नई दिल्ली : श्रीलंका के भालाफेंक खिलाड़ी रुमेश पथिरगे थरंगा ने 89.75 मीटर का शानदार थ्रो कर कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का स्वर्ण पदक अपने नाम किया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने दो बार के ओलंपिक पदक विजेता और पूर्व विश्व चैंपियन नीरज चोपड़ा को पीछे छोड़ते हुए बड़ा उलटफेर किया। रुमेश ने मौजूदा विश्व चैंपियन केशोर्न वालकॉट, मौजूदा ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम और पूर्व विश्व चैंपियन एंडरसन पीटर्स जैसे दिग्गज खिलाड़ियों को भी पछाड़ दिया। तेज हवा के कारण प्रतियोगिता की परिस्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण थीं, लेकिन रुमेश ने दबाव में बेहतरीन प्रदर्शन कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
रुमेश पथिरगे ने प्रतियोगिता में सिर्फ एक वैध थ्रो किया, लेकिन वही 89.75 मीटर का प्रयास उन्हें स्वर्ण पदक दिलाने के लिए काफी साबित हुआ। भारत के नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ रजत पदक जीता, जबकि एक अन्य भारतीय यशवीर सिंह ने 85.41 मीटर के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया। हालांकि, पथिरगे की जीत को बड़ा उलटफेर नहीं माना जा सकता। वह विश्व के शीर्ष भालाफेंक खिलाड़ियों में शामिल हैं और 92.62 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो कर चुके हैं, जो उनकी क्षमता और निरंतरता को दर्शाता है।
पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय पदक, पथिरगे ने रचा इतिहास
पथिरगे ने जिस भी कॉम्पिटिशन में हिस्सा लिया है उनमें से ज्यादातर जीते हैं। रोम डायमंड लीग में वह 2026 सीजन में 90मीटर का आंकड़ा पार करने वाले पहले जैवलिन थ्रोअर बने। 23 साल के इस खिलाड़ी ने गुरुवार रात रोम डायमंड लीग में 92.62 मीटर फेंककर नया मीट रिकॉर्ड, श्रीलंका के लिए नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया और वैश्विक बढ़त बनाई। यह पथिरगे के करियर का पहला बड़ा पदक है।
तेज गेंदबाज से जैवलिन स्टार बने रुमेश पथिरगे
मीडियम पेसर से विश्वस्तरीय भालाफेंक खिलाड़ी बने रुमेश पथिरगे अपने कोच टोनी प्रसन्ना से प्रशिक्षण लेते हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रुमेश ने कहा, “कोच टोनी ने ही मुझे जैवलिन थ्रो के बारे में बताया। वह हमेशा कहते थे कि अगर मैं खेल की बुनियादी तकनीकों में महारत हासिल कर लूं और उन्हें सही तरीके से अपनाऊं, तो उसका फायदा जरूर मिलेगा। वह मेरे लिए सिर्फ कोच नहीं हैं, बल्कि एक मार्गदर्शक हैं। उन्होंने मुझे केवल खेल ही नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका भी सिखाया है।”
निरंतरता ही रुमेश की सबसे बड़ी पहचान
किशोरावस्था में रुमेश पथिरगे करीब 130 किमी/घंटा की रफ्तार से गेंदबाजी करते थे और अंडर-18 स्तर पर उन्होंने 134 किमी/घंटा की गति भी हासिल की थी। वह इस मामले में श्रीलंका और सनराइजर्स हैदराबाद के तेज गेंदबाज ईशान मलिंगा के बाद दूसरे स्थान पर थे। हालांकि बाद में उन्होंने क्रिकेट छोड़कर भालाफेंक को अपना करियर बनाया। पूरे करियर में निरंतरता उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है। रुमेश लगातार 82 मीटर से अधिक दूरी तक भाला फेंकते रहे हैं। अकेले 2025 सीजन में उन्होंने 13 बार 82 मीटर का आंकड़ा पार कर अपनी स्थिरता और उच्च स्तर की क्षमता का शानदार परिचय दिया।


