CWG 2026: नीरज ने जीता रजत, यशवीर ने चार एथलीटों को पछाड़ कांस्य पर साधा निशाना

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नई दिल्ली : भारतीय भालाफेंक सुपरस्टार नीरज चोपड़ा चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर सके और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। वहीं, यशवीर सिंह ने शानदार जुझारूपन दिखाते हुए शुक्रवार (31 जुलाई) को राष्ट्रमंडल खेलों में अपने आखिरी प्रयास में सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया और कांस्य पदक अपने नाम कर लिया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यशवीर ने अंतिम प्रयास में बाजी पलटते हुए चार एथलीटों को पीछे छोड़कर पोडियम पर जगह बनाई। टोक्यो ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता 28 वर्षीय नीरज चोपड़ा ने दूसरे प्रयास में इस सत्र का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 85.83 मीटर का थ्रो फेंका। यह दूरी उन्हें रजत पदक दिलाने के लिए पर्याप्त रही। इससे पहले नीरज 19 जून को दोहा डायमंड लीग में 85.69 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ चौथे स्थान पर रहे थे।

यशवीर ने रचा रोमांच, सातवें स्थान से सीधे ब्रॉन्ज पर कब्जा

राष्ट्रमंडल खेलों में पहली बार उतरे 24 बरस के यशवीर ने छठे और आखिरी प्रयास में 85.41 मीटर थ्रो फेंककर सभी को चौंका दिया। इससे पहले उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 83.72 मीटर था। वह पांचवें दौर के बाद 81.33 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास से सातवें स्थान पर थे, लेकिन आखिरी प्रयास जबर्दस्त रहा। आखिरी राउंड शुरू होने से पहले यशवीर छठे पर थे। वर्ल्ड चैंपियन केशोर्न वालकॉट ने 82.55 मीटर का थ्रो किया और भारतीय एथलीट सातवें पर पहुंच गया।

रूमेश थरंगा पथिरागे ने जीता स्वर्ण पदक

श्रीलंका के स्टार रूमेश थरंगा पथिरागे ने अपेक्षा के अनुरूप 89.75 मीटर फेंककर स्वर्ण पदक जीता। बेहद सर्दी और तेज हवाओं के प्रदर्शन उनका यह प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंन जून में रोम डायमंड लीग में 92.62 मीटर का थ्रो फेंका था।

तीन राउंड के बाद बाहर हुए अरशद नदीम

भारत के रोहित यादव 81.56 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ सातवें स्थान पर रहे। एक समय वह तीसरे स्थान पर पहुंच गए थे, लेकिन इसके बाद अपने प्रदर्शन में सुधार नहीं कर सके और पदक की दौड़ से बाहर हो गए। पाकिस्तान के गत चैंपियन और मौजूदा ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता अरशद नदीम भी उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके। उनका सर्वश्रेष्ठ थ्रो 77.41 मीटर रहा, जिसके कारण वह तीन दौर के बाद ही प्रतियोगिता से बाहर हो गए। वहीं, मौजूदा विश्व चैंपियन त्रिनिदाद एवं टोबैगो के केशोर्न वालकॉट भी प्रभाव नहीं छोड़ सके और छठे स्थान पर रहे।

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