नई दिल्ली : रोहित शर्मा भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल और लोकप्रिय खिलाड़ियों में शुमार हैं। उन्होंने अपनी मेहनत, प्रतिभा और निरंतर प्रदर्शन के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। मैदान पर अपने आक्रामक अंदाज से रोहित ने वर्षों तक भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों का भरपूर मनोरंजन किया है और आज भी उनका जलवा कायम है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने 2007 में भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की शुरुआत की थी और करीब दो दशक बाद भी टीम इंडिया का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इस लंबे सफर में कई बार उनकी भूमिका बदली, लेकिन उनके प्रदर्शन और निरंतरता में कमी नहीं आई। यही वजह है कि रोहित आज भी अपने शानदार खेल और करिश्माई अंदाज से करोड़ों क्रिकेट प्रशंसकों के दिलों पर राज करते हैं।
रोहित शर्मा ने भारतीय टीम की कप्तानी की और भारत को टी20 वर्ल्ड कप चैंपियन बनाया साथ ही साथ उन्होंने टीम इंडिया को चैंपियंस ट्रॉफी खिताब भी दिलाया। रोहित की कप्तानी में भारतीय टीम ने वनडे वर्ल्ड कप 2023 के फाइनल में भी जगह बनाई थी, लेकिन टीम चैंपियन नहीं बन पाई। रोहित ने जब अपने इंटरनेशनल क्रिकेट करियर का शुरुआत की थी तब वो निचले क्रम पर खेलते थे, लेकिन जब से वो ओपनर बने उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और आज वो अपने करियर के शिखर पर मौजूद हैं। रोहित का सफर करिश्माई रहा है, लेकिन उन्होंने भी ये मुकाम हासिल करने के लिए काफी संघर्ष किया।
आर्थिक तंगी के बीच चाचा बने रोहित के सहारा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रोहित का जन्म एक साधारण परिवार में महाराष्ट्र के नागपुर के बांसोद में हुआ था। रोहित के पिता गुरुनाथ शर्मा एक ट्रांसपोर्ट फर्म के गोदाम की देखभाल करने वाले यानी केयरटेकर के तौर पर काम करते थे। पिता की आय इतनी कम थी कि उनकी परवरिश उनके दादा-दादी और चाचाओं ने बोरीवली में की। रोहित के माता-पिता डोंबिवली में एक कमरे के मकान में रहते थे और वो उनके मिलने सप्ताह के अंत में ही जाते थे। रोहित को क्रिकेट में रुचि थी और साल 1999 में वो अपने चाचा के पैसों से क्रिकेट कैंप ज्वाइन किया था। कैंप में उनकी मुलाकात कोट दिनेश लाड से हुई और यहीं से उनकी जर्नी की शुरुआत हुई।
209 की ऐतिहासिक पारी के बाद पड़ा ‘हिटमैन’ नाम
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रोहित शर्मा ने साल 2007 में भारत के लिए खेलना शुरु किया था, लेकिन उन्हें वो मुकाम हासिल नहीं हो रहा था जिसके वो हकदार थे। हालांकि बाद में एमएस धोनी ने उनसे ओपन करवाना शुरू किया और इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। रोहित ने 2 नवंबर 2013 में बेंगलुरु में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने वनडे करियर का पहला दोहरा शतक लगाया था और 209 रन की पारी खेली थी। रोहित की इस पारी से प्रभावित होकर टीवी क्रू के एक सदस्य ने उन्हें पहली बार हिटमैन नाम से पुकारा और इसे रवि शास्त्री ने सुन गिया और रवि ने उन्हें प्रजेंटेशन के दौरान हिटमैन कहा और इसके बाद उनका नाम हिटमैन पड़ गया।
इंटरनेशनल क्रिकेट में रोहित शर्मा का सफर
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रोहित शर्मा अब भारतीय टीम के लिए टेस्ट और टी20 प्रारूप में नहीं खेल रहे हैं और उनकी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सक्रिय भूमिका फिलहाल वनडे तक सीमित है। उनके इंटरनेशनल करियर की बात करें तो उन्होंने अब तक 514 मैचों की 547 पारियों में 20,427 रन बनाए हैं। इस दौरान उनके बल्ले से 51 शतक और 112 अर्धशतक निकले हैं, जबकि उनका बल्लेबाजी औसत 42.46 रहा है। रोहित का सर्वश्रेष्ठ स्कोर 264 रन है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अब तक 1,982 चौके और 662 छक्के लगाए हैं तथा 23,325 गेंदों का सामना किया है।


