नई दिल्ली : भारतीय क्रिकेट टीम के सफल कप्तानों में शामिल सौरव गांगुली का बतौर खिलाड़ी करियर शानदार उपलब्धियों के साथ-साथ कई चर्चित विवादों से भी जुड़ा रहा। मैदान पर उनका आक्रामक अंदाज और बेबाक व्यक्तित्व उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग पहचान देता था, जिसके चलते उन्हें क्रिकेट जगत में ‘दादा’ के नाम से जाना गया। उनके करियर के दौरान ऑस्ट्रेलियाई मीडिया, कुछ पूर्व खिलाड़ियों और कोचों के साथ उनके मतभेद भी चर्चा में रहे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार गांगुली की कप्तानी के दौर की कई घटनाओं ने भारतीय क्रिकेट में उनकी मजबूत और मुखर छवि को और प्रमुख बनाया।
सौरव गांगुली पूरे करियर में विरोधी टीमों के एक बुरे सपने की तरह रहे। चाहें स्टीव वॉ को टॉस के लिए इंतजार करवाना हो या लॉर्ड्स की बालकनी से एंड्रयू फ्लिंटाफ को उन्हीं की स्टाइल में जवाब देना हो, गांगुली ने कभी ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के खिलाड़ियों की भारतीय टीम के आगे हेकड़ी चलने नहीं दी। उनके डेब्यू से लेकर रिटायरमेंट तक लगातार अपने खेल से ज्यादा उनका नाम विवादों के लिए चर्चा में रहा।
हालांकि, दादा ही ऐसे कप्तान थे जिन्होंने भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड में जाकर जीतना सिखाया था। शायद यही कारण था कि वह SENA देशों के लिए एक बुरे सपने जैसा थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कभी खुद को पीछे नहीं रखा और आगे आकर चीजों को बताया। फिर चाहें रिटायरमेंट का ही मुद्दा क्यों ना हो, उन्होंने तत्कालीन चयनकर्ता कृष्णमाचारी श्रीकांत को भी कटघरे में ला दिया था। एक-एक करके जानते हैं उनके करियर से जुड़ी ऐसी 5 बड़ी घटनाओं के बारे में:-
सौरव गांगुली का पहला बड़ा विवाद: 1992 डेब्यू के बाद 4 साल टीम से बाहर
सौरव गांगुली का डेब्यू जनवरी 1992 में हुआ और उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले वनडे में सिर्फ 4 रन बनाए। इसके बाद चार साल के लिए उन्हें बाहर कर दिया गया। इस दौरान उनके व्यवहार को लेकर भी कई बातें सामने आईं। यह भी पता चला कि टीम में आने के बाद उन्हें ड्रिंक्स मैदान पर ले जाने से मना कर दिया था। कई सीनियर्स और टीम के अधिकारियों ने भी उनके व्यवहार के बारे में शिकायत की थी, लेकिन गांगुली कभी नहीं झुके, भले ही उन्हें चार साल के लिए बाहर ही क्यों ना होना पड़ा हो।
हालांकि, बाद में इसको लेकर कई खुलासे भी हुए की गांगुली को बलि का बकरा बनाया गया था। जगमोहन डालमिया के विरोधी जो टीम के अंदर बतौर ऑफिशियल थे, उन्होंने युवा सौरव गांगुली के खिलाफ जबरन शिकायतें की थीं, ताकि डालमिया को नीचा दिखाया जा सके, क्योंकि दोनों (गांगुली और डालमिया) एक ही राज्य के थे। फिर 1996 में गांगुली की दोबारा टीम में वापसी हुई और फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
जब टॉस के लिए स्टीव वॉ को इंतजार करवाते रहे सौरव गांगुली
भारत के दौरे पर 2001 में आई ऑस्ट्रेलियाई सीरीज को सौरव गांगुली ने अपनी कप्तानी और दादागिरी दोनों से जवाब दिया था। अक्सर ऑस्ट्रेलियाई टीम को सामने वाले खिलाड़ियों और सामने वाली टीम को स्लेज करने और नीचा दिखाने के लिए जाना जाता था। सौरव गांगुली ने 2001 की सीरीज के दौरान कंगारुओं की हेकड़ी निकाली और उनको उन्हीं के अंदाज में जवाब दिया।
यह वाकय था उस सीरीज के आखिरी टेस्ट मैच से पहले का जब तत्कालीन भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष को टॉस के लिए इंतजार करवाया था। इस पर उन्होंने उस वक्त कहा था कि वह टीम के चयनकर्ताओं से बात करने में व्यस्त थे। वॉ को उनका यह व्यवहार नहीं पसंद आया था और इसकी उन्होंने आलोचना भी की थी। हाल ही में गांगुली ने एक टीवी शो में इस पर बताया था कि उनका ब्लेजर रह गया था और इसी कारण वह लेट हुए थे। हालांकि, फैंस को उनकी यह दादागिरी काफी पसंद आई थी।
फ्लिंटॉफ की हरकत का लॉर्ड्स की बालकनी से गांगुली ने दिया करारा जवाब
