नई दिल्ली : फिट इंडिया कार्यक्रम के निदेशक सुशांत कांडपाल का मानना है कि भारत अब खेल सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में दुनिया के किसी भी बड़े देश से पीछे नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन के लिए भारतीय खिलाड़ियों को मनोवैज्ञानिक तैयारी पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने फिट इंडिया अभियान, कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की संभावनाओं और युवाओं में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
फिट इंडिया और कॉमनवेल्थ गेम्स का कनेक्शन, क्या बोले निदेशक?
सुशांत कांडपाल: सबसे बड़ा सामंजस्य यह है कि हम जनता को एक तरह से फिटनेस का संदेश देते हैं। हम चाहते हैं कि जनता क्रिकेट को तो फॉलो करे ही बल्कि अन्य सभी खेलों से भी बराबर का जुड़ाव रखें। कॉमनवेल्थ हमारे लिए एक बहुत महत्वपूर्ण प्रतियोगिता है। हम इसका आयोजन भी करने जा रहे हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का प्रदर्शन भी बहुत अच्छा रहता है। …तो हम चाहते हैं कि हम इसमें पिछले जितने संस्करण हमारे हुए हैं, उन सबसे अच्छा प्रदर्शन करें। फिट इंडिया का महत्वपूर्ण भूमिका यह है कि लोगों में फिटनेस को लेकर जागरूकता आये और कॉमनवेल्थ गेम्स को लेकर जागरूकता आये कि भारत उसमें किस तरह से शामिल होने वाला है।
टैलेंट है लेकिन फिटनेस में कमी, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्यों पिछड़ते हैं खिलाड़ी?
सुशांत कांडपाल: मैं इसमें थोड़ा सा सुधार करना चाहूंगा। दो-तीन चीजों पर बोलूंगा। आपकी बात ठीक है। मुझे भी ऐसा लगता है कि हमारा थोड़ा सा शायद साइकोलॉजिकल दृष्टिकोण है कि हम मानसिक तौर पर कभी-कभी हल्का सा पीछे रह जाते हैं। मौजूदा समय में हमारे देश में इंफ्रास्ट्रक्चर की जो सुविधाएं हैं, वे किसी भी मायने में, किसी भी अच्छे देश से कम नहीं हैं। अगर आप ऑस्ट्रेलिया का मुकाबला करें, चाइना का करें, हमारे पास वे सारी सुविधाएं हैं, चाहे वह स्पोर्ट्स साइंस हो, बॉयोमैकेनिक्स हो, कोचेस हों, कि जो एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मात दे सकती हैं।
हालांकि, आप कह सकते हैं कि थोड़ा सा एक मनोवैज्ञानिक तैयारी की बात है, एक हमारे यहां क्या है कि थोड़ा सा जमीनी स्तर पर काम करने की जरूरत है, ताकि हम ज्यादा से ज्यादा टैलेंट को चिह्नित करें और उनको ऊपर ले जाएं। फिटनेस की जहां तक बात है तो ऐसा नहीं है। मुझे लगता है कि शायद हम शुरुआती दौर में तैयारी करने में थोड़ा सा लेट हो जाते हैं। उस हिसाब से उतना समय हमको नहीं मिल पाता है। इस कारण जब हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाते हैं कि हम वहां प्रतिस्पर्धा कर पाएं।
मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण तो एक है ही थोड़ा सा…। मनोवैज्ञानिक तौर पर तैयार नहीं रहते हैं, इसलिए यही शायद कमी रहती है, जोकि मुझे लगता है कि आने वाले समय में अब वह चीज नहीं है। हम कहीं न कहीं उस स्तर पर आ रहे हैं। हमारी परफॉर्मेंस आ रही है। आने वाले समय में ओलंपिक खेलों और कॉमनवेल्थ गेम्स में हमारी परफॉर्मेंस बहुत अच्छी होने वाली है।
युवाओं और माता-पिता के लिए सुशांत कांडपाल का संदेश
सुशांत कांडपाल ने देश के युवाओं और अभिभावकों को संदेश देते हुए कहा कि खेलों को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है। उन्होंने माता-पिता से अपील की कि वे अपने बच्चों को फिटनेस और खेलों से जोड़ने के लिए प्रेरित करें। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि हर बच्चा अपने पसंदीदा खेल को केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के लक्ष्य से नहीं, बल्कि शौक और जीवनशैली के रूप में भी जरूर खेले। इससे न सिर्फ फिटनेस बढ़ेगी, बल्कि देश में नई प्रतिभाएं भी सामने आएंगी और आगे चलकर मेडल्स की संख्या भी बढ़ेगी, जिससे भारत का नाम और रोशन होगा।


