नई दिल्ली : भारत और न्यूजीलैंड के बीच पांच मैचों की वनडे सीरीज का पहला मुकाबला बुधवार (4 नवंबर 2026) को ऑकलैंड के ईडन पार्क में खेला जाएगा। दुनिया के अनोखे क्रिकेट मैदानों में शुमार ईडन पार्क की बनावट बल्लेबाजों और गेंदबाजों, दोनों के लिए अलग तरह की चुनौती पेश करती है। यहां सीधी बाउंड्री की दूरी महज 52 से 55 मीटर है, जबकि विकेट के पीछे का क्षेत्र भी काफी छोटा है। ऐसे में बल्लेबाजों के लिए चौके-छक्के लगाना आसान हो सकता है, लेकिन गेंदबाजों को अपनी लाइन-लेंथ और रणनीति में विशेष सावधानी बरतनी होगी।
ऐसे में बल्लेबाजों के लिए चौके-छक्के लगाने के मौके होंगे। ऐसे में गेंदबाजों और कप्तानों को रन रोकने के लिए खास रणनीति बनानी होगी। आखिर इस मैदान पर रन बनाने और विपक्षी टीम को बड़े स्कोर से रोकने का क्या है गणित? मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आइए जानते हैं कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच पहले वनडे मुकाबले के दौरान खिलाड़ियों को किन बातों का ध्यान रखना होगा?
ईडन पार्क दुनिया के उन चुनिंदा मैदानों में शामिल है, जहां क्रिकेट और रग्बी दोनों खेले जाते हैं। साल 1903 में जब इस मैदान की शुरुआत हुई थी, तब यहां सिर्फ क्रिकेट खेला जाता था। हालांकि, इसकी बनावट अंडाकार मैदानों से अलग है। यह थोड़ा आयताकार है, जो सर्दियों में रग्बी खेलने के लिए ज्यादा उपयुक्त माना जाता है। मैदान की इसी बनावट के कारण यहां बल्लेबाजों, गेंदबाजों और फील्डिंग करने वाले कप्तानों के सामने ऐसी चुनौतियां आती हैं, जो दुनिया के दूसरे क्रिकेट मैदानों पर कम ही देखने को मिलती हैं।
ईडन पार्क की छोटी सीधी बाउंड्री पर रहेगी बल्लेबाजों की खास नजर
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के नियमों के मुताबिक, पुरुषों के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मैदान की कोई भी बाउंड्री पिच के केंद्र से 65 गज (करीब 59.43 मीटर) से कम दूरी पर नहीं होनी चाहिए। महिला क्रिकेट में यह दूरी कम से कम 60 गज (करीब 54.86 मीटर) होनी जरूरी है। हालांकि, ईडन पार्क में अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने की अनुमति इसलिए है, क्योंकि इन नियमों के लागू होने से काफी पहले से यहां अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला जा रहा है।
ऑकलैंड के ईडन पार्क में पहला टेस्ट मैच 1930 में खेला गया था। ईडन पार्क की सबसे छोटी बाउंड्री पिच के केंद्र से करीब 52 से 55 मीटर की दूरी पर है। पहले मैदान के इस हिस्से में छोटी बाउंड्री एक्स्ट्रा कवर और बैकवर्ड स्क्वायर लेग की दिशा में होती थी। साल 2011 रग्बी विश्व कप से पहले पिच की दिशा में किया गया। इसके बाद छोटी बाउंड्री दोनों तरफ सीधी दिशा में आ गईं। मतलब बल्लेबाजों के लिए गेंद को सीधे मैदान के पार पहुंचाना ज्यादा आसान हो सकता है।
तब से ईडन पार्क में होने वाले मुकाबलों में सीधी बाउंड्री की अहम भूमिका रही है। बल्लेबाज ज्यादा से ज्यादा सीधे शॉट खेलकर गेंद को बाउंड्री के पार पहुंचाने की कोशिश करते हैं। वहीं, गेंदबाज ऐसी लेंथ पर गेंद डालते हैं, जिससे बल्लेबाजों को सीधे शॉट खेलने का मौका कम मिले। न्यूजीलैंड दौरे पर भारतीय टीम को पहली हार भी इसी मैदान पर चौथे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में मिली थी।
