नई दिल्ली: फीफा विश्व कप में न्यूजीलैंड के साथ 2-2 से ड्रॉ के बाद ईरान की टीम को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मीडिया रिपोट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने टीम को तुरंत लॉस एंजिलिस छोड़ने के निर्देश दिए हैं, जिससे टूर्नामेंट में सनसनी फैल गई है। इस फैसले के बाद ईरान के मुख्य कोच आमिर घालेनोई ने नाराज़गी जताते हुए अपनी टीम को “सबसे पीड़ित टीम” बताया और फीफा की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मीडिया रिपोट के अनुसार यह घटना अब विश्व फुटबॉल में बड़े विवाद का कारण बन गई है।
मीडिया रिपोट के अनुसार, ईरान के कप्तान मेहदी तारेमी, मिडफील्डर मोहम्मद मोहबी और कोच आमिर घालेनोई ने कहा कि लगातार सामने आ रही लॉजिस्टिक समस्याओं ने टीम की तैयारियों को प्रभावित किया है। मीडिया रिपोट के अनुसार, कोच के अनुसार, सोमवार रात खेले गए मैच के तुरंत बाद टीम को अमेरिका में रुकने के बजाय मेक्सिको के तिजुआना स्थित अपने ट्रेनिंग बेस लौटने का निर्देश दिया गया। घालेनोई ने कहा कि आज मैच के बाद हमें कहा गया कि आपको तुरंत यहां से जाना होगा। जबकि हमारे लिए रिकवरी करना बेहद जरूरी था।
कोच ने इस फैसले पर सवाउठाते हुए कहा कि टूर्नामेंट की शुरुआत से ही टीम को कई बाधाओं का सामना करना पड़ा है। उन्होंने बताया कि टीम की योजना मैच से दो दिन पहले लॉस एंजिलिस पहुंचने और मुकाबले के बाद एक रात वहीं रुकने की थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। मीडिया रिपोट के अनुसार, घालेनोई ने कहा, ‘मुझे लगता है कि हमारी टीम पूरे विश्व कप की सबसे पीड़ित टीम है। हमारा महासंघ यहां नहीं है, हमारा मीडिया यहां नहीं है और हमारा प्रबंधन भी यहां मौजूद नहीं है।’
ईरान की तैयारियां वीजा और यात्रा संबंधी समस्याओं से प्रभावित रहीं। टीम को एरिजोना के टक्सन में ट्रेनिंग बेस बनाने की योजना छोड़नी पड़ी और अमेरिकी आव्रजन प्रक्रियाओं को लेकर चिंताओं के कारण तिजुआना में कैंप लगाना पड़ा। बाद में ये चिंताएं सही साबित हुईं, जब ईरान के सपोर्ट स्टाफ के कई सदस्यों को अमेरिका में प्रवेश के लिए वीजा नहीं मिला। इसके चलते मीडिया अधिकारियों, विश्लेषकों और फुटबॉल महासंघ के अध्यक्ष मेहदी ताज समेत कई महत्वपूर्ण सदस्य टीम के साथ लॉस एंजिलिस नहीं पहुंच सके।
मीडिया रिपोट के अनुसार, मेहदी तारेमी ने कहा कि लगातार यात्रा और अनिश्चितता का असर टीम की तैयारियों पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि तिजुआना से लॉस एंजिलिस का सफर, जो सामान्य रूप से कुछ घंटों में पूरा हो सकता था, आव्रजन प्रक्रियाओं से जुड़ी देरी के कारण करीब पांच घंटे तक चला।


