नई दिल्ली : एशियन गेम्स 2026 में भारत ने सेलिंग में अपना पहला पदक जीत लिया। गुरुवार को पुरुषों के स्किफ इवेंट में मनु फ्रांसिस और प्रिंस कुरिसिंकल नोबल की भारतीय जोड़ी ने रजत पदक अपने नाम किया। 9 रेस के बाद भारतीय जोड़ी 23 पॉइंट्स के साथ दूसरे स्थान पर रही। चीन की वेन जाइडिंग और लियू तियान की जोड़ी ने 16 पॉइंट्स के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि हांगकांग, चीन के अकीरा ल्यूक सकाई और रसेल आयल्सवर्थ की जोड़ी 24 पॉइंट्स के साथ तीसरे स्थान पर रही। इस तरह भारतीय जोड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सेलिंग में भारत के पदक अभियान में एक और रजत पदक जोड़ दिया।
फ्रांसिस और नोबल का प्रदर्शन लगातार अच्छा रहा। उनका सबसे अच्छा नतीजा तीसरी रेस में आया, जिसे उन्होंने जीता। भारतीय सेलर्स ने रेस 3 जीती और रेस 1, 5 और 9 में दूसरे स्थान पर रहे। नौ रेस में उन्होंने कुल 29 पॉइंट्स हासिल किए। रेस आठ में छठे स्थान पर रहने के नतीजे को हटाकर उनका नेट स्कोर 23 रहा। यह मेडल पुरुषों के स्किफ इवेंट में भारत का पहला एशियन गेम्स सिल्वर मेडल और इस इवेंट में देश का दूसरा मेडल था। वरुण ठक्कर और केसी गणपति ने जकार्ता 2018 में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। मनु और प्रिंस का सिल्वर मेडल एशियन गेम्स में भारत का 24वाँ सेलिंग मेडल भी था। हांगझोउ 2023 में भारत ने तीन मेडल जीते थे।
ज्यादातर खेलों के विपरीत, सेलिंग में कम पॉइंट्स वाला स्कोरिंग सिस्टम होता है। इसमें रेस जीतने वाली बोट को एक पॉइंट, दूसरे स्थान पर रहने वाली बोट को दो पॉइंट्स मिलते हैं, और इसी तरह आगे भी। सबसे कम कुल स्कोर वाला विजेता बनता है, और तय संख्या में रेस होने के बाद सबसे खराब नतीजे को हटा दिया जाता है। हालांकि, चीन ने स्टैंडिंग में टॉप पर अपनी बढ़त बनाए रखी और नौ में से चार रेस जीतीं। यह सिल्वर मेडल 31 साल के फ्रांसिस और 30 साल के नोबल के लिए एक और बड़ी उपलब्धि है। दोनों बचपन से एक-दूसरे को जानते हैं।
कोच्चि के रहने वाले इन सेलर्स की इस खेल में शुरुआती दौर में ही दिलचस्पी जग गई थी और बाद में उन्होंने भोपाल के नेशनल सेलिंग स्कूल और केरल के मुजिरिस यॉटिंग क्लब में ट्रेनिंग ली। एशियाई खेलों में मिला यह मेडल उनकी पिछली कामयाबियों में एक और उपलब्धि है। इससे पहले वे एशियाई सेलिंग चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीत चुके हैं। स्किफ हल्की और छोटी सेलिंग बोट होती है, जिसे चलाने के लिए क्रू मेंबर्स के बीच बहुत अच्छे तालमेल की जरूरत होती है। इनमें रेस के नतीजे अक्सर रणनीतिक फैसलों, सही पोजिशनिंग और कई राउंड में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने से तय होते हैं।
मनु फ्रांसिस और प्रिंस नोबल कुरिसिंकल के लिए सेलिंग का सफर किसी चमक-दमक के बीच शुरू नहीं हुआ था। इसकी शुरुआत कोच्चि के चेराई बीच पर एक जुगाड़ से तैयार की गई नाव से हुई थी। आज यही दोनों खिलाड़ी नागोया की लहरों से जूझते हुए पुरुषों की स्किफ रेस में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीत चुके हैं। इस पदक के साथ एशियन गेम्स 2026 में सेलिंग में भारत का खाता भी खुल गया।
इस पूरी कहानी में एक चीज लगातार कायम रही और वह है दोनों की दोस्ती। मनु और प्रिंस दोस्त होने के साथ-साथ रिश्तेदार भी हैं। दोनों ने सेलिंग में कदम भी साथ ही रखा था। उस समय वे सातवीं कक्षा में पढ़ते थे। नेशनल सेलिंग स्कूल के कोच पी. मधु की नजर दोनों की प्रतिभा पर पड़ी। उन्होंने दोनों युवाओं को इस खेल को गंभीरता से लेने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके बाद दोनों ने अगले दो साल भोपाल स्थित नेशनल सेलिंग स्कूल में ट्रेनिंग की और फिर अपने घर केरल लौट आए।
केरल लौटने के बाद दोनों ने मुजिरिस यॉटिंग क्लब में रिटायर्ड कर्नल नवनीत मित्तल और सुरेश पिल्लई के मार्गदर्शन में अपनी स्किल को निखारा। स्कूल की पढ़ाई खत्म होने के बाद भी सेलिंग के प्रति उनका जुनून कम नहीं हुआ। प्लस टू की पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों भारतीय सेना में शामिल हो गए। इसके बावजूद उन्होंने सेलिंग जारी रखी और खेल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखी।
2020 से दोनों को संदीप जैन कोचिंग दे रहे हैं। इसके बाद उनकी तैयारियां मुंबई स्थित आर्मी यॉटिंग नोड में और मजबूत हुईं, जहां दोनों ने बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के लिए गहन ट्रेनिंग की। मनु और प्रिंस की प्रतिस्पर्धी यात्रा 2010 में सिल्वर जुबली नेशनल लेजर रेगाटा से शुरू हुई थी। इसके बाद दोनों ने धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कदम रखा और स्किफ वर्ग में एक मजबूत और नियमित जोड़ी के रूप में अपनी पहचान बनाई दोनों ने 2022 में अबू धाबी में हुई एशियन सेलिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता। इसके एक साल बाद थाईलैंड में भी उन्होंने कांस्य पदक अपने नाम किया। अब एशियन गेम्स में पदार्पण करते हुए दोनों ने भारत के लिए स्किफ में सिल्वर मेडल जीत लिया है। उनकी कोशिश सिर्फ पदक जीतने तक सीमित नहीं थी, बल्कि भारत में सेलिंग को फिर से पहचान दिलाने की भी थी। चेराई बीच की जुगाड़ वाली नाव से शुरू हुआ उनका सफर अब एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंच चुका है।


