नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट को आक्रामक बनाने का श्रेय पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को दिया जाता है। गांगुली की कप्तानी में खेल चुके हरभजन सिंह, युवराज सिंह, वीवीएस लक्ष्मण, अनिल कुंबले के साथ ही पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर भी मानते हैं कि भारतीय क्रिकेट का चेहरा बदलने में उनका अहम योगदान है।
साल 2000 से 2005 तक सौरव गांगुली की आक्रामकता की पूरी दुनिया में चर्चा होती थी। गांगुली ने भारतीय टीम को घर पर ही नहीं बल्कि विदेश में भी जीत दिलाई। साल 2002 में इंग्लैंड के खिलाफ नेटवेस्ट ट्रॉफी के फाइनल में मिली जीत के बाद गांगुली ने लॉर्ड्स की बालकोनी पर टीशर्ट लहराया था। इस मैच में इंग्लैंड की कप्तानी करने वाले नासिर हुसैन ने भी माना की भारतीय टीम गांगुली की कप्तानी में ही आक्रामक बनीं।
स्काई स्पोर्ट्स पोस्टकार्ट पर हुसैन ने कहा, “गांगुली ने भारतीय क्रिकेट को बदल दिया। उनके पहले भारतीय टीम बहुत ही विनम्र और सौम्य होती थी। उन्होंने भारतीय टीम को शक्तिशाली बनाया और जोश भर दिया।”
पूर्व इंग्लिश कप्तान ने बताया कि कैसे गांगुली ने मुंबई में उनकी टीम की जीत का बदला लंदन में लिया। “फ्रेडी (एंड्यू फ्लिंटफ) ने सीरीज के अंत में बहुत ही शानदार गेंदबाजी की थी। तपती गर्मी में उन्होंने अंतिम विकेट हासिल किया और फिर अपने तरीके से इसका जश्न मनाते हुए टी-शर्ट को हवा में लहराया। उनका ऐसा टी शर्ट लहराना गांगुली के जहन में रह गया था।”
नेटवेस्ट फाइनल की बात करते हुए हुसैन ने कहा, “उन दिनों में (325 रन) वह स्कोर वाकई काफी बड़ा हुआ करता था। हम जानते थे यह एक पाटा पिच है और उके पास पांच बहुत ही शानदार खिलाड़ी हैं। हमने लगातार विकटें निकाली थी 146 रन पर पांच विकेट गिर गए थे।”
“आप अगर अभी भी मेरे से पूछे कि इस बारे में क्या सोच रहा हूं तो लगा था कि भारत को हमने जकड लिया है 146 पर 5 विकेट और 326 रन का लक्ष्य हमने गांगुली, सहवाग, द्रविड़ और तेंदुलकर को आउट कर लिया था। आपको ऐसा लगता होगा लेकिन मैं इससे अलग सोच रहा था। गांगुली ने खुद स्वीकार किया कि वो मान चुके थे मैच उनके हाथ से निकल गया। वो दो जवाब लड़के आए, युवराज सिंह और मोहम्मद कैफ जिन्होंने इससे पहले इतना कुछ नहीं किया था। यह सबसे शानदार पारी थी जो उन्होंने खेली। वह इसके लिए हमेशा ही याद किए जाएंगे।”