एंड्रयू फ्लिंटाफ ने भारत दौरे पर मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में टीम इंडिया की इंग्लैंड के खिलाफ हार के बाद टी शर्ट उतारते हुए अलग ही अंदाज में जश्न मनाया था। यह बात भारतीय कप्तान सौरव गांगुली को रास नहीं आई। उन्होंने लॉर्ड्स की बालकनी से इसका जवाब तब दिया, जब भारत ने नेटवेस्ट सीरीज के फाइनल में इंग्लैंड को 326 रन का लक्ष्य चेज करते हुए मात दी।
मोहम्मद कैफ, युवराज सिंह की बेहतरीन पारियों से टीम इंडिया ने जीत दर्ज की थी। इस मैच के बाद भारत के कप्तान सौरव गांगुली ने लॉर्ड्स की बालकनी में टी शर्ट उतारकर हवा में घुमाई थी और फ्लिंटाफ को जवाब दिया था। इस पर काफी विवाद भी हुआ लेकिन यह दिखाता है कि दादा किसी का घमंड चूर-चूर करने में देर नहीं लगाते थे और यही उनकी दादागिरी का सबूत था।
जब सौरव गांगुली को झेलना पड़ा 6 मैचों का बैन
सौरव गांगुली लॉर्ड्स की बालकनी वाले वाकये के बाद आईसीसी के निशाने पर थे। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की क्रिकेट लॉबी को उनका सेलिब्रेशन हजम नहीं हो रहा था। इसके बाद आईसीसी एलीट पैनल के मैच रेफरी के साथ उनका विवाद आम बात बन गया। इसी को लेकर एक बार स्लो ओवर रेट के चलते वेस्टइंडीज के पूर्व विश्व चैंपियन कप्तान ने बतौर मैच रेफरी उनके ऊपर 6 मैच का बैन लगा दिया।
आमतौर पर स्लो ओवर रेट के कारण जुर्माना या एक-दो मैच का बैन लगता था, मगर गांगुली के ऊपर 6 मैच का बैन लग गया। इसी कारण वह 2005 में इंडियन ऑयल कप के लिए श्रीलंका दौरे पर नहीं जा पाए और पहली बार राहुल द्रविड़ को कप्तान बनाया गया। हालांकि, बाद में मैच रेफरी द्वारा उनके ऊपर लगाए गए दो बैन जस्टिस एल्बे सच्स (Albey Sachs) द्वारा हटाए भी गए।
कोच ग्रेग चैपल से टकराव, रिटायरमेंट से पहले चयनकर्ता श्रीकांत से भी हुआ विवाद
सौरव गांगुली और ग्रेग चैपल के बीच विवाद भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित अध्यायों में से एक रहा है। ग्रेग चैपल ने 2005 में भारतीय टीम के मुख्य कोच का पद संभाला था। इसके बाद गांगुली की कप्तानी और टीम में उनकी जगह को लेकर मतभेद सामने आए। तत्कालीन चयन समिति ने गांगुली को कप्तानी से हटाया और बाद में उन्हें टीम से भी बाहर होना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम ने भारतीय क्रिकेट में काफी चर्चा बटोरी और गांगुली-चैपल विवाद लंबे समय तक सुर्खियों में रहा।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सौरव गांगुली ने मीडिया के सामने कहा था कि चैपल ने उन्हें कप्तानी छोड़ने के लिए कहा। बाद में चैपल के बीसीसीआई को गांगुली के खिलाफ किया गया ईमेल भी वायरल हुआ। गांगुली फैंस और क्रिकेट जगत को यह बिल्कुल रास नहीं आया। बाद में इंजरी, खराब प्रदर्शन का हवाला देते हुए गांगुली को बाहर किया गया और राहुल द्रविड़ को कप्तानी सौंपी गई। इन सब विवादों के बावजूद गांगुली नहीं झुके और संसद तक इस विवाद की गूंज पहुंची। गांगुली को टीम में वापस लाने की मांग उठी और वह दबाव में पाकिस्तान दौरे के लिए वह चुने गए।
इसके बाद जब सौरव गांगुली का अंतरराष्ट्रीय करियर अंतिम दौर में था, तब 2008 में मुख्य चयनकर्ता बने कृष्णमाचारी श्रीकांत के साथ उनकी बातचीत भी चर्चा में रही। इस दौरान गांगुली को टीम में लगातार अंदर-बाहर किए जाने का सिलसिला जारी रहा और उनके प्रदर्शन पर भी इसका असर दिखाई दिया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज के दौरान उनके चयन को लेकर भी काफी चर्चा हुई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गांगुली से इस सीरीज के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की बात कही गई थी, ताकि उन्हें सम्मानजनक विदाई मिल सके। इसके बाद गांगुली ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज के दौरान ही अपने संन्यास की घोषणा कर दी। इस तरह उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का अंतिम दौर भी भारतीय क्रिकेट के चर्चित घटनाक्रमों में शामिल रहा।


