Asian Games: चोट ने रोकी तैयारी, हौसला नहीं; घुटने की चोट के बावजूद पिंकी ने जीता कांस्य

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नई दिल्ली : एशियन गेम्स में सोमवार को कांस्य पदक जीतकर भारत की सबसे सफल कुराश खिलाड़ियों में शामिल होने वाली पिंकी बलहारा सेमीफाइनल मुकाबले के बाद भावुक हो गईं और फूट-फूटकर रोने लगीं। उनकी आंखों में आए आंसू पदक जीतने की खुशी से ज्यादा चोट के कारण अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर पाने की निराशा के थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पिंकी ने बताया कि दक्षिण कोरिया की लिम गारम के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मुकाबले के दौरान उनके दाएं घुटने में चोट लग गई थी। इसके बाद सेमीफाइनल में एक अन्य कोरियाई खिलाड़ी सुमिन मो के खिलाफ मुकाबले में चोटिल घुटना उनके लिए परेशानी का कारण बना रहा। दर्द और चोट के बावजूद पिंकी ने मुकाबला जारी रखा, लेकिन वह अपनी पूरी क्षमता के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर सकीं।

क्वार्टर फाइनल में लगी चोट, सेमीफाइनल में दर्द से जूझीं पिंकी

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पिंकी ने कहा, क्वार्टर फाइनल मुकाबले में मुझे चोट लग गई थी। मेरे घुटने पर चोट लगी। क्वार्टर फाइनल में मेरी प्रतिद्वंद्वी भी कोरियाई थी। इसलिए सेमीफाइनल की मेरी प्रतिद्वंद्वी को पता था कि मेरे दाएं घुटने में चोट लगी है। मैं आक्रमण कर रही थी, लेकिन वह बार-बार मेरे घुटने पर हमला कर रही थी। इसलिए मैं पेनल्टी के कारण हार गई।

कुराश क्या है और कैसे खेला जाता है? समझिए पूरा खेल

कुराश उज्बेकिस्तान की पारंपरिक कुश्ती और मार्शल आर्ट शैली है, जिसमें खिलाड़ियों को मुक्का मारने, लात चलाने या प्रतिद्वंद्वी के पैर पकड़ने की अनुमति नहीं होती। मुकाबले खड़े होकर होते हैं और अंक हासिल करने के लिए खिलाड़ी को प्रतिद्वंद्वी को पूरी ताकत और नियंत्रण के साथ पीठ के बल गिराना होता है। दिल्ली की रहने वाली पिंकी ने 2018 एशियाई खेलों में 52 किग्रा भार वर्ग में रजत पदक जीता था, लेकिन इस बार वह 78 किग्रा भार वर्ग में उतरीं। हांगझोउ एशियाई खेलों 2023 में उनका अभियान क्वार्टर फाइनल से आगे नहीं बढ़ सका था।

भारत में कुराश के लिए मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय महासंघ का अभाव

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पिंकी बलहारा के प्रशिक्षण का बड़ा हिस्सा लड़कों के साथ मुकाबला करते हुए बीता है। उनका मानना है कि लड़कों के साथ लगातार अभ्यास और मुकाबले ने उन्हें अपनी खेल क्षमता बेहतर करने में मदद की और इसी वजह से वह भारत की सफल कुराश खिलाड़ियों में अपनी पहचान बना सकीं। भारत में कुराश का कोई मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय महासंघ नहीं है। इससे जुड़े पक्षों के बीच लगातार मतभेद के कारण खिलाड़ियों को प्रशिक्षण और अन्य सुविधाओं के लिए निजी सहयोग पर निर्भर रहना पड़ता है। पिंकी को भी दिल्ली स्थित अपने मामा की अकादमी से प्रशिक्षण और जरूरी सहयोग मिलता है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 2018 एशियाई खेलों से पहले अपने पिता को खो चुकीं पिंकी बलहारा ने बताया कि भारत में एक नियम के तहत खिलाड़ी केवल एक ही मार्शल आर्ट खेल में हिस्सा ले सकता है, इसलिए उन्होंने कुराश को चुना। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, “मैं कुराश में रैंकिंग वाली खिलाड़ी हूं।” पिंकी ने भारतीय कुराश व्यवस्था को लेकर अपनी नाराजगी भी जाहिर की। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि हर एशियाई खेल से पहले एक नया महासंघ सामने आ जाता है, लेकिन खिलाड़ियों के हित में ठोस काम नहीं होता। अपने पिछले एशियाई खेलों के अनुभव को याद करते हुए पिंकी ने कहा कि जैसे ही एशियाई खेल नजदीक आते हैं, नया महासंघ बन जाता है, जिसका नुकसान खिलाड़ियों को उठाना पड़ता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि महासंघ तो बनते रहेंगे, लेकिन खिलाड़ियों के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। पिंकी ने बताया कि 2023 में उन्हें गुमराह किया गया था और इसी वजह से उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया था।

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