ड्राइवर पिता का बेटा, भाई की कमाई से पूरी हुई पढ़ाई; रग्बी में कांस्य के बाद अब शूटिंग में आकाश की उड़ान

0

नई दिल्ली : जयपुर के 22 वर्षीय निशानेबाज आकाश भारद्वाज आगामी एशियन गेम्स 2026 में भारतीय शूटिंग दल का हिस्सा होंगे। आइची-नागोया में होने वाले एशियाई खेलों की पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में वह भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। आज आकाश इस मुकाम पर पहुंचकर देश के लिए पदक जीतने की चुनौती के लिए तैयार हैं, लेकिन यहां तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं रहा। शुरुआती जीवन में उन्हें कई आर्थिक और पारिवारिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उनके पिता और बड़े भाई ने उनके करियर को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद उनके सपनों को पूरा करने में पूरा सहयोग दिया।

आकाश भारद्वाज ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए अपने सफर से जुड़ी कई बातें साझा कीं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उनका सफर किसी सामान्य अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज की तरह नहीं रहा। हैरानी की बात यह है कि 21 साल की उम्र तक, यानी करीब एक साल पहले तक, उन्होंने कभी पिस्टल हाथ में नहीं ली थी। इसके बावजूद आज जयपुर के यही निशानेबाज 20वें एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी कर रहे हैं। आकाश के पिता पेशे से ड्राइवर थे और उनकी मासिक आय करीब 10 हजार रुपये थी। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद परिवार ने आकाश के खेल के सपने को आगे बढ़ाने में उनका साथ दिया।

पिता का संघर्ष और भाई का सहयोग बना आकाश की ताकत

जयपुर स्थित निवारू रोड के निवासी आकाश का बचपन एक साधारण परिवार में गुजरा है। उनके पिता एक कमर्शियल ड्राइवर की नौकरी करते थे। उनकी मासिक आय तकरीबन 10 हजार रुपये थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आकाश ने खुद अपने परिवार के उस समय को याद किया और बताया,”एक ऐसे परिवार से आना जहां एक-एक रुपये की अहमियत हो, वहां शुरुआत में शूटिंग मेरी पहुंच से दूर लगती थी। मेरे पिता ने हमारी जरूरतें पूरी करने और जीवन यापन के लिए दिन-रात काम किया। जब मैंने शूटिंग की तरफ दिलचस्पी दिखाई तो उन्होंने क्रेडिट कार्ड से मुझे पिस्टल दिलाई।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आकाश भारद्वाज ने आगे बताया,”मेरे बड़े भाई शुभमन ने अपनी कमाई से मेरी एकेडमी की मासिक फीस भरी। मेरे पिता और भाई ने कई बलिदान दिए ताकि मैं अपने इस सपने को पूरा कर सकूं।” उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि शूटिंग एकेडमी में दाखिला लेने के बावजूद उनको वहां पहुंचने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती थी। उन्होंने बताया कि वह कभी 14 किलोमीटर साइकिल चलाकर जाते थे या राहगीरों से लिफ्ट मांगते थे या कभी-कभी पैदल ही यह दूरी तय करनी पड़ती थी। वहीं उन्होंने अपने शुरुआती करियर में बिना किसी निजी कोच के ही अपनी ट्रेनिंग शुरू की थी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आकाश ने बताया,”शुरुआत में मुझे बहुत सी चीजें खुद से ही समझनी पड़ीं। मैं हर दिन छह से सात घंटे ड्रिल्स करता था। मैं अपनी गलतियों को समझता था और बारीकी से उसका विश्लेषण करता था। मैं यह भी नोट करता था कि मेरी गर्दन झुकती है तो मेरे शॉट्स कैसे बदलते हैं। मेरी अकेले की ट्रेनिंग और उस कड़ी मेहनत ने मुझे शांत रहना और अपनी मेहनत पर भरोसा करना सिखाया था।”

रग्बी में भी पदक जीत चुके हैं आकाश

आकाश भारद्वाज के खेल सफर का एक खास पहलू यह भी है कि शूटिंग में आने से पहले उनकी रुचि एथलेटिक्स और रग्बी में थी। उन्होंने रग्बी में राष्ट्रीय स्तर पर कांस्य पदक भी जीता था। हालांकि, शरीर पर चोट लगने के डर के कारण उन्होंने धीरे-धीरे दूसरे खेलों की ओर रुख करना शुरू किया। इसी दौरान 2021 के अंत में एक शूटिंग अकादमी के विज्ञापन ने उनका ध्यान इस खेल की ओर खींचा और यहीं से निशानेबाजी के प्रति उनकी रुचि बढ़ने लगी।

वह शूटिंग रेंज की ओर आकर्षित होने लगे। उनके अंदर शूटिंग का नेचुरल टैलेंट था जिसे पहले दिन से देख सभी कोच हैरान थे। आकाश का एशियाई खेलों के लिए हुए ट्रायल्स में बेहतरीन रैंकिंग पॉइंट्स के आधार पर चयन हुआ। नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) की चयन प्रणाली में पारदर्शिता की बात बताते हुए शूटर ने कहा कि मेरे प्रदर्शन और संस्था के लगातार समर्थन से ही मुझे सफलता मिल पाई है।

आकाश भारद्वाज का सफर बताता है कि किसी लक्ष्य के प्रति सच्ची लगन और समर्पण हो तो मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियां भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। अपनी तैयारी पर भरोसा और अनुशासन के साथ आगे बढ़ने वाले आकाश अब जापान में भारत के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए उत्सुक हैं। वह एशियन गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व करने और अपने प्रदर्शन से तिरंगे का मान बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here