नई दिल्ली : क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स में भारतीय महिला टीम ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए नया अध्याय लिख दिया। महिला टेस्ट क्रिकेट की शुरुआत 1934 में हुई थी, लेकिन इस प्रतिष्ठित मैदान पर पहला महिला टेस्ट मैच आयोजित होने में 92 वर्ष लग गए। इस ऐतिहासिक मुकाबले में भारत और इंग्लैंड की महिला टीमें आमने-सामने थीं, जहां भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मेजबान इंग्लैंड को 270 रन से करारी शिकस्त दी। इस यादगार जीत के साथ भारत ने इंग्लैंड की धरती पर टेस्ट क्रिकेट में अपना अजेय अभियान भी बरकरार रखा। अब इस ऐतिहासिक सफलता के बाद क्रिकेट जगत में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या महिला विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) शुरू करने का समय आ गया है।
लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर पहला टेस्ट मैच 1884 में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की पुरुष टीमों के बीच हुआ था। 142 साल के इंतजार के बाद अब महिला क्रिकेट टीमों ने भी इस मैदान पर ऐतिहासिक टेस्ट मैच खेला। भारतीय महिला टीम ने नवंबर 2025 में वनडे वर्ल्ड कप जीतते हुए इतिहास रचा था। अब इस टीम ने टेस्ट क्रिकेट की दुनिया में भी इतिहास रच दिया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार लॉर्ड्स में ऐतिहासिक जीत के साथ भारतीय महिला टीम ने एक बार फिर अपनी टेस्ट क्रिकेट क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया। इस सफलता के बाद महिला विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) शुरू करने की मांग भी तेज हो गई है। हालांकि, इसके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि महिला टेस्ट क्रिकेट अभी बेहद सीमित है। भारत, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया ही ऐसी टीमें हैं, जिन्होंने नियमित रूप से महिला टेस्ट क्रिकेट खेला है, जबकि न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसी मजबूत क्रिकेट टीमों ने भी अब तक बहुत कम या लगभग कोई हालिया टेस्ट क्रिकेट नहीं खेला है। ऐसे में महिला डब्ल्यूटीसी की शुरुआत से पहले टेस्ट क्रिकेट का दायरा बढ़ाना और अधिक देशों की भागीदारी सुनिश्चित करना सबसे बड़ी जरूरत मानी जा रही है।
क्या महिला टेस्ट क्रिकेट को मिलेगा डब्ल्यूटीसी का मंच?
ऐसे में सवाल यही है कि क्या यह महिलाओं के WTC का सही समय है? या फिर अब उससे पहले महिलाओं के टेस्ट क्रिकेट को आगे बढ़ाने का वक्त आ चुका है। एक तरफ वनडे, टी20 में महिला क्रिकेट पुरुष क्रिकेट की बराबरी कर रहा है। यहां तक की दुनियाभर की कई टी20 लीग में महिलाओं के भी संस्करण होने लगे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इसके उदाहरण हैं भारत का WPL (Women Premier League), ऑस्ट्रेलिया का WBBL (Women Big Bash League) और इंग्लैंड का Women The Hundred टूर्नामेंट।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम के विश्व चैंपियन कोच और अपने समय में 11 हजार से ज्यादा फर्स्ट क्लास रन बनाने वाले अमोल मजूमदार ने भी इस पर प्रकाश डाला है। भारत की ऐतिहासिक जीत के बाद अमोल से महिलाओं से WTC को लेकर एक खास प्रश्न किया गया। उन्होंने इस जीत के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफतौर पर कहा कि अगर महिलाओं का WTC होता है तो इससे अच्छा कुछ नहीं हो सकता।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार “बिल्कुल हमें खुशी होगी अगर ऐसा हुआ (महिलाओं का WTC हुआ)। मैंने हमेशा टेस्ट क्रिकेट को क्रिकेट का अल्टीमेट फॉर्मेट माना है। सिर्फ लीडरशिप ग्रुप ही नहीं जो नई खिलाड़ी भी आ रही हैं, सभी ने टेस्ट क्रिकेट को प्राथमिकता दी है। इस साल हम तीन टेस्ट मैच खेल रहे हैं। एक हमने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला था और अब इंग्लैंड से खेला। इसी साल एक टेस्ट दिसंबर में हम साउथ अफ्रीका में उनके खिलाफ खेलेंगे। तो एक साल में तीन टेस्ट मैच हम खेल रहे हैं तो क्यों नहीं? लेकिन मैं इस पर प्रकाश डालने वाला या निर्णय देने के लिए कोई नहीं हूं। हां, मुझे लगता है कि अगर ऐसा हुआ तो शानदार होगा।”’
इंग्लैंड में एक भी टेस्ट मैच नहीं हारी भारतीय महिला टीम
भारतीय महिला क्रिकेट टीम का रेड बॉल क्रिकेट में बेहतरीन प्रदर्शन पिछले कुछ समय से लगातार जारी है। लॉर्ड्स में मिली इस ऐतिहासिक जीत का यह पल पिछले कुछ दिनों में भारत के शानदार प्रदर्शन को दर्शाता है। पिछले 11 टेस्ट मैचों में इंग्लैंड की सरजमीं पर भारतीय टीम ने सात जीत हासिल की हैं, जबकि तीन मैच ड्रॉ रहे हैं और सिर्फ एक में उसे हार मिली है।
इंग्लैंड में भारतीय महिला टीम का यह 11वां टेस्ट मैच था। वह इंग्लैंड में इस फॉर्मेट में अब भी अजेय है। जबकि भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने ओवरऑल 1976 से 2026 तक यानी 50 साल में 43 टेस्ट मैच खेले हैं और 9 में जीत दर्ज की है। भारत की 9 में से सात जीत इंग्लैंड में आई हैं। सात मैच भारतीय टीम हारी है और 27 मुकाबले ड्रॉ हुए हैं।
जय शाह के कार्यकाल में होगी शुरुआत?
भारत में महिला क्रिकेट को आगे बढ़ाने का सबसे ज्यादा श्रेयस मौजूदा आईसीसी चेयरमैन और बीसीसीआई के पूर्व सचिव जय शाह को जाता है। चाहें पुरुष क्रिकेट के समान सैलरी हो, या भारत में महिला प्रीमियर लीग की शुरुआत हो, या फिर बतौर आईसीसी चेयरमैन महिला वनडे वर्ल्ड कप की प्राइज मनी पुरुष वर्ल्ड कप से ज्यादा हो, यह सभी क्रांतिकारी फैसले जय शाह के नेतृत्व में हुए हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भारत ही नहीं आज पूरी दुनिया में अगर महिला क्रिकेट की नई पहचान स्थापित हो रही है तो उसमें जय शाह का अहम योगदान है। यही कारण है कि उनके मौजूदा बतौर आईसीसी चेयरमैन के कार्यकाल में महिलाओं के WTC करवाने की मांग तेज हो रही है। इससे ना सिर्फ महिला क्रिकेट को बढ़ावा मिलेगा। बल्कि आने वाली युवा जनरेशन के दिमाग में टेस्ट क्रिकेट का महत्व भी बढ़ेगा। आज के टी20 यानी फटाफट क्रिकेट के इस युग में अगर रेड बॉल क्रिकेट आगे बढ़ता है तो क्रिकेट को एक नया जन्म मिल जाएगा।


