैभव सूर्यवंशी की तुलना क्रिकेट के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर से की जाने लगी है। उनकी प्रतिभा और शुरुआती उपलब्धियों ने फैंस के बीच काफी उत्साह पैदा किया है। हालांकि यह तुलना कितनी सही है और कितनी जल्दबाजी, इसको लेकर क्रिकेट विशेषज्ञों की अलग-अलग राय सामने आ रही है।

वो दौर दूसरा था यह दौर दूसरा है, इसमें कोई दो राय नहीं है। मगर सबसे बड़ा सवाल है कि जो दीवानगी या जो प्रतिभा दिख रही है, उसके बाद क्या यह कहना सही होगा कि, भारत को नया सचिन मिल गया है? दरअसल यह हम नहीं बोल रहे, यह फैंस का क्रेज बोल रहा है। आज के समय में क्रिकेट फास्ट गेम हो रहा है। हर किसी को चौके-छक्के देखना पसंद है। वैभव इस गेम के मौजूदा समय में मास्टर बनते जा रहे हैं। यही कारण है कि उनकी तुलना मास्टर-ब्लास्टर से होने लगी है।

अलग दौर, अलग कहानी, लेकिन जुनून वही पुराना

सचिन तेंदुलकर ने 80 के दशक के आखिर में जब क्रिकेट जगत में अपनी पहचान बनानी शुरू की थी, तब उनके शानदार शॉट्स, बड़े गेंदबाजों के खिलाफ निडर बल्लेबाजी और असाधारण प्रतिभा ने सभी का ध्यान खींचा था। ठीक उसी तरह आज वैभव सूर्यवंशी भी अपनी आक्रामक बल्लेबाजी, लंबे छक्के लगाने की क्षमता और बड़े गेंदबाजों का बेखौफ सामना करने के अंदाज को लेकर लगातार चर्चा में बने हुए हैं।

दौर और पीढ़ि अलग जरूर है लेकिन प्रतिभा दोनों की कुछ अलग थी यह तो सही बात है। रही बात दोनों के खेल की दीवानगी की तो सचिन का एक वक्त कद ऐसा था कि जब तक वह खेलते थे लोग टीवी ऑन रखते थे, भारत के जीतने की उम्मीद होती थी, उनके आउट होते ही सब बंद हो जाता था। ऐसी ही दीवानगी मौजूदा समय में वैभव सूर्यवंशी के लिए है जो आईपीएल 2026 में देखने को मिली।

वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल 2026 के पहले 13 मैचों में 579 रन बनाए। इसमें सबसे ज्यादा 53 छक्के भी दर्ज हैं। वैभव ने आईपीएल के मौजूदा सीजन के रोमांच को अपने कंधे पर उठाया है। अगर नंबर गेम की बात करें तो कोई ब्रॉडकास्टर यह नहीं मानेगा कि टीआरपी गिरी है। अगर आपस में अपने घरों, दोस्तों में बातचीत की जाए तो कई लोग ऐसे हैं सिर्फ तब मैच देख रहे हैं जब वैभव या फिर भारत के नामी खिलाड़ी जैसे रोहित शर्मा, विराट कोहली अच्छा खेलते हैं तब। यही कारण है कि दीवानगी को तो वैभव ने मौजूदा आईपीएल में कमाया है।

“अगला सचिन” या सिर्फ वैभव सूर्यवंशी?

यह सबसे बड़ी बहस बन चुकी है कि वैभव सूर्यवंशी को “अगला सचिन” कहा जाए या उन्हें अपनी अलग पहचान बनाने दी जाए। 1980 के दशक के आखिर में जब मुंबई का एक घुंघराले बालों वाला लड़का स्कूल क्रिकेट में अपने बल्ले से तहलका मचा रहा था, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि वही खिलाड़ी आगे चलकर क्रिकेट का “भगवान” कहलाएगा। वह नाम था सचिन तेंदुलकर।

आज लगभग चार दशक बाद बिहार का 15 वर्षीय बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी वैसी ही सनसनी पैदा कर रहा है। सोशल मीडिया, टीवी डिबेट्स और क्रिकेट एक्सपर्ट्स के बीच एक सवाल लगातार गूंज रहा है — क्या वैभव सूर्यवंशी को “अगला सचिन तेंदुलकर” कहना सही है? वैभव सूर्यवंशी की किरण मोरे ने सचिन तेंदुलकर से तुलना कर दी। उन्होंने यही कहा कि जिस निडरता से जिस प्रतिभा से सचिन बड़े-बड़े गेंदबाजों का सामना अपने शुरुआती दिनों में करते थे, वही वैभव की बल्लेबाजी में नजर आता है। कृष्णमचारी श्रीकांत ने उन्हें ‘डमी गॉड’ की उपाधि दे दी है।

