नई दिल्ली : चाहे कॉमनवेल्थ गेम्स हो, ओलंपिक, एशियन गेम्स या फिर प्रतिष्ठित डायमंड लीग, जैवलिन थ्रो अब उन खेलों में शामिल हो चुका है जहां भारत की पदक उम्मीदें सबसे ज्यादा रहती हैं। इस भरोसे के पीछे सबसे बड़ा नाम नीरज चोपड़ा का है। 28 वर्षीय भारतीय स्टार ने 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी पहचान बनाई थी। इसके बाद उन्होंने लगातार शानदार प्रदर्शन किया और शायद ही कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय मंच ऐसा रहा हो, जहां नीरज ने पोडियम पर जगह नहीं बनाई हो। उनकी उपलब्धियों ने न सिर्फ भारत को जैवलिन में नई पहचान दी, बल्कि इस खेल को देश में लोकप्रिय भी बनाया है।
भारतीय सेना में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल की उपाधि से सम्मानित नीरज चोपड़ा ने भारतीय जैवलिन थ्रो का इतिहास पूरी तरह बदल दिया है। उनसे पहले कोई भी भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक नहीं जीत सका था, लेकिन नीरज ने 2018 में दोनों प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल हासिल कर नया अध्याय लिखा।
इसके बाद 2021 टोक्यो ओलंपिक में नीरज ने आखिरी दिन शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह ओलंपिक एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने। साल 2022 में वह डायमंड लीग खिताब जीतने वाले पहले भारतीय बने, जबकि 2023 वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में जैवलिन थ्रो का स्वर्ण जीतकर वह इस प्रतियोगिता में गोल्ड हासिल करने वाले पहले एशियाई पुरुष खिलाड़ी बने। नीरज ने अपनी शानदार उपलब्धियों का सिलसिला जारी रखते हुए 2024 पेरिस ओलंपिक में रजत पदक जीतकर एक बार फिर देश का नाम रोशन किया।
नीरज की सफलता से बदली भारतीय जैवलिन की तस्वीर
नीरज चोपड़ा की इन उपलब्धियों ने भारत को जैवलिन थ्रो में नई ताकत बनाया है। उनकी सफलता के बाद जैवलिन थ्रो में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी आगे आए और देश का वैश्विक मंच पर नाम रोशन किया। इसका नतीजा है कि जैवलिन थ्रो में भारत को किसी भी टूर्नामेंट में एक से ज्यादा पदक की उम्मीद रहती है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 रहा। जैवलिन थ्रो के फाइनल में तीन भारतीयों नीरज चोपड़ा, यशवीर सिंह और रोहित यादव ने जगह बनाई थी। नीरज चोपड़ा ने रजत पदक और यशवीर सिंह ने कांस्य पदक जीता। रोहित यादव भी काफी देर तक तीसरे नंबर पर थे। मतलब आखिरी राउंड तक तक तीनों भारतीय पदक की दौड़ में थे।
नीरज की राह पर भारतीय जैवलिन के नए सितारे
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 पहला ऐसा टूर्नामेंट नहीं था, जिसमें भारत के एक से ज्यादा जैवलिन थ्रोअर पदक जीतने की होड़ में थे। 2023 में एशियन गेम्स में नीरज चोपड़ा के अलावा किशोर जेना मैदान में थे। नीरज चोपड़ा ने स्वर्ण पदक और किशोर जेना ने रजत पदक अपने नाम किया। किशोर जेना ने 2024 में ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। साल 2025 में दोहा डायमंड लीग में वह 8वें नंबर पर थे।
डोपिंग मामले में फंसे डीपी मनु, करियर पर लगा बड़ा सवाल
वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 में नीरज चोपड़ा के अलावा सचिन यादव ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। भारत पदक नहीं जीत पाया, लेकिन सचिन यादव ने नीरज चोपड़ा से बेहतर प्रदर्शन कर सुर्खियां बंटोरी थीं। वह चौथे नंबर पर रहे थे। डीपी मनु एक और नाम है। डीपी मनु ने जैवलिन थ्रो में अच्छा प्रदर्शन किया है। डीपी मनु ने 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स के अलावा 2023 में एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप और 2023 वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। हालांकि, डोपिंग में फंसने के कारण मनु फिलहाल खेल से दूर हैं। शिवपाल सिंह एक अन्य जैवलिन थ्रोअर हैं, जो डोपिंग में फंसे हैं। 2019 में उन्होंने साउथ एशियन गेम्स और एशियन चैंपियनशिप में रजत जीता था। शिवपाल सिंह ने 2020 ओलंपिक के लिए भी क्वालिफाई किया था।
अन्नू रानी ने भी दिखाया दम, महिला जैवलिन में भारत की मजबूत दावेदारी
महिला जैवलिन थ्रो में अन्नू रानी ने भी भारत का नाम लगातार ऊंचा किया है। उन्होंने 2022 एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा, जबकि इससे पहले 2014 एशियन गेम्स में कांस्य पदक अपने नाम किया था। इसके अलावा 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में भी अन्नू रानी ने कांस्य पदक हासिल किया। एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे बड़े बहु-खेल आयोजनों में अन्नू रानी अब तक एक स्वर्ण, दो रजत और तीन कांस्य समेत कुल छह पदक जीत चुकी हैं। उनके शानदार प्रदर्शन ने भारतीय महिला जैवलिन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है।


