ट्राई सीरीज विवाद में बड़ा फैसला, दो श्रीलंकाई खिलाड़ियों पर जुर्माना

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नई दिल्ली: भारत-ए और श्रीलंका-ए के बीच खेले गए मुकाबले के दौरान मैदान पर तनाव उस समय बढ़ गया, जब वैभव सूर्यवंशी और श्रीलंकाई खिलाड़ी विशेन हलमबेज के बीच तीखी बहस धक्का-मुक्की में बदल गई। इस घटना ने मैच के बाद काफी सुर्खियां बटोरीं। मामले को गंभीरता से लेते हुए मैच रेफरी प्रदीप जयप्रकाश ने सख्त रुख अपनाया और श्रीलंकाई खिलाड़ी विशेन हलमबेज पर जुर्माना लगाया है। फिलहाल भारतीय बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई या प्रतिबंध की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। माना जा रहा है कि मैदान पर वैभव के साथ हुई बदसलूकी को देखते हुए विशेन को इस पूरे मामले में सबसे बड़ी सजा दी गई है।

दिलचस्प बात यह है कि मैच रेफरी ने श्रीलंका A के विकेटकीपर निरोशन डिकवेला पर भी जुर्माना लगाया है। हैरान करने वाली बात इसलिए है क्योंकि डिकवेला वही खिलाड़ी थे जिन्होंने मैदान पर हलमबेज और वैभव सूर्यावंशी के बीच हो रही लड़ाई को शांत कराया था। हालांकि, यह साफ किया गया है कि डिकवेला को इस लड़ाई की वजह से सजा नहीं मिली है, बल्कि उन पर किसी दूसरे नियम को तोड़ने के लिए जुर्माना लगाया गया है। उनके ऊपर मैदान पर अंपायर से बहुत ज्यादा अपील करने के लिए जुर्माना लगाया गया है।

मैच रेफरी प्रदीप जयप्रकाश ने इस मामले में दोनों टीमों के खिलाड़ियों को बुलाकर कोई आमने-सामने पूछताछ या औपचारिक सुनवाई नहीं की। उन्होंने मैदान पर मौजूद अंपायरों की रिपोर्ट को सही माना और उसी के आधार पर सीधे खिलाड़ियों को सजा सुना दी। 42 साल के प्रदीप जयप्रकाश श्रीलंका के पूर्व तेज गेंदबाज हैं। उन्होंने अपने पूरे करियर में सिर्फ एक इंटरनेशनल मैच खेला है, जो साल 2005 में भारत के खिलाफ था। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने अपने जीवन का वह इकलौता मैच भी दांबुला के मैदान पर खेला था।

ट्राई सीरीज के चौथे मुकाबले में मैदान पर जो घटनाक्रम देखने को मिला, उसने श्रीलंका के क्रिकेट जगत में निराशा और पछतावे का माहौल पैदा कर दिया है। वहां के क्रिकेट प्रेमी और पूर्व खिलाड़ी इस बात से ज्यादा दुखी हैं कि भारत और श्रीलंका के खिलाड़ियों के बीच ऐसी शर्मनाक झड़प उनके अपने ही देश में देखने को मिली। इस घटना ने खेल भावना पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि दोषी खिलाड़ियों के खिलाफ जो सख्त कार्रवाई की गई है, वह श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड (SLC) की ओर से की गई है। इस मामले में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) की कोई भूमिका नहीं है, जिससे साफ है कि बोर्ड ने अपने स्तर पर अनुशासन बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया है।

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