निदास ट्रॉफी 2018: बांग्लादेश को रौंदने उतरेगा भारत

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कोलंबो। कोलंबो के प्रेमदासा स्टेडियम में रविवार को जब भारत और बांग्लादेश की टीम त्रिकोणीय टी-20 सीरीज के फाइनल मुकाबले में आमने-सामने होंगी तो दर्शकों को बांग्लादेशियों का नागिन डांस या भारतीयों का भांगड़ा देखने को मिलेगा। भारतीय टीम ने जीत की हैट्रिक पूरी कर फाइनल में जगह बनाई, तो वहीं बांग्लादेश ने ड्रामे से भरे हाईवोल्टेज मुकाबले में मेजबान श्रीलंका को शिकस्त देकर फाइनल तक का सफर तय किया। शनिवार को हुए तनाव भरे मुकाबले में बांग्लादेश के बल्लेबाज महमुदुल्लाह ने आखिरी ओवर की पांचवी गेंद पर छक्का लगाकर अपनी टीम को जीत दिलाई थी।
इस जीत ने बांग्लादेशियों को आत्मविश्वास दिया है। मगर बांग्लादेश के कप्तान शाकिब-अल-हसन का अपने खिलाड़ियों को मैदान से बाहर बुलाने की कोशिश करना और बांग्लादेशी खिलाड़ियों का ड्रेसिंग रूम में तोड़-फोड़ मचाना इस बात की गवाही है कि मानसिक संतुलन बनाए रखना उनके लिए चिंता का विषय है। एक औसत बांग्लादेशी प्रशंसक के लिए भारतीय क्रिकेट टीम एक बड़ी टीम है, जिसको वह हराते हुए देखना चाहते हैं । बांग्लादेशी खिलाड़ियों का कौशल उनके उत्साह से मेल नहीं खाता है जब शाकिब, मुशफिकुर रहीम और महमुदुल्लाह जैसे खिलाड़ी मैदान पर उतरते हैं। मगर कौशल की बात करें तो भारतीय टीम जरूर बांग्लादेशी क्रिकेटरों से कई कदम आगे दिखती है। दोनों टीमों की सलामी जोड़ी की बात करें तो रोहित और शिखर धवन ने दुनिया के हर मैदान पर रन बनाए हैं, वहीं बांग्लादेश के तमीम इकबाल और लिटोन दास तब चलते हैं जब उनका दिन होता है। हालांकि अन्य भारतीय विस्फोटक बल्लेबाज सुरेश रैना जैसा अनुभवी खिलाड़ी कोई और नहीं है। ऐसे में सौम्य सरकार से उनकी तुलना करना बेमानी होगा। विकेटकीपरों में भारत के दिनेश कार्तिक ने जहां कई मुश्किल मौकों पर खुद का मानसिक संतुलन बनाए रखा है, वहीं मुशफिकुर के साथ कम ही ऐसा देखा गया है। मनीष पांडे जरूर महमुदुल्लाह की तरह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इतने अनुभवी नहीं है, लेकिन पांडे का 10 साल का आइपीएल करियर उन्हें अलग स्थान पर खड़ा कर देता है। गेंदबाजी में तेज गेंदबाज शार्दुल ठाकुर ने जहां खुद को साबित किया, वहीं स्पिनर वाशिंगटन सुंदर की पॉवरप्ले में गेंदबाजी इस सीरीज में भारत की सफलता का मुख्य कारण रहा है। विजय शंकर भी गेंदबाजी में सफल साबित हुए हैं, लेकिन वह और सफल हो सकते थे अगर उनकी गेंद पर कैच नहीं छूटे होते। भारत के लिए चिंता का विषय दूसरा तेज गेंदबाज है, क्योंकि जयदेव उनादकट और मुहम्मद सिराज दोनों ही बहुत महंगे साबित हुए हैं। ऐसे में यह देखना होगा कि धीमे विकेट पर भारतीय टीम क्या दूसरे तेज गेंदबाज की जगह अक्षर पटेल या दीपक हुडडा को दूसरे गेंदबाजी ऑलराउंडर के तौर पर अंतिम 11 में मौका देगी।