नई दिल्ली : राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में भारत के कई खिलाड़ियों ने यादगार प्रदर्शन किए हैं, लेकिन 2006 मेलबर्न राष्ट्रमंडल खेलों में निशानेबाज समरेश जंग ने जो कारनामा किया, वह आज भी रिकॉर्ड बुक का अहम हिस्सा है। समरेश ने उस संस्करण में शानदार प्रदर्शन करते हुए पांच स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक अपने नाम किए थे। एक ही राष्ट्रमंडल खेल में सात पदक जीतकर उन्होंने भारतीय खेल इतिहास में अपनी अलग पहचान बनाई और उनका यह रिकॉर्ड दो दशक बाद भी कायम है।
समरेश जंग के शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें 2006 मेलबर्न राष्ट्रमंडल खेलों के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी को दिया जाने वाला प्रतिष्ठित डेविड डिक्सन अवॉर्ड भी प्रदान किया गया। हालांकि, जब समापन समारोह में उनके नाम की घोषणा हुई, तब तक वह अगले टूर्नामेंट की तैयारी के लिए ऑस्ट्रेलिया छोड़कर चीन रवाना हो चुके थे, इसलिए वह मंच पर यह सम्मान ग्रहण नहीं कर सके। उल्लेखनीय है कि दो दशक बीत जाने के बाद भी कोई अन्य भारतीय खिलाड़ी डेविड डिक्सन अवॉर्ड जीतने में सफल नहीं हुआ है, जिससे समरेश जंग की यह उपलब्धि आज भी भारतीय खेल इतिहास में विशेष स्थान रखती है।
डेविड डिक्सन अवॉर्ड मिला, मगर मंच पर नहीं थे समरेश जंग
2006 मेलबर्न राष्ट्रमंडल खेलों के समापन समारोह में जब डेविड डिक्सन अवॉर्ड विजेता के नाम का ऐलान होना था, तब सभी की नजरें समरेश जंग को तलाश रही थीं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हालांकि, वह इससे पहले ही चीन रवाना हो चुके थे, जहां उन्हें भारतीय टीम के साथ ISSF शूटिंग वर्ल्ड कप में हिस्सा लेना था। समरेश जंग इस उपलब्धि को याद करते हुए मजाकिया अंदाज में कहते हैं, ‘‘वह कहावत सुनी है, खुदा मेहरबान तो गधा पहलवान। वह इस कहावत के जरिये अपनी उपलब्धि को हल्के-फुल्के अंदाज में याद करते हैं।’’
समरेश जंग ने तीन राष्ट्रमंडल खेलों में जीते 14 पदक
समरेश जंग ने मैनचेस्टर 2002, मेलबर्न 2006 और नई दिल्ली 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इन तीनों संस्करणों में उन्होंने 14 पदक जीते। राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए उनसे ज्यादा पदक सिर्फ जसपाल राणा ने जीते हैं। जसपाल राणा के नाम 15 पदक दर्ज हैं। फिलहाल समरेश जंग भारतीय पिस्टल टीम के राष्ट्रीय कोच हैं और इन दिनों चीन के हांगझू में चल रहे ISSF वर्ल्ड कप में टीम के साथ मौजूद हैं।
समरेश जंग का सपना था हर इवेंट में गोल्ड
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार समरेश जंग ने बताया कि 2006 मेलबर्न राष्ट्रमंडल खेलों के लिए रवाना होने से पहले उनसे पूछते थे कि उनका लक्ष्य कितने स्वर्ण पदक जीतने का है। इस पर वह हमेशा आत्मविश्वास से कहते थे कि जिस-जिस स्पर्धा में हिस्सा लूंगा, हर इवेंट में स्वर्ण पदक जीतना चाहता हूं। समरेश के इसी विजयी जज़्बे ने उन्हें मेलबर्न में ऐतिहासिक प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया, जहां उन्होंने पांच स्वर्ण सहित कुल सात पदक जीतकर भारतीय शूटिंग के इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया। उस समय उनका लक्ष्य एक ही राष्ट्रमंडल खेल में सबसे ज्यादा स्वर्ण पदक जीतने का रिकॉर्ड बनाना था। वह सात स्वर्ण पदक जीतने की उम्मीद लेकर ऑस्ट्रेलिया पहुंचे थे। हालांकि, वह पांच स्वर्ण पदक तक ही पहुंच सके, लेकिन उनके प्रदर्शन ने उन्हें पूरे खेलों का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बना दिया।
समारोह में नहीं पहुंचे, बाद में मिली अवॉर्ड की ट्रॉफी
समरेश जंग ने बताया कि उन्हें उस समय यह भी नहीं पता था कि उन्हें डेविड डिक्सन अवॉर्ड दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार समरेश जंग ने बताया, ‘‘जब यह पुरस्कार दिया गया, तब तक मैं ऑस्ट्रेलिया छोड़ चुका था और चीन पहुंच गया था। बाद में मुझे इस अवॉर्ड की प्रतिकृति (रेप्लिका) दी गई।’’ समरेश जंग डेविड डिक्सन अवॉर्ड जीतने वाले इकलौते भारतीय खिलाड़ी हैं।
