तिलक वर्मा ने दिखाई मैच के हिसाब से खुद को ढालने की कला

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हरारे.  भारतीय टीम के युवा बल्लेबाज और टी20 उपकप्तान तिलक वर्मा ने जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में शानदार अर्धशतकीय पारी खेलकर साबित कर दिया कि वह नई भूमिका के अनुरूप खुद को तेजी से ढाल रहे हैं। लंबे समय से स्पिन गेंदबाजी के खिलाफ उनकी बल्लेबाजी पर उठ रहे सवालों का जवाब उन्होंने हरारे में अपने प्रदर्शन से दिया।  सीरीज के दूसरे मुकाबले में भारत शुरुआती तीन विकेट गंवाकर दबाव में था। ऐसे समय में नंबर-5 पर बल्लेबाजी करने उतरे तिलक वर्मा ने जिम्मेदारी संभाली और संयम के साथ आक्रामक बल्लेबाजी की। उन्होंने जिम्बाब्वे के कप्तान सिकंदर रजा की स्पिन गेंदबाजी का बेहतरीन तरीके से सामना किया और सिर्फ 23 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।

इस साल टी20 क्रिकेट में तिलक का स्ट्राइक रेट और औसत भारतीय बल्लेबाजों में सबसे कम रहा था। उनकी बल्लेबाजी तकनीक, खासकर स्पिनरों के खिलाफ खेलने की क्षमता पर सवाल उठ रहे थे। हालांकि इंग्लैंड सीरीज और जिम्बाब्वे दौरे के बीच मिले एक सप्ताह के ब्रेक में उन्होंने अपनी तकनीक पर कड़ी मेहनत की। उसका असर उनकी बल्लेबाजी में साफ दिखाई दिया। उन्होंने स्वीप, कट और पिक-अप शॉट जैसे स्ट्रोक पूरे आत्मविश्वास के साथ खेले।

तिलक की इस पारी की सबसे बड़ी खासियत केवल तेजी से रन बनाना नहीं थी, बल्कि मैदान पर लगी फील्ड के अनुसार बल्लेबाजी करना भी था। उन्होंने क्रीज का शानदार इस्तेमाल करते हुए गेंदबाजों की रणनीति को विफल किया और विकेट के दोनों ओर आसानी से रन बटोरे। खास तौर पर ब्रैड इवांस के खिलाफ क्रीज से बाहर निकलकर काऊ कॉर्नर के ऊपर खेला गया उनका पिक-अप शॉट उनकी मैच समझ का बेहतरीन उदाहरण रहा।

टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में तिलक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पहले नंबर-3 पर आया था, जहां उन्होंने दक्षिण अफ्रीका दौरे पर लगातार दो शतक लगाए थे। लेकिन टीम संयोजन में बदलाव के बाद अब उन्हें नंबर-5 की नई भूमिका निभानी पड़ रही है, जहां कम गेंदों में प्रभाव छोड़ने की चुनौती रहती है। हरारे में उनकी पारी ने दिखाया कि वह इस भूमिका में भी सफल होने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

महज 23 वर्ष की उम्र में भारतीय टी20 टीम का उपकप्तान बनने के बाद तिलक पर अपेक्षाएं और बढ़ गई हैं। टीम में कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच हर पारी उनके लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे माहौल में जिम्बाब्वे के खिलाफ खेली गई यह अर्धशतकीय पारी न केवल उनके आत्मविश्वास को बढ़ाएगी, बल्कि टीम प्रबंधन का भरोसा भी मजबूत करेगी।

तिलक वर्मा लगातार अपने खेल को बेहतर बनाने के लिए मेहनत कर रहे हैं। हाल ही में इंडिया-ए का दौरा समाप्त करने के तुरंत बाद उन्होंने तेलंगाना टी20 लीग में भी हिस्सा लिया ताकि अधिक समय तक बल्लेबाजी कर अपनी लय बनाए रख सकें। यदि वह स्पिन गेंदबाजी के खिलाफ इसी तरह लगातार सुधार करते रहे और अपनी ऑफ स्पिन गेंदबाजी को भी निखारते रहे, तो 2028 टी20 विश्व कप तक भारत को एक भरोसेमंद मध्यक्रम बल्लेबाज और प्रभावी फिनिशर मिल सकता है।

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