जबकि दिनेश कार्तिक, केदार जाधव समेत कई पूर्व क्रिकेटर्स का मानना है कि वैभव की तुलना सचिन तेंदुलकर से करना सही नहीं है। वैभव सूर्यवंशी को उनके नाम से ही जानना चाहिए। ना कि सचिन से उनका गेम तुलनात्मक हो। इससे वैभव के ऊपर आने वाले समय में अत्यधिक दबाव भी बढ़ सकता है। क्योंकि अगर उस खिलाड़ी को लगा कि उसकी तुलना महान सचिन तेंदुलकर से हो रही है तो यह दबाव उनके दिमाग पर भी हावी हो सकता है।

कम उम्र में रिकॉर्ड्स की बारिश, आंकड़ों में कितना आगे कौन?
सचिन तेंदुलकर

सचिन तेंदुलकर की प्रतिभा स्कूल क्रिकेट से ही चर्चा का विषय थी। 14-15 साल की उम्र में उन्होंने हैरिस शील्ड में विनोद कांबली के साथ 664 रन की साझेदारी की। 15 साल 232 दिन की उम्र में उन्होंने रणजी ट्रॉफी डेब्यू पर शतक जड़ दिया। उसके बाद 16 साल 205 दिन की उम्र में उन्होंने 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ इंटरनेशनल डेब्यू किया। वकार यूनिस, वसीम अकरम, इमरान खान जैसे दिग्गजों का सचिन ने 16 साल की उम्र में सामना किया। देखते ही देखते अगले 2-3 साल में सचिन का नाम न्यूज हेडलाइंस में पहला पॉइंट होता था।

वैभव सूर्यवंशी

वैभव सूर्यवंशी ने महज 14 साल की उम्र में आईपीएल डेब्यू कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उन्होंने अपने पहले ही सीजन में 35 गेंदों पर शतक जड़कर सनसनी मचा दी। इसके बाद अंडर-19 क्रिकेट में भी उनका बल्ला जमकर बोला और उन्होंने अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में 175 रन की यादगार पारी खेली। विजय हजारे ट्रॉफी, सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी और एशिया कप राइजिंग स्टार्स जैसे टूर्नामेंटों में लगातार शानदार प्रदर्शन की वजह से उनकी तुलना सचिन तेंदुलकर से होने लगी है।

वैभव ने सिर्फ व्हाइट बॉल ही नहीं, बल्कि रेड बॉल क्रिकेट में भी खुद को साबित किया है। अब उनका चयन इंडिया ए टीम में हुआ है, जहां वह तिलक वर्मा की कप्तानी में खेलते नजर आएंगे। अगर वैभव यहां भी सफल रहते हैं, तो वह कम उम्र में इंटरनेशनल डेब्यू कर सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड को चुनौती दे सकते हैं।

15 साल की उम्र तक कैसा रहा सचिन और वैभव का सफर
विषयसचिन तेंदुलकरवैभव सूर्यवंशी
क्रिकेट की शुरुआतमुंबई स्कूल क्रिकेटबिहार क्रिकेट सिस्टम + आधुनिक अकादमी
चर्चा में आने की उम्र13-14 वर्ष13-14 वर्ष
बड़ी उपलब्धिहैरिस शील्ड रिकॉर्ड साझेदारीसबसे कम उम्र में आईपीएल शतक
15 साल तक का बड़ा रिकॉर्डरणजी डेब्यू पर शतकप्रोफेशनल T20 में विस्फोटक प्रदर्शन, आईपीएल में दो शतक
खेलने की शैलीतकनीकी रूप से परिपक्वआक्रामक और निडर
मीडिया दबावसीमितअत्यधिक, सोशल मीडिया केंद्रित

फिलहाल इतिहास यही बताता है कि भारतीय क्रिकेट में समय-समय पर कई खिलाड़ियों को “अगला सचिन” कहा गया और उनकी तुलना सचिन तेंदुलकर से की गई। विनोद कांबली, पृथ्वी शॉ और अब वैभव सूर्यवंशी भी इसी चर्चा का हिस्सा बने हैं। हालांकि सचिन सिर्फ एक प्रतिभाशाली बल्लेबाज नहीं थे, बल्कि 24 साल तक लगातार शीर्ष स्तर पर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी थे। उनकी सफलता के पीछे अनुशासन, मानसिक मजबूती और हर परिस्थिति में खुद को साबित करने की क्षमता सबसे बड़ी वजह रही।

वैभव सूर्यवंशी में प्रतिभा कूट-कूटकर भरी हुई है। उनकी निडर बल्लेबाजी, बड़े मंच पर आत्मविश्वास और कम उम्र में मैच का रुख बदल देने की क्षमता उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है। यही वजह है कि क्रिकेट जगत में उनकी चर्चा लगातार बढ़ती जा रही है। हालांकि भारतीय क्रिकेट को शायद “अगला सचिन” नहीं, बल्कि “पहला वैभव सूर्यवंशी” देखने की जरूरत है। क्योंकि महान खिलाड़ी किसी से तुलना करके नहीं, बल्कि अपनी अलग पहचान और कहानी बनाकर इतिहास रचते हैं।

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