नई दिल्ली : कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। इस बार लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह ने इतिहास रचते हुए पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष एथलीट बनने का गौरव हासिल किया। राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक गुलवीर ने ग्लासगो के स्कॉट्सटाउन स्टेडियम में 27 मिनट 49.8 सेकंड का समय निकालते हुए रजत पदक अपने नाम किया। गुलवीर केवल ऑस्ट्रेलिया के काई रॉबिन्सन से पीछे रहे, जिन्होंने 27:48.93 के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता। वहीं आइल ऑफ मैन के डेविड मुल्लार्की ने कांस्य पदक हासिल किया। गुलवीर का यह ऐतिहासिक प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है और उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में देश के नाम एक नया अध्याय जोड़ दिया।
गुलवीर सिंह ने रचा इतिहास, 10,000 मीटर में जीता सिल्वर मेडल
1986 के कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद यह पहली बार है जब पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में कोई अफ्रीकी खिलाड़ी टॉप तीन में जगह नहीं बना पाया। गुलवीर का सिल्वर मेडल 2022 में अविनाश साबले के 3000 मीटर स्टीपलचेज में जीते सिल्वर मेडल जैसा ही है जिसमें उन्होंने अपनी जिंदगी की सबसे बेहतरीन दौड़ से केन्याई खिलाड़ियों का दबदबा तोड़ा था। वह इस इवेंट में मेडल जीतने वाले पहले भारतीय हैं और इससे पहले 2010 में दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में कविता राउत ने महिलाओं के इसी इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। कविता खुद 50 से ज्यादा सालों में कॉमनवेल्थ गेम्स में कोई भी ट्रैक मेडल जीतने वाली पहली भारतीय थीं।
हरजिंदर कौर ने बढ़ाया भारत का गौरव, वेटलिफ्टिंग में जीता मेडल
ग्लासगो में भारत के वेटलिफ्टर्स का शानदार प्रदर्शन जारी है। हरजिंदर कौर ने महिलाओं के 69 किलोग्राम वेट कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीता जिससे इस खेल में भारत के लिए मेडल की संख्या 7 हो गई। हरजिंदर ने स्नैच में 101 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 126 किलोग्राम वजन उठाया और ये दोनों ही उनके पर्सनल बेस्ट थे। कनाडा की शार्लेट सिमोन्यू ने कुल 240 किलोग्राम वजन उठाकर गोल्ड मेडल जीता, जबकि ऑस्ट्रेलिया की नया फीबे हेमन ने कुल 218 किलोग्राम वजन उठाकर ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। स्नैच राउंड के बाद हरजिंदर दूसरे स्थान पर थीं और उन्होंने आखिर तक अपनी यह पोजिशन बनाए रखी।
29 वर्षीय हरजिंदर कौर ने लगातार दूसरी बार राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतकर अपनी निरंतरता साबित की। उन्होंने बर्मिंघम 2022 में जीते कांस्य पदक से एक कदम आगे बढ़ते हुए इस बार रजत पदक अपने नाम किया। उनकी सफलता का सफर गांव की सादगी और कठिन मेहनत से शुरू हुआ था। हरजिंदर की ताकत सबसे पहले रस्साकशी (टग-ऑफ-वॉर) के दौरान लोगों की नजर में आई, जिसके बाद उन्होंने वेटलिफ्टिंग को अपना करियर बनाया।
2022 में अपना पहला राष्ट्रमंडल पदक जीतने से पहले हरजिंदर ने द इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक साक्षात्कार में बताया था कि उनके मजबूत हाथ जिम में नहीं, बल्कि खेतों में काम करते हुए बने। वह रोज़ाना ‘टोका’ (चारा काटने वाली मशीन) चलाती थीं, जिसमें बड़े ब्लेड वाले भारी पहिये को लगातार घुमाना पड़ता था। यही मेहनत आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी और उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के लिए पदक जीतने वाली चैंपियन बना दिया।


