भारत-जापान खेल साझेदारी को नई मजबूती, SAI और त्सुकुबा यूनिवर्सिटी के बीच हुआ नया समझौता

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नई दिल्ली। भारत के खेल विकास और उच्च प्रदर्शन प्रणाली को मजबूत बनाने की दिशा में भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और जापान की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ऑफ त्सुकुबा (University of Tsukuba) के बीच शुक्रवार को एक नए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता आगामी राष्ट्रमंडल खेल 2030 और भारत की ओलंपिक महत्वाकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए खेल विज्ञान, कोचिंग और एथलीट विकास को नई दिशा देगा।

समझौते पर यूनिवर्सिटी ऑफ त्सुकुबा के अध्यक्ष प्रो. क्योसुके नागाटा और भारतीय खेल प्राधिकरण की उप महानिदेशक मंजुश्री दयानंद ने हस्ताक्षर किए। यह साझेदारी तीन वर्षों के लिए होगी और 2016 में भारत-जापान सरकारों के बीच स्थापित खेल सहयोग ढांचे तथा 2018 में SAI और विश्वविद्यालय के बीच हुए संस्थागत समझौते को आगे बढ़ाएगी।

समझौते के दौरान विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष ओसामु ओहनेदा ने कहा कि दोनों देशों में खेल प्रतिभाओं के विकास, खेल शिक्षा और खेल विज्ञान को मजबूत करने के लिए यह साझेदारी महत्वपूर्ण साबित होगी। उन्होंने कहा कि कोच विकास और शीर्ष खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के लिए नए अवसर तैयार किए जाएंगे, जिससे दोनों देशों के खेल तंत्र को लाभ मिलेगा।

मंजुश्री दयानंद ने कहा कि इस प्रकार का अंतरराष्ट्रीय सहयोग केवल खिलाड़ियों की तैयारी तक सीमित नहीं है, बल्कि कोच, खेल वैज्ञानिकों, प्रशासकों और सहयोगी स्टाफ के कौशल विकास के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारत आने वाले वर्षों में बड़े खेल आयोजनों की तैयारी कर रहा है और ऐसे समय में यह समझौता खेल विज्ञान और उच्च प्रदर्शन विकास की दिशा में बड़ा कदम है।

इस समझौते के तहत दोनों संस्थान खेल शिक्षा, ओलंपिक एवं पैरालंपिक शिक्षा, पाठ्यक्रम विकास, कोच शिक्षा, खेल प्रबंधन, खेल अवसंरचना विकास, खेल चिकित्सा, फिजियोथेरेपी, स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग, चोटों की रोकथाम, खेल विज्ञान अनुसंधान और खिलाड़ियों के प्रदर्शन में सुधार जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे।

इसके अलावा भारतीय खिलाड़ियों, कोचों, खेल वैज्ञानिकों और SAI के अधिकारियों को जापान में विशेष प्रशिक्षण, एक्सचेंज और अटैचमेंट कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। वहीं उच्च शिक्षा और शैक्षणिक सहयोग के नए रास्ते भी खुलेंगे।

समझौते में एथलेटिक्स, तीरंदाजी, टेबल टेनिस, तैराकी और जूडो जैसे प्राथमिक खेलों पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिनमें भारत आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाना चाहता है। इसके साथ ही खेल विज्ञान, खेल चिकित्सा, प्रदर्शन विश्लेषण और अनुसंधान से जुड़े संयुक्त प्रोजेक्ट भी संचालित किए जाएंगे।

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