पांच गोल्ड जीतने के बाद बने ‘गोल्डफिंगर’
मेलबर्न राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान समरेश जंग लगातार स्वर्ण पदक जीत रहे थे। उनके शानदार प्रदर्शन से प्रभावित होकर आयोजन में मौजूद वालंटियर्स (स्वयंसेवकों) ने उन्हें ‘गोल्डफिंगर’ कहना शुरू कर दिया था। ।
दिग्गज निशानेबाजों के दम पर मजबूत था भारत का दल
2006 मेलबर्न राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय शूटिंग दल में अभिनव बिंद्रा, राज्यवर्धन सिंह राठौर, जसपाल राणा और गगन नारंग जैसे दिग्गज निशानेबाज शामिल थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार समरेश जंग ने उस दौर को याद करते हुए बताया कि पूरी टीम एक परिवार की तरह रहती थी और खिलाड़ियों के बीच बेहतरीन तालमेल था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, “आज की तरह खिलाड़ियों के साथ अलग-अलग विशेषज्ञों की बड़ी टीम नहीं होती थी। उस समय पूरी टीम के लिए सिर्फ एक स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट होता था, जो सभी खिलाड़ियों के साथ सामूहिक सत्र आयोजित करता था।” समरेश के अनुसार, टीम की यही एकजुटता और आपसी सहयोग उनके शानदार प्रदर्शन की बड़ी वजहों में से एक था।
तेज संगीत से गूंजता था जसपाल राणा का कमरा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार समरेश जंग ने मेलबर्न राष्ट्रमंडल खेलों की यादें साझा करते हुए बताया कि जसपाल राणा के कमरे में अक्सर तेज संगीत बजता था। कोच कभी-कभी नाराज भी हो जाते थे, लेकिन खिलाड़ियों का प्रदर्शन इतना शानदार था कि ज्यादा कुछ नहीं कहते थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार समरेश जंग ने बताया, ‘‘हम पदक जीतकर आते थे, फूल कमरे में रखते थे और संगीत चला देते थे। अगले दिन फिर नई स्पर्धा खेलनी होती थी।’’ मेलबर्न राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय शूटिंग टीम ने 26 पदक अपने नाम किये थे। इनमें 16 स्वर्ण पदक शामिल थे।
शूटिंग के बिना ग्लासगो 2026 में भारत की पदक उम्मीदों को झटका
23 जुलाई से शुरू हो रहे ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में शूटिंग को प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं बनाया गया है, जिसका सीधा असर भारत की पदक संभावनाओं पर पड़ सकता है। राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में भारत ने शूटिंग में सबसे अधिक सफलता हासिल करते हुए कुल 135 पदक जीते हैं। इसके बावजूद यह खेल पहले बर्मिंघम 2022 और अब ग्लासगो 2026 के कार्यक्रम से भी बाहर है। ऐसे में भारत के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है। हालांकि, 2030 में अहमदाबाद में प्रस्तावित राष्ट्रमंडल खेलों में शूटिंग की वापसी की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे भारतीय निशानेबाजों को फिर से अपनी ताकत दिखाने का मौका मिल सकता है।
हर प्रतियोगिता से मिलता है नया अनुभव
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार समरेश जंग का मानना है कि किसी भी खिलाड़ी के लिए हर प्रतियोगिता का अपना महत्व होता है, फिर चाहे वह ओलंपिक जैसी बड़ी प्रतियोगिता का हिस्सा हो या नहीं। उन्होंने कहा, “हर प्रतियोगिता आपको कुछ न कुछ सिखाती है और वही अनुभव आगे आने वाले टूर्नामेंट में काम आता है। हमारे समय में हम रिकवरी जैसी चीजों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते थे। कोच जो कहते थे, हम वही करते थे।” समरेश ने यह भी कहा कि आज के दौर में खिलाड़ियों के बीच जरूरत से ज्यादा स्पेशलाइजेशन देखने को मिल रहा है, जबकि खेल में संतुलन और अनुभव भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।


