नई दिल्ली: फीफा विश्व कप 2026 में Lionel Messi ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उन्हें फुटबॉल का सबसे बड़ा जादूगर क्यों कहा जाता है। अल्जीरिया के खिलाफ ग्रुप-जे मुकाबले में अर्जेंटीना के कप्तान ने शानदार हैट्रिक लगाकर अपनी टीम को 3-0 की जीत दिलाई। यह मैच उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का 200वां मुकाबला भी रहा, जिसे उन्होंने ऐतिहासिक बनाते हुए कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए।
इस प्रदर्शन के साथ मेसी विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने के मामले में जर्मनी के दिग्गज मिरोस्लाव क्लोज़ की बराबरी पर पहुंच गए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विश्व कप शुरू होने से पहले उनके नाम 13 गोल थे, लेकिन इस मैच में तीन गोल जोड़कर उनका आंकड़ा 16 तक पहुंच गया, जिससे उन्होंने एक और बड़ा कीर्तिमान स्थापित कर दिया।
मेसी ने मैच के 17वें मिनट में अपनी क्लास दिखाई। उन्होंने मिडफील्ड में गेंद हासिल की, कुछ कदम आगे बढ़े और फिर बॉक्स के बाहर से बाएं पैर का शानदार शॉट लगाया। गेंद सीधे गोलपोस्ट के कोने में जा समाई और अल्जीरिया के गोलकीपर लुका जिदान उसे रोकने में पूरी तरह बेबस नजर आए। यह मेसी के विश्व कप करियर का 14वां गोल था और इसी के साथ अर्जेंटीना ने बढ़त हासिल कर ली।
दूसरा गोल 60वें मिनट में आया। एलेक्सिस मैक एलिस्टर ने दूर से जोरदार शॉट लगाया, जिसे जिदान पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर सके। गेंद उनके हाथों से छिटक गई और रिबाउंड पर सबसे पहले मेसी पहुंचे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने बिना कोई गलती किए गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। यह उनके विश्व कप करियर का 15वां गोल था और अर्जेंटीना की बढ़त दोगुनी हो गई।
मैच के 76वें मिनट में मेसी ने अपनी हैट्रिक पूरी की। शानदार टीम मूव के बाद गेंद उनके पास पहुंची। उन्होंने बॉक्स के बाहर से जगह बनाई और अपने पसंदीदा बाएं पैर से सटीक शॉट लगाकर गेंद को नेट में पहुंचा दिया। इस गोल के साथ मेसी ने विश्व कप में अपने गोलों की संख्या 16 कर ली और मिरोस्लाव क्लोजे के सर्वकालिक रिकॉर्ड की बराबरी कर ली।
यह मुकाबला Lionel Messi के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। वह Argentina के लिए 200 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले पहले खिलाड़ी बन गए। साथ ही वह छह अलग-अलग फीफा वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने वाले दुनिया के पहले फुटबॉलर भी बने।
हैट्रिक के साथ उन्होंने अपने करियर की 61वीं और अर्जेंटीना के लिए 11वीं हैट्रिक पूरी की। 80वें मिनट में जब उन्हें मैदान से बाहर बुलाया गया, तो पूरा स्टेडियम खड़े होकर उनका अभिवादन करता नजर आया। मेसी ने कप्तानी की आर्मबैंड निकोलस ओटामेंडी को सौंप दी और मुस्कुराते हुए मैदान से बाहर गए।
उनके इस प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि 39 साल की उम्र में भी वह विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े सितारों में शुमार हैं और उनका जादू अब भी उतना ही असरदार है।