भारतीय वनडे टीम के कप्तान शुभमन गिल ने मंगलवार 3 नवंबर 2026 को कहा कि इस मैदान पर सीधी बाउंड्री को निशाना बनाना काफी आकर्षक लगता है। खासकर जब सामने स्पिन गेंदबाज हो और गेंद बल्लेबाज की पहुंच में हो तो आगे बढ़कर बड़ा शॉट खेलने का मन करता है। शुभमन गिल ने यह भी कि कि हर खिलाड़ी की अपनी रणनीति होती है। शुभमन गिल के मुताबिक, सीधी बाउंड्री की दूरी महज 50 से 55 मीटर होने के कारण उसे निशाना बनाने का लालच जरूर रहता है।
ईडन पार्क में विकेट के पीछे भी चौके-छक्के लगाने के भरपूर मौके
सिर्फ सीधे शॉट खेलकर रन बनाने की कोशिश करना काफी नहीं होगा। बल्लेबाजों को यह भी समझना होगा कि उनके सामने अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुभवी गेंदबाज होंगे, जो उन्हें आसानी से अपनी पसंद के शॉट नहीं खेलने देंगे। गेंदबाज हर बार बल्लेबाज को शॉट खेलने के लिए अनुकूल गेंद नहीं डालेंगे। ऐसे में बल्लेबाजों को गेंद की लेंथ के हिसाब से शॉट खेलने होंगे और स्ट्राइक रोटेट करते हुए स्कोरबोर्ड को आगे बढ़ाना होगा।
इसके अलावा, सही मौके पर जोखिम लेकर भी रन बनाए जा सकते हैं। इसके लिए बल्लेबाज क्रीज से आगे निकलकर या अपनी जगह बदलकर गेंद को अलग-अलग दिशाओं में खेल सकते हैं। विकेट के पीछे का क्षेत्र भी बल्लेबाजों के लिए काफी अहम होगा। यहां बाउंड्री सीधी दिशा के मुकाबले और भी पास है। ऐसे में बल्लेबाज लैप शॉट, रैंप शॉट, स्कूप और फाइन स्वीप जैसे शॉट खेलकर तेजी से रन बनाने की कोशिश कर सकते हैं।
ईडन पार्क में गेंदबाजी की रणनीति अहम, बहुत छोटी लेंथ से बचना होगा
दुनिया के दूसरे मैदानों की तरह ईडन पार्क में भी तेज गेंदबाजों के लिए सही लेंथ पर गेंदबाजी करना फायदेमंद रहेगा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस दशक में यहां खेले गए वनडे मैचों में तेज गेंदबाजों ने अच्छी लेंथ पर गेंदबाजी करते हुए 4.21 की इकॉनमी से रन दिए हैं। वहीं, अच्छी लेंथ से थोड़ी छोटी गेंदों पर उनकी इकॉनमी 4.91 रही है। इसके मुकाबले गेंदबाजों ने बहुत छोटी गेंदों पर 10.66 की इकॉनमी से रन लुटाए हैं। दिलचस्प यह है कि यहां छोटी लेंथ की गेंदें फुल लेंथ की गेंदों से भी ज्यादा महंगी साबित हुई हैं। फुल लेंथ पर गेंदबाजों की इकॉनमी 6.54 रही है।
ईडन पार्क की पिच पर उछाल मिलता है और मैदान के दोनों तरफ की बाउंड्री भी अपेक्षाकृत लंबी हैं। इस वजह से तेज गेंदबाज छोटी गेंदें डालने का विकल्प चुन सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हालांकि, उन्हें यह ध्यान रखना होगा कि जहां सीधे दिशा में बाउंड्री छोटी है, वहीं विकेट के पीछे का क्षेत्र और भी छोटा है। ऐसे में गेंद लाइन से भटकने पर बल्लेबाज रैंप, अपरकट, फाइन पुल और हुक जैसे शॉट खेलकर तेजी से रन बना सकते हैं।
इस मैदान पर एक और बात गेंदबाजों के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है। यहां बल्ले का किनारा लगने के बाद भी गेंद तेजी से बाउंड्री तक पहुंच सकती है। साल 2020 से अब तक कम से कम पांच वनडे पारियों की मेजबानी करने वाले दुनिया के सभी मैदानों में ईडन पार्क का अनियंत्रित शॉट्स से रन बनाने का औसत 4.09 रहा है। इस मामले में वह डबलिन के मलाहाइड मैदान (4.45) के बाद दूसरे स्थान पर है।
