नई दिल्ली : भारतीय महिला हॉकी टीम आगामी विश्व कप, एशियाई खेलों और लॉस एंजिलिस ओलंपिक जैसे बड़े टूर्नामेंटों के लिए अपनी तैयारियों में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती। खिलाड़ियों ने फिटनेस और प्रदर्शन को प्राथमिकता देते हुए अपनी डाइट में भी बड़े बदलाव किए हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार टीम की अनुभवी गोलकीपर और पूर्व कप्तान सविता पूनिया ने बताया कि खिलाड़ी अब अपनी पसंदीदा चीजों जैसे मिठाई, चॉकलेट, केक और फास्ट फूड से दूरी बना रही हैं। खास बात यह है कि यह किसी दबाव या नियम के कारण नहीं, बल्कि पदक जीतने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए खिलाड़ियों का खुद का फैसला है। सविता के अनुसार, टीम की हर सदस्य अपने खेल और फिटनेस को बेहतर बनाने के लिए पूरी लगन से मेहनत कर रही है।
अनुशासन ऐसा कि ट्रेनर की निगरानी भी जरूरी नहीं
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सविता ने बताया कि टोक्यो ओलंपिक 2020 से पहले फिटनेस ट्रेनर वेन लोम्बार्ड खिलाड़ियों पर कड़ी नजर रखते थे, ताकि कोई मीठा या जंक फूड न खा ले। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने कहा, ‘टोक्यो ओलंपिक के समय भी वेन लोम्बार्ड ही ट्रेनर थे। वह जितने अच्छे ट्रेनर हैं, उतने ही फिटनेस को लेकर सख्त भी हैं। उन्होंने हमारे लिए बहुत ऊंचे मानदंड तय किए हैं। उनका मानना है कि अगर कुछ बड़ा हासिल करना है तो उसके लिए कुछ त्याग करना ही पड़ेगा।’
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सविता ने बताया कि भारतीय महिला हॉकी टीम की मानसिकता में अब बड़ा बदलाव आ चुका है और खिलाड़ियों को अनुशासन में रखने के लिए किसी निगरानी की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने कहा, “सबसे पहले टीम में चीनी बंद करवाई गई थी। मीठी चीजें या फास्ट फूड किचन में होते ही नहीं थे। अब भी स्थिति ऐसी ही है और कोई बदलाव नहीं आया है।”
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सविता ने एक किस्सा साझा करते हुए बताया कि हाल ही में न्यूजीलैंड में एफआईएच नेशंस कप जीतने के बाद विजेता टीम के लिए केक मंगवाया गया था। हालांकि खिलाड़ियों ने केक देखकर मजाक में कहा कि इसे खाना तो है नहीं। उन्होंने बताया कि अब खिलाड़ी खुद अपनी फिटनेस और डाइट को लेकर काफी सजग हैं और यह आदत टीम की संस्कृति का हिस्सा बन चुकी है।
पदक जीतने के जुनून में त्याग, सविता बोलीं- ओलंपिक के बाद ही खाएंगे मिठाई
300 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुकी सविता ने कहा कि यह त्याग ही खिलाड़ियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, ‘ये चीजें हमें प्रेरित करती हैं, क्योंकि हमें एहसास रहता है कि अच्छा खेलने के लिए हमने अपनी पसंदीदा चीजें छोड़ी हैं, परिवार से दूर रहे हैं और थकान के बावजूद लगातार अभ्यास किया है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘टोक्यो ओलंपिक के समय वेन को नजर रखनी पड़ती थी कि कोई मीठा तो नहीं खा रहा, लेकिन अब सभी खिलाड़ी खुद ही परहेज रखते हैं। अब मिठाई तो शायद लॉस एंजिलिस ओलंपिक के बाद ही खाएंगे।’
सविता का संकल्प- कोच को पदक के रूप में देना है रिटर्न गिफ्ट
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सविता ने कहा कि मुख्य कोच शोर्ड मारिन और सहयोगी स्टाफ ने टीम को विश्व कप के लिए पूरी तरह तैयार किया है। अब खिलाड़ियों की जिम्मेदारी है कि वे पदक जीतकर उनके भरोसे का सम्मान करें। उन्होंने कहा, ‘शोर्ड बहुत डिमांडिंग कोच हैं और उन्हें हारना बिल्कुल पसंद नहीं है। वह हर मैच को चुनौती की तरह लेते हैं और वही दबाव हमसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कराता है। वेन, रोडे, कियारा और मार्टिन हर खिलाड़ी की रिकवरी, डाइट और फिटनेस का व्यक्तिगत स्तर पर ध्यान रखते हैं। ताइके ताकेमा ने ड्रैग फ्लिक के साथ-साथ डिफेंस पर भी काफी काम कराया है। अब हमारी जिम्मेदारी है कि पोडियम पर पहुंचकर हम सभी को रिटर्न गिफ्ट दें।’
रणनीति और प्रेरणा के दम पर आगे बढ़ रही भारतीय महिला हॉकी टीम
सविता पूनिया का मानना है कि विश्व कप में हर मुकाबला चुनौतीपूर्ण होगा और टीम को मैच दर मैच अपनी रणनीति बनानी होगी। उन्होंने खासतौर पर चीन के खिलाफ पेनल्टी कॉर्नर डिफेंस को मजबूत करने पर जोर दिया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सविता ने कहा कि पिछले मुकाबलों में चीन के खिलाफ भारतीय टीम ने पेनल्टी कॉर्नर पर गोल गंवाए हैं, इसलिए इस बार इस पहलू में सुधार करना बेहद जरूरी होगा।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि विश्व कप में इंग्लैंड और चीन जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ बेहतर प्रदर्शन के लिए हर विभाग में तैयारी करनी होगी। सविता ने यह भी स्वीकार किया कि भारतीय पुरुष हॉकी टीम के लगातार शानदार प्रदर्शन से महिला टीम को काफी प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि टोक्यो ओलंपिक से पहले महिला टीम से ज्यादा उम्मीदें नहीं थीं, लेकिन अब पुरुष टीम के दो ओलंपिक पदकों और उनके प्रदर्शन ने हौसला बढ़ाया है। भारतीय महिला टीम भी देश, परिवार और पूरी टीम को गर्व का मौका देने के लक्ष्य के साथ मैदान पर उतरना चाहती है।
बेंगलुरु कैंप बना सफलता की नींव, खिलाड़ियों को मिल रही नई सीख
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सविता ने बताया कि बेंगलुरु में आयोजित राष्ट्रीय शिविर का फायदा महिला और पुरुष दोनों टीमों के खिलाड़ियों को मिल रहा है। एक ही जगह अभ्यास करने के कारण खिलाड़ी एक-दूसरे के अनुभवों और सुझावों से सीखते हैं। उन्होंने कहा कि पेनल्टी कॉर्नर डिफेंस को मजबूत बनाने के लिए वह अनुभवी डिफेंडर अमित रोहिदास जैसे खिलाड़ियों से भी लगातार सलाह लेती हैं। विश्व कप और एशियाई खेलों जैसे बड़े टूर्नामेंटों से पहले भारतीय महिला हॉकी टीम का यह अनुशासन और समर्पण साफ दिखाता है कि खिलाड़ी सिर्फ मैदान पर ही नहीं, बल्कि अपनी दिनचर्या, फिटनेस और खान-पान में भी चैंपियन बनने की तैयारी कर रही हैं। टीम का लक्ष्य बेहतर प्रदर्शन के साथ देश को गौरवान्वित करना है।


