नई दिल्ली : आगामी एशियाई खेलों की तैयारियों के बीच भारतीय निशानेबाजी में एक नया विवाद सामने आया है। भारत के एक शीर्ष राष्ट्रीय शॉटगन कोच पर चेन्नई में प्रस्तावित निशानेबाजी परिसर के निर्माण का ठेका हासिल करने की कोशिश के दौरान हितों के टकराव (Conflict of Interest) के आरोप लगे हैं। मामले की शिकायत संबंधित अधिकारियों तक पहुंचने के बाद भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। एशियाई खेलों से पहले सामने आए इस विवाद ने भारतीय निशानेबाजी प्रशासन और टीम की तैयारियों को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित कोच भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के अंतर्गत भारत के शीर्ष शॉटगन निशानेबाजों को ओलंपिक, आईएसएसएफ विश्व कप, विश्व चैंपियनशिप और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए प्रशिक्षण देते हैं।
साई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि इस मामले से संबंधित शिकायत भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के मुख्यालय को प्राप्त हुई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच के लिए स्टेडियम विभाग और दिल्ली क्षेत्रीय निदेशक को जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिकारी ने यह भी कहा कि फिलहाल उनके पास जांच की प्रगति या रिपोर्ट से जुड़ी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘शिकायतकर्ता का नाम मुझे याद नहीं है, लेकिन शिकायत नाम सहित दर्ज कराई गई है। यह गुमनाम शिकायत नहीं है, इसलिए सरकारी प्रक्रिया के अनुसार इसकी विधिवत जांच की जाएगी।’’ एक पूर्व निशानेबाज ने पीटीआई से बातचीत में दावा किया कि यह शिकायत चेन्नई में निशानेबाजी परिसर निर्माण के ठेके से जुड़ी है।
निशानेबाज के अनुसार निविदा प्रक्रिया में असफल रहने वाले एक बोलीदाता ने पूरे मामले को सतर्कता विभाग (विजिलेंस) के समक्ष उठाया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘चेन्नई में लगभग 15-16 करोड़ रुपये की लागत से पांच ‘शॉटगन रेंज’ बनाई जानी थीं। संबंधित शॉटगन कोच ने भी इस ठेके के लिए आवेदन किया था। इसके बाद प्रतिद्वंद्वी बोलीदाता ने विजिलेंस विभाग में शिकायत दर्ज कराई।’’
उन्होंने यह भी दावा किया कि लंबित जांच के कारण संबंधित कोच को 19 सितंबर से चार अक्टूबर तक जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियाई खेलों के लिए भारतीय कोचिंग दल से बाहर रखा जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘राष्ट्रीय राइफल संघ भी जांच पूरी होने तक उन्हें एशियाई खेलों के लिए कोचों की सूची से बाहर कर सकता है।’’ इस संबंध में पूछे जाने पर एनआरएआई के महासचिव पवन कुमार सिंह ने मोबाइल पर भेजे संदेश के जरिये बताया कि वह विमान में होने के कारण टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं हैं। महासंघ के अध्यक्ष कलिकेश सिंह देव ने फोन कॉल, संदेश और व्हाट्सऐप पर भेजे गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एनआरएआई की ओर से कहा गया, ‘‘महासंघ को किसी भी कोच की निजी व्यावसायिक या कारोबारी गतिविधियों की जानकारी नहीं है।’’ बयान के मुताबिक, ‘‘हमें किसी भी कोच के खिलाफ विजिलेंस जांच की जानकारी नहीं है। एशियाई खेलों के तैयारी शिविर के लिए कोचों की सूची को आंशिक मंजूरी मिली है, जिसमें कुछ नाम शामिल नहीं हैं। इस संबंध में हम साई से आगे के स्पष्टीकरण और निर्देशों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।’’
गौरतलब है कि इस मामले में आरोपों का सामना कर रहे राष्ट्रीय शॉटगन कोच से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन कॉल का कोई जवाब नहीं दिया। इस वजह से आरोपों पर उनका पक्ष सामने नहीं आ सका। इस बीच, आगामी एशियाई खेलों की तैयारियों से जुड़े राष्ट्रीय हाई परफॉर्मेंस राइफल कोच मनोज कुमार भी साई की जांच के दायरे में हैं। उनके खिलाफ मिली शिकायतों की भी जांच की जा रही है। ऐसे में एशियाई खेलों से पहले भारतीय निशानेबाजी टीम के कोचिंग ढांचे पर उठे सवालों ने खेल प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
राष्ट्रीय शॉटगन कोच मनोज कुमार पर सरकारी स्वामित्व वाले डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में निजी कोचिंग चलाने और उनके निजी प्रशिक्षण सत्र में हिस्सा नहीं लेने वाले निशानेबाजों के साथ कथित भेदभाव करने के आरोप लगाए गए हैं। इसी तरह, 50 मीटर राइफल स्पर्धा के मुख्य कोच मनोज कुमार के खिलाफ भी अलग मामले में जांच जारी है। मामले से जुड़े एक सूत्र ने बताया, “हाल ही में साई मुख्यालय में इस मामले की सुनवाई हुई, जिसमें प्रभावित निशानेबाजों और उनके अभिभावकों की शिकायतें दर्ज की गईं।” इन शिकायतों के आधार पर साई पूरे मामले की जांच कर रहा है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।