ईडन पार्क में स्पिन गेंदबाजों को कम आंकना पड़ सकता है भारी
ईडन पार्क जैसे मैदान पर भी अच्छे स्पिन गेंदबाज अपनी उपयोगिता साबित कर सकते हैं। यहां स्पिनरों को बल्लेबाजों को हवा में गेंद घुमाकर चकमा देने की कोशिश कम करनी पड़ सकती है। इसके बजाय उन्हें तेज और सपाट गेंदें डालनी चाहिए। अच्छी लेंथ से थोड़ी छोटी गेंदबाजी करके बल्लेबाजों को बड़े शॉट खेलने से रोकने की कोशिश करनी होगी।
स्पिन गेंदबाज ऑकलैंड में चलने वाली तेज हवा का भी फायदा उठा सकते हैं। खासकर विकेट के दोनों तरफ शॉट खेलने वाले बल्लेबाजों को हवा के विपरीत दिशा में खेलने के लिए मजबूर करना उनके लिए फायदेमंद हो सकता है। साल 2020 से अब तक ईडन पार्क में वनडे मैचों के दौरान स्पिन गेंदबाजों की इकॉनमी 5.45 रही है, जबकि तेज गेंदबाजों ने 5.64 की इकॉनमी से रन दिए हैं।
यह स्पिनरों के लिए अच्छा आंकड़ा है, खासकर इसलिए क्योंकि उन्हें अक्सर पारी के अपेक्षाकृत आसान ओवरों में गेंदबाजी का मौका मिलता है। हालांकि, विकेट लेने के मामले में तेज गेंदबाज ज्यादा प्रभावी रहे हैं। उनका गेंदबाजी औसत 25.98 रहा है, जबकि स्पिन गेंदबाजों का औसत 45.45 है।
ईडन पार्क में फील्डिंग सजाते समय कप्तानों को बरतनी होगी खास सावधानी
ईडन पार्क में फील्डिंग सजाना कप्तानों के लिए आसान नहीं होगा। यहां सीधे दिशा में बाउंड्री इतनी छोटी है कि कुछ परिस्थितियों में वहां फील्डर तैनात करने का खास फायदा नहीं मिलेगा। ऐसे में कप्तान उन जगहों पर फील्डर लगाने के बजाय गेंदबाजों पर भरोसा कर सकते हैं। गेंदबाजों को अपनी लाइन और लेंथ से बल्लेबाजों को सीधे शॉट खेलने से रोकने की कोशिश करनी होगी।
मैदान की बनावट के कारण आसपास के दो फील्डिंग क्षेत्रों में खड़े खिलाड़ियों की बल्लेबाज से दूरी में भी काफी अंतर हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उदाहरण के लिए, डीप बैकवर्ड पॉइंट पर खड़ा फील्डर बल्लेबाज से 60 मीटर दूर हो सकता है, जबकि डीप थर्ड पर खड़ा खिलाड़ी 50 मीटर से भी कम दूरी पर हो सकता है।
ऐसे में कप्तानों को यह समझना होगा कि किस स्थान पर सबसे तेज फील्डर को तैनात करना सही रहेगा। खासकर फाइन लेग और डीप थर्ड पर फील्डर लगाने के लिए उन्हें गेंद की दिशा और कोण का सही अंदाजा लगाना होगा। अगर फील्डिंग सजाने में चूक हुई तो बल्लेबाज गेंद की गति का इस्तेमाल करके आसानी से बाउंड्री हासिल कर सकते हैं।
भारतीय वनडे टीम के कप्तान शुभमन गिल ने भी मैदान की बनावट को चुनौतीपूर्ण बताया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार शुभमन गिल ने कहा, मैदान की बनावट थोड़ी अजीब है। अगर आपने यहां ज्यादा मैच नहीं खेले हैं तो फील्डरों को सही जगह पर तैनात करना चुनौती होगी। यह समझना भी मुश्किल हो सकता है कि गेंद किस दिशा में ज्यादा जाती है। मैदान के कौन से हिस्से ऐसे हैं, जहां गेंद बार-बार पहुंचती है। हमारे लिए यह अच्छी चुनौती है। उम्मीद है कि हम जल्द ही इन जगहों को समझने में सफल रहेंगे।


