नई दिल्ली : वजन वर्ग में बने रहने के लिए मीराबाई चानू ने लगातार दो दिन तक कुछ नहीं खाया। प्रतियोगिता से एक रात पहले उन्होंने तिरंगे के रंगों वाले रिबन से खुद तितली के आकार की हेयर क्लिप तैयार की और उसे पहनकर देश के प्रति अपना जज्बा दिखाया। हालांकि, मुकाबले की शुरुआत में वह अपने पहले प्रयास में सफल नहीं हो पाईं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। इसके बाद शानदार वापसी करते हुए मीराबाई ने एक के बाद एक रिकॉर्ड तोड़े और लगातार तीसरी बार राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। उनका यह सफर संघर्ष, समर्पण और देश के लिए कुछ कर गुजरने की प्रेरणा देता है।
पोडियम पर जब तिरंगा सबसे ऊपर लहरा रहा था और पूरा स्टेडियम भारतीय राष्ट्रगान से गूंज रहा था, तब मीराबाई चानू की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह सिर्फ एक स्वर्ण पदक की कहानी नहीं थी, बल्कि देशभक्ति, त्याग, संघर्ष और अदम्य जज्बे की ऐसी मिसाल थी, जिसने फिर उन्हें भारतीय भारोत्तोलन की सबसे महान खिलाड़ियों में शुमार कर दिया।
ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में महिलाओं के 48 किलोग्राम भार वर्ग में मीराबाई चानू की चुनौती किसी प्रतिद्वंद्वी से ज्यादा अपने ही प्रदर्शन को बेहतर साबित करने की थी। उन्होंने आत्मविश्वास और शानदार तकनीक के साथ मुकाबले में हिस्सा लिया। मीराबाई ने स्नैच में 85 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 105 किलोग्राम भार उठाया। इस तरह उन्होंने कुल 190 किलोग्राम वजन उठाकर बेहतरीन प्रदर्शन किया और अपनी मजबूत दावेदारी पेश की।
22 किग्रा के अंतर से मीराबाई ने दिखाया दम
इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने राष्ट्रमंडल और राष्ट्रमंडल खेलों के कई रिकॉर्ड अपने नाम किये। उनका दबदबा इतना जबरदस्त था कि दूसरे स्थान पर रहीं नाइजीरिया की रूथ असुओको न्यॉन्ग उनसे 22 किलोग्राम पीछे रहीं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मीराबाई चानू की शुरुआत हालांकि उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। उन्होंने स्नैच में 82 किलोग्राम के अपने पहले प्रयास में सफलता हासिल नहीं की, लेकिन चैंपियन खिलाड़ियों की पहचान ही मुश्किल परिस्थितियों में वापसी करना होती है।
मीराबाई चानू का पहला दांव ही बना ऐतिहासिक
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अगले ही प्रयास में उन्होंने वही वजन आसानी से उठाया और फिर रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। क्लीन एंड जर्क में भी उनका पहला प्रयास असफल रहा, लेकिन दूसरे प्रयास में 105 किलोग्राम का भार सफलतापूर्वक उठाकर उन्होंने स्वर्ण पदक पक्का कर लिया। इसके बाद एशियाई खेलों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने तीसरा प्रयास नहीं किया।
अपनी कहानी बयां कर भावुक हुईं मीराबाई चानू
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार स्वर्ण पदक जीतने के बाद बातचीत में मीराबाई चानू की पहली बात ही उनके कठिन त्याग और कड़े अनुशासन की कहानी बयां कर गई। मुस्कुराते हुए उन्होंने कहा, “जल्दी-जल्दी करो, मैंने दो दिन से कुछ नहीं खाया है।” दरअसल, भारोत्तोलन की वजन वर्ग प्रतियोगिताओं में तय वजन बनाए रखना खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है, जिसके लिए उन्हें सख्त अनुशासन और कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। मीराबाई ने भी इसी अनुशासन का पालन किया और उसका परिणाम उन्हें स्वर्ण पदक के रूप में मिला। पूरे टूर्नामेंट के दौरान उनकी देशभक्ति भी चर्चा का विषय रही। प्रतियोगिता से एक रात पहले उन्होंने भारतीय तिरंगे के रंगों वाले रिबन से खुद तितली के आकार की हेयर क्लिप तैयार की और उसे पहनकर देश के प्रति अपना सम्मान और जज्बा दिखाया।
