नई दिल्ली। पूर्व विश्व चैंपियन विक्टर एक्सेलसन ने रविवार को भारतीय स्टार शटलर किदांबी श्रीकांत को हराकर इंडिया ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट जीत लिया. विक्टर ने खिताब जीतने के बाद कहा कि आंकड़ों में यह मुकाबला आसान लग रहा हो, लेकिन यह मुश्किल मैच था. श्रीकांत ने पहला गेम हारने के बाद दूसरे गेम में वापसी कर ली थी. अगर वे दूसरा गेम जीत जाते तो फिर मैच का नतीजा कुछ भी हो सकता था. दूसरी सीड विक्टर एक्सेलसन ने खिताबी मुकाबला 21-7, 22-20 से अपने नाम किया.
मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में किदांबी श्रीकांत ने कहा कि उनकी शुरुआत धीमी रही और उन्हें इसी का खामियाजा उठाना पड़ा. श्रीकांत को विक्टर के खिलाफ पांचवीं बार हार का सामना करना पड़ा है. इसके साथ ही विक्टर का श्रीकांत के खिलाफ जीत हार का रिकॉर्ड 5-3 हो गया है. डेनमार्क के विक्टर पीबीएल में भी खेलते रहे हैं. इस कारण विक्टर और श्रीकांत दोनों ही एकदूसरे की कमियों और खूबियों को बखूबी जानते हैं.
एकदूसरे को जानने का खेल में कितना फायदा मिलता है? इस सवाल पर विक्टर एक्सेलसन ने कहा, ‘मैं इस बारे में ज्यादा नहीं सोचता.’ इसके बाद उन्होंने हंसते हुए कहा, ‘मुझे सिर्फ इतना याद है कि श्रीकांत ने मुझे डेनमार्क में आकर हराया था. अब मैंने इंडिया आकर उन्हें हरा दिया है. देखिए आगे क्या होता है. अच्छा रहेगा कि वो भी मुझे हराएं और मैं भी उन्हें इंडिया हाकर हराऊं.’ श्रीकांत ने इसी सवाल के जवाब में कहा, ‘मैं भी इस बारे में ज्यादा नहीं सोचता. हम दोनों ही अटैकिंग गेम खेलते हैं. इसलिए जो खिलाड़ी भी निर्णायक मौकों पर धैर्यपूर्वक खेलने में कामयाब होता है, मैच उसकी ओर झुक जाता है. ’
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विक्टर एक्सलेसन ने फाइनल मुकाबला लगातार गेम में जीता. उन्होंने पहला गेम महज 11 मिनट में 21-7 से जीत लिया था. दूसरे गेम में दोनों के बीच कड़ी टक्कर हुई. दोनों खिलाड़ी एक समय 13-13 की बराबरी पर थे. इसके बाद स्कोर 14-14, 15-15, 16-16,17-17, 18-18 रहा. इस निर्णायक मौके पर श्रीकांत बढ़त बनाने में कामयाब रहे. वे 20-18 से आगे हो गए. इस तरह उनके पास दो गेम प्वाइंट थे. लेकिन विक्टर ने यहां पर लगातार चार प्वाइंट जीतकर श्रीकांत की वापसी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया.
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— BAI Media (@BAI_Media) April 1, 2019
एक्सेलसन ने दूसरे गेम में निर्णायक प्वाइंट जीतने से जुड़े सवाल पर कहा, ‘आपको थोड़े भाग्य की जरूरत होती है. शटल नेट से टकराकर उसकी ओर गिर गई और मैं ड्रिफ्ट को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने में सफल रहा. मैं धैर्य बरकरार रखने में सफल रहा. लेकिन यह कहा जा सकता है कि सफलता और विफलता के बीच अधिक अंतर नहीं था.’


