भोपाल. द जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी द्वारा स्पेशल ओलंपिक भारत मध्यप्रदेश के सहयोग से, भोपाल में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का बुधवार को समापन हुआ। संगोष्ठी का मुख्य विषय “समावेशी खेल, यूनिफाइड स्पोर्ट्स, दिव्यांगजन अधिकार एवं अनुकूलित शारीरिक शिक्षा—खेलों में सुगम्यता एवं समान अवसर को सशक्त बनाना” रहा।
संगोष्ठी के दूसरे दिन के प्रथम सत्र में विशेषज्ञों ने छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं अभिभावकों को इस विषय पर मार्गदर्शन दिया कि दिव्यांग बच्चों को खेलों से किस प्रकार जोड़ा जाए तथा खेलों के माध्यम से उनके लिए शिक्षा, प्रशिक्षण एवं रोजगार के नए अवसर कैसे विकसित किए जा सकते हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि दिव्यांग बच्चों को खेलों से जोड़ना केवल उनके शारीरिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे उनके आत्मविश्वास, सामाजिक सहभागिता, नेतृत्व क्षमता और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलता है। समावेशी एवं यूनिफाइड खेलों के माध्यम से दिव्यांग और सामान्य बच्चों को एक साथ खेल के मंच पर लाकर समाज में समानता और सहभागिता की भावना को मजबूत किया जा सकता है।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि एवं पूर्व पर्यटन निगम अध्यक्ष तपन भौमिक ने कहा कि दिव्यांग बच्चों को खेल और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए इस प्रकार की संगोष्ठियों का निरंतर आयोजन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्पेशल ओलंपिक भारत के माध्यम से दिव्यांग खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है, जो सराहनीय पहल है। उन्होंने विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से आए छात्र-छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं को दिव्यांगजनों के प्रति संवेदनशील बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
समापन अवसर पर विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से आए छात्र-छात्राओं को सहभागिता के लिए प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम में जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार, डीन, फिजिकल एजुकेशन विभाग के प्रमुख हर्षवर्धन दवे, सहायक प्राध्यापक भूपेंद्र भट्ट, स्पेशल ओलंपिक भारत मध्यप्रदेश के सहायक खेल निदेशक राजेंद्र बारस्कर, मंजरी काले, पुष्पेंद्र कुशवाहा एवं पीयूष द्विवेदी,प्रियंका जोनवाल ,सहित स्पेशल ओलंपिक भारत मध्यप्रदेश के खिलाड़ी, प्रशिक्षक एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।
दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में लगभग 200 छात्र-छात्राओं, अभिभावकों एवं महाविद्यालय के प्राध्यापकों ने सहभागिता की। विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों द्वारा समावेशी खेल, यूनिफाइड स्पोर्ट्स, दिव्यांगजन अधिकार, अनुकूलित शारीरिक शिक्षा, खेलों में सुगम्यता तथा दिव्यांगजनों के लिए रोजगार एवं आत्मनिर्भरता के अवसरों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम के दौरान दिव्यांग खिलाड़ियों एवं बच्चों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं। अंत में राष्ट्रगान के साथ दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का विधिवत समापन हुआ।


