कम उम्र में बहुत कुछ झेला, लेकिन हार नहीं मानी: वापसी के बाद बोले मयंक यादव

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हरारे। भारत के युवा तेज गेंदबाज मयंक यादव ने जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले टी20 में शानदार वापसी करते हुए प्लेयर ऑफ द मैच बनने के बाद कहा कि चोटों के कारण मैदान से दूर रहना उनके करियर का सबसे कठिन दौर था। उन्होंने कहा कि 22-23 साल की उम्र में लगातार चोटों से जूझना आसान नहीं था, लेकिन देश के लिए खेलने का सपना उन्हें लगातार प्रेरित करता रहा। दो साल बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लौटे मयंक ने चार ओवर में 18 रन देकर दो विकेट झटके और भारत की सात विकेट की जीत में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि कप्तान श्रेयस अय्यर ने मैच के दौरान गेंदबाजों पर पूरा भरोसा जताया, जिससे उन्हें अपनी योजनाओं के अनुसार गेंदबाजी करने का आत्मविश्वास मिला। मयंक ने कहा कि पहली बार श्रेयस की कप्तानी में खेलते हुए वह पूरी तरह सहज महसूस कर रहे थे।

युवा तेज गेंदबाजों प्रिंस यादव और अशोक शर्मा के साथ तालमेल पर मयंक ने कहा कि पिच की जानकारी और रणनीति साझा करने से टीम को फायदा मिला। उन्होंने वैभव सूर्यवंशी की 18 गेंदों में खेली गई रिकॉर्ड अर्धशतकीय पारी की भी जमकर तारीफ की। मयंक ने कहा कि 15 साल की उम्र में जिस तरह वैभव गेंदबाजों पर हमला करते हैं, वह अविश्वसनीय है और इस बार उन्हें अपनी टीम में देखकर खुशी हुई।

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