नई दिल्ली : भारत को अफगानिस्तान के खिलाफ तीन मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज खेलनी है, जिसकी शुरुआत 13 सितंबर से होगी। इस सीरीज के लिए भारतीय टीम का ऐलान पहले ही किया जा चुका है। टीम में वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन तीनों को शामिल किया गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ऐसे में अफगानिस्तान के खिलाफ पारी की शुरुआत कौन करेगा, इसे लेकर उत्सुकता बनी हुई है। अब पूर्व भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज दीप दासगुप्ता ने अपनी राय साझा करते हुए बताया है कि टी20 सीरीज में किन खिलाड़ियों को ओपनिंग की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।
संजू-वैभव की जोड़ी कर सकती है पारी की शुरुआत
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दीप दासगुप्ता ने कहा कि इंग्लैंड और जिम्बाब्वे के खिलाफ पिछली टी20 सीरीज में वैभव सूर्यवंशी- अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन-अभिषेक शर्मा की सलामी जोड़ियां देखी जा चुकी हैं। हालांकि, संजू सैमसन और वैभव सूर्यवंशी को अब तक एक साथ ओपनिंग करते हुए नहीं देखा गया है। ऐसे में दोनों को पारी की शुरुआत का मौका देकर यह देखना दिलचस्प होगा कि वे एक साथ कैसा प्रदर्शन कर सकते हैं। दासगुप्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी इस राय का मतलब किसी खिलाड़ी को टीम से बाहर करना नहीं है, बल्कि अलग संयोजन को आजमाने का सुझाव है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दीप ने आगे कहा कि वर्ल्ड कप से पहले हर कॉम्बिनेशन, हर खिलाड़ी को मौका और खेलने का पर्याप्त समय दिया जाए ताकि यह समझा जा सके कि टीम के लिए क्या चीज सही काम करती है। मैं ये बात इस वजह से कह रहा हूं कि जब टी20 क्रिकेट की बात आती है, तो मैंने कुछ आर्टिकल पढ़े जिनमें लोग कह रहे थे देखो, यह खिलाड़ी वापस आ गया है और वह खिलाड़ी भी वापस आ गया है, लेकिन टी20 क्रिकेट में अगले छह से आठ महीनों में न तो कोई पूरी तरह वापस आता है और न ही किसी को निकाला जाता है।
मेरे हिसाब से टीम में करीब 20-25 खिलाड़ी ऐसे होंगे, जिन्हें रोटेशन के आधार पर मौका दिया जाएगा। कुछ खिलाड़ी वापसी करेंगे तो कुछ को बाहर बैठना पड़ सकता है, लेकिन लक्ष्य यह होना चाहिए कि विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट से दो-तीन महीने पहले टीम का सही संयोजन तैयार हो जाए। मेरा मानना है कि इस दौरान अधिक से अधिक खिलाड़ियों को लगभग बराबर मौके मिलने चाहिए। हर संभावित कॉम्बिनेशन को पर्याप्त मैचों में आजमाया जाना चाहिए, ताकि यह समझा जा सके कि कौन सा संयोजन टीम के लिए कितना प्रभावी और फायदेमंद साबित होता है। आखिरकार अंतिम फैसला टीम प्रबंधन को ही करना है, लेकिन मेरी कोशिश होती कि अगले साल होने वाले मुकाबलों की संख्या को ध्यान में रखते हुए सभी खिलाड़ियों को अपनी क्षमता साबित करने का उचित मौका मिले।


