एशियाई पैरा खेलों में भारत का स्वर्णिम आगाज, मोना को सोना और अवनि को रजत

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नई दिल्ली : जापान के नागोया में सोमवार (19 अक्टूबर) से शुरू हुए एशियाई पैरा खेलों 2026 में भारत ने पहले ही दिन निशानेबाजी में दो पदक जीतकर शानदार शुरुआत की। मोना अग्रवाल ने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल एसएच1 स्पर्धा में स्वर्ण पदक अपने नाम किया, जबकि इसी स्पर्धा में अवनि लेखरा ने रजत पदक जीतकर भारत की पदक तालिका में इजाफा किया। निशानेबाजों की इस उपलब्धि से भारतीय दल में उत्साह का माहौल है।

इससे पहले दृष्टिबाधित भारतीय जूडोका कोकिला ने महिला जे-2 के 52 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में जगह बनाकर भारत का एक और पदक पक्का कर दिया था। 2024 पेरिस पैरालंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली मोना ने 250.0 का रिकॉर्ड स्कोर बनाया। उन्होंने अपनी साथी खिलाड़ी अवनि को 0.4 अंकों से पीछे छोड़ दिया। दो बार की पैरालंपिक गोल्ड मेडलिस्ट अवनि ने 249.6 के स्कोर के साथ सिल्वर मेडल अपने नाम किया।

रोमांचक मुकाबले में खिलाड़ियों ने दिखाया दम

मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। अंतिम शॉट से पहले मोना ने 239.2 के स्कोर के साथ अवनि पर केवल 0.1 अंक की बढ़त बना ली थी। इसी स्पर्धा में कोरिया की युनरी ली ने कांस्य पदक जीता। एसएच1 श्रेणी निचले अंगों में विकलांगता वाले निशानेबाजों के लिए है।

सीकर की मोना अग्रवाल ने निशानेबाजी में जीता स्वर्ण

राजस्थान के सीकर की रहने वाली मोना अग्रवाल का जन्म 8 नवंबर 1987 को हुआ था। नौ महीने की उम्र में उन्हें पोलियो हो गया। इससे उनके दोनों पैर प्रभावित हुए। पैरा शूटिंग में आने से पहले मोना पैरा-एथलेटिक्स और पैरा-पावरलिफ्टिंग में हिस्सा लेती थीं। उन्होंने महिलाओं की सिटिंग वॉलीबॉल में भी अहम भूमिका निभाई थी। 2019 में, उन्होंने पहली नेशनल सिटिंग वॉलीबॉल चैंपियनशिप में राजस्थान की महिला टीम की कप्तानी की और टीम को स्वर्ण पदक दिलाया।

2021 में मोना अग्रवाल ने शुरू किया राइफल शूटिंग का सफर

मोना ने दिसंबर 2021 में राइफल शूटिंग में प्रतिस्पर्धा करना शुरू किया। 2022 में नेशनल सिल्वर मेडल जीतने के बाद उन्होंने क्रोएशिया के ओसिजेक में आयोजित 2023 वर्ल्ड शूटिंग पैरा स्पोर्ट वर्ल्ड कप के मिक्स्ड टीम इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता। 2023 में उन्होंने दक्षिण कोरिया के चांगवोन में हुए वर्ल्ड कप में महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एसएच1 स्पर्धा में स्वर्ण पदक भी जीता।

अभिनव बिंद्रा से प्रेरित होकर निशानेबाजी में आगे बढ़ीं अवनि

2012 में जब अवनि 10 साल की थीं तब एक कार दुर्घटना में उन्हें रीढ़ की हड्डी (स्पाइनल कॉर्ड) में चोट लग गई। इससे उबरने के दौरान उनके पिता ने उन्हें खेलों में हाथ आजमाने के लिए प्रोत्साहित किया। ओलंपिक शूटिंग चैंपियन अभिनव बिंद्रा की आत्मकथा ‘अ शॉट एट हिस्ट्री’ से प्रेरित होकर उन्होंने 2015 में शूटिंग शुरू की। अवनि ने राजस्थान विश्वविद्यालय से पांच साल की लॉ डिग्री की पढ़ाई की। साथ ही ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं पर भी ध्यान दिया।

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