नई दिल्ली : भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की। उनका करियर उपलब्धियों से भरा रहा, लेकिन उनकी प्रतिभा और कद के मुकाबले उन्हें अपेक्षाकृत कम मौके मिलने की चर्चा लंबे समय तक होती रही। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार संन्यास के बाद दिए गए उनके हालिया बयान से भी ऐसा लगा कि उनके मन में कुछ बातें अब भी बाकी हैं।
इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटरों के साथ ‘स्टिक टू क्रिकेट’ पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान रहाणे ने टेस्ट क्रिकेट के भविष्य और सीनियर खिलाड़ियों के सम्मान का मुद्दा उठाया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने अपने विचार रखते हुए संकेत दिया कि अनुभवी खिलाड़ियों के योगदान को उचित महत्व मिलना चाहिए और टेस्ट क्रिकेट की परंपरा व संस्कृति को बनाए रखने के लिए सीनियर्स का सम्मान बेहद जरूरी है।
दरअसल, मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अजिंक्य रहाणे ने बातचीत के दौरान टेस्ट क्रिकेट के भविष्य को लेकर अपनी चिंता खुलकर जाहिर की। उन्होंने कहा कि लगातार अनुभवी खिलाड़ियों के टीम से बाहर होने और उनकी जगह युवा खिलाड़ियों को अवसर मिलने का दौर तेज़ हुआ है। रहाणे का मानना है कि नई प्रतिभाओं को मौका मिलना जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही सीनियर खिलाड़ियों का सम्मान और उनके अनुभव को महत्व देना भी उतना ही अहम है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रहाणे ने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें टेस्ट क्रिकेट के भविष्य को लेकर चिंता है। उनके इस बयान के बाद यह चर्चा तेज़ हो गई है कि क्या पिछले कुछ वर्षों में टीम इंडिया के भीतर अनुभवी खिलाड़ियों के साथ उचित व्यवहार और सम्मान नहीं हो रहा है। हालांकि, रहाणे ने किसी खिलाड़ी या चयनकर्ता का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान ने भारतीय क्रिकेट में सीनियर्स की भूमिका और उनकी अहमियत पर नई बहस जरूर छेड़ दी।
रहाणे के बयान के बाद उठे सवाल, क्या टीम इंडिया में सब कुछ सामान्य है?
फिलहाल जानते हैं पहले कि रहाणे ने क्या कहा? मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रहाणे बोले,”फ्रैंकली बोलूं तो मुझे टेस्ट क्रिकेट को लेकर डर है, क्योंकि जिस तरह से यह चल रहा है, हम सभी टेस्ट क्रिकेट को जीवित रहते देखना चाहते हैं। खासतौर से भारत, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, साउथ अफ्रीका जैसे 4-5 देशों में, क्योंकि मैंने जो पिछले 2-3 साल में देखा और समझा कि, आपको सीनियर खिलाड़ियों को टीम में रखने और उनका सम्मान करने की जरूरत है। खासतौर से यह भारतीय टीम के साथ है, जब सभी सीनियर खिलाड़ी एक साथ जा रहे हैं। यह एक बड़ा मुद्दा रहा है।”
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रहाणे के इस बयान की अंतिम लाइन इस बात की ओर इशारा कर रही है कि पिछले कुछ सालों में भारतीय टीम में सब कुछ ठीक नहीं रहा है। उन्होंने कहा है कि खासतौर से भारत में, और सभी सीनियर्स का एक साथ जाना। यह सच है इसी साल की शुरुआत में रोहित शर्मा और विराट कोहली ने संन्यास ले लिया था। उससे पहले रविचंद्रन अश्विन, अब अजिंक्य रहाणे।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रहाणे का मानना है कि अनुभवी खिलाड़ियों के लगातार बाहर होने से भारतीय टेस्ट टीम में एक बड़ा खालीपन (वॉयड) पैदा हो सकता है। उनके अनुसार, युवा खिलाड़ियों को अवसर देना जरूरी है, लेकिन टीम में अनुभव और नेतृत्व की मौजूदगी भी उतनी ही अहम होती है। ऐसे में उनका यह बयान भारतीय टीम मैनेजमेंट और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के लिए एक अहम संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
रहाणे की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब हाल के महीनों में रोहित शर्मा के भविष्य को लेकर भी काफी चर्चा और विवाद हो चुके हैं। इसके अलावा टीम इंडिया के मुख्य कोच और मुख्य चयनकर्ता के फैसलों पर भी लगातार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे माहौल में रहाणे का सीनियर्स के सम्मान और टेस्ट क्रिकेट के भविष्य को लेकर दिया गया बयान भारतीय क्रिकेट में नई बहस को जन्म दे रहा है।


