रायपुर। छत्तीसगढ़ में खेलों के समग्र विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल के तहत 28 जुलाई को राजधानी रायपुर में राज्य का पहला स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव आयोजित किया जाएगा। इस एकदिवसीय कॉन्क्लेव का शुभारंभ सुबह 11 बजे प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव करेंगे।
कार्यक्रम के शाम के सत्र में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी शामिल होंगे। इस अवसर पर वे इस वर्ष आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में छत्तीसगढ़ के लिए पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान कर सम्मानित करेंगे।
कॉन्क्लेव में दिनभर आयोजित होने वाले सात विषयगत सत्रों में खेल प्रशासन, प्रतिभा पहचान, खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, क्षमता विकास, स्पोर्ट्स साइंस, खेल अधोसंरचना, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप, खेल महासंघों की भूमिका तथा राज्य की भावी खेल नीति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत मंथन किया जाएगा। समापन सत्र में सभी चर्चाओं के निष्कर्ष साझा किए जाएंगे, जिन्हें राज्य में खेलों और खिलाड़ियों के विकास की भावी कार्ययोजना में शामिल किया जाएगा।
उद्घाटन सत्र में ‘लीडरशिप, खेल प्रोत्साहन एवं प्रतिभा पहचान’ विषय पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव अपने विचार रखेंगे। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी संजू देवी, अंतरराष्ट्रीय फुटबॉलर किरण पिस्दा, तैराक अनुष्का भगत तथा एथलीट लकी मरकाम भी मंच साझा करेंगे।
इन विषयों पर होगा मंथन
कॉन्क्लेव में खेल प्रशासक, खेल वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और देश के नामचीन खिलाड़ी Vision 2036: भारत के अगले ओलंपिक चैंपियनों की तैयारी, खेलों के विकास के संभावित मार्ग, खेल महासंघों एवं संघों की भूमिका, स्पोर्ट्स साइंस, खेल अधोसंरचना एवं अकादमियों में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP), खेलो इंडिया मिशन, तथा छत्तीसगढ़ की पदक रणनीति एवं राज्य खेल नीति जैसे विषयों पर अपने विचार साझा करेंगे।
ये होंगे मुख्य वक्ता
कॉन्क्लेव के विभिन्न सत्रों में ओलंपियन जिन्सन जॉनसन, प्रख्यात खेल वैज्ञानिक डॉ. रत्नेश सिंह, छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के महासचिव डॉ. विक्रम सिंह सिसोदिया, हाई परफॉर्मेंस एनालिस्ट रोनक कोठारी, पीईएफआई के राष्ट्रीय सचिव डॉ. पियूष जैन तथा खेलो इंडिया के उप महानिदेशक मयंक श्रीवास्तव मुख्य वक्ता के रूप में अपने अनुभव और सुझाव साझा करेंगे।
राज्य का पहला स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव छत्तीसगढ़ में खेल संस्कृति को नई दिशा देने, खिलाड़ियों के लिए विश्वस्तरीय अवसर उपलब्ध कराने तथा भविष्य की खेल नीति को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होने की उम्मीद है।