देश के लिए जुनून, तिरंगे के रंगों से सजाया अपना अंदाज
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार स्वर्ण पदक जीतने के बाद मीराबाई चानू ने अपनी तिरंगे वाली हेयर क्लिप के बारे में बताते हुए कहा, “मैं भारत के लिए कुछ करना चाहती थी, इसलिए मैंने तिरंगे के रंगों वाले रिबन से यह क्लिप बनाई।” उनके लिए यह छोटी-सी पहल सिर्फ एक सजावट या फैशन का हिस्सा नहीं थी, बल्कि देश के प्रति सम्मान, गर्व और अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का एक खास तरीका था। मीराबाई का यह अंदाज पूरे टूर्नामेंट में उनके देशप्रेम और जज्बे का प्रतीक बन गया।
पोडियम पर मीराबाई चानू को गले में जब स्वर्ण पदक पहनाया गया उस समय वह भावुक हो गईं। जब भारतीय राष्ट्रगान बजा और तिरंगा सबसे ऊपर लहराया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, ‘‘तिरंगे को देखना और राष्ट्रगान सुनना स्वाभाविक रूप से आंखों में आंसू ला देता है। ये खुशी के आंसू थे, क्योंकि मैंने 2026 राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए पहला स्वर्ण पदक जीता था। मैं उन सभी भारतीयों का धन्यवाद करना चाहती हूं, जिन्होंने मेरे लिए दिल से प्रार्थना की।’’
इस जीत के साथ मीराबाई चानू ने अपने शानदार करियर में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ लिया। टोक्यो ओलंपिक 2020 में रजत पदक जीतने वाली मीराबाई इससे पहले 2017 विश्व चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक हासिल कर चुकी हैं। विश्व चैंपियनशिप में उनके नाम अब तक एक स्वर्ण और दो रजत पदक दर्ज हैं। अपनी लगातार उपलब्धियों के दम पर मीराबाई ने भारतीय भारोत्तोलन को दुनिया के शीर्ष स्तर पर नई पहचान दिलाई है।
राष्ट्रमंडल खेलों में मीराबाई चानू के नाम अब तक तीन स्वर्ण और एक रजत पदक दर्ज हो चुके हैं। उन्होंने 2021 एशियाई भारोत्तोलन चैंपियनशिप में क्लीन एंड जर्क में 119 किलोग्राम भार उठाकर विश्व रिकॉर्ड भी बनाया था, जो लगभग ढाई साल तक कायम रहा। भारतीय भारोत्तोलन में उनके शानदार योगदान और उपलब्धियों को देखते हुए भारत सरकार उन्हें पद्मश्री और देश के प्रतिष्ठित खेल सम्मान मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित कर चुकी है। मीराबाई की मेहनत, समर्पण और सफलता ने उन्हें भारतीय खेलों की सबसे प्रेरणादायक खिलाड़ियों में शामिल कर दिया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मीराबाई चानू की यह जीत केवल रिकॉर्ड बुक में दर्ज एक और स्वर्ण पदक नहीं है, बल्कि यह उनके संघर्ष, समर्पण और अटूट हौसले की कहानी है। यह उस खिलाड़ी की गाथा है, जिसने कठिन परिस्थितियों का सामना किया, दबाव को मात दी, असफल शुरुआत के बाद शानदार वापसी की और तिरंगे को दुनिया के सामने गर्व से लहराने के अपने संकल्प को पूरा किया। मीराबाई की मेहनत और जज्बे ने साबित किया कि मजबूत इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास से हर चुनौती को पार किया जा सकता है। यही कारण है कि मीराबाई चानू आज सिर्फ एक चैंपियन नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा और संघर्ष की मिसाल बन चुकी हैं।


