नई दिल्ली : इतिहास रचने और विश्व क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाने तक सूर्यकुमार यादव का सफर बेहद तेज और घटनाओं से भरा रहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने भारत को लगातार दूसरा टी20 विश्व कप दिलाकर एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम की और कप्तान के रूप में अपनी क्षमता साबित की। हालांकि, इस ऐतिहासिक सफलता के महज तीन महीने बाद ही उनके करियर ने अप्रत्याशित मोड़ ले लिया। सूर्यकुमार न केवल भारतीय टीम की कप्तानी से हट गए, बल्कि उस टीम में अपनी जगह भी गंवा बैठे, जिसकी अगुआई करते हुए उन्होंने आईसीसी ट्रॉफी जीतकर देश को गौरवान्वित किया था। उनके करियर का यह दौर सफलता और चुनौतियों के बीच तेज उतार-चढ़ाव की कहानी को दर्शाता है।
ऐसे में सवाल उठता है कि भारतीय क्रिकेट अपने चौथे विश्व कप विजेता पुरुष कप्तान को किस रूप में याद रखेगा? भारत के विश्व कप विजेता कप्तानों कपिल देव, एमएस धोनी और रोहित शर्मा की कतार में सूर्यकुमार शायद सबसे कम करिश्माई नजर आते हैं। सूर्यकुमार यादव के व्यक्तित्व में वह गंभीरता और प्रभाव नहीं दिखता जो इन दिग्गजों से जुड़ा रहा है। सूर्यकुमार यादव हालांकि, बतौर बल्लेबाज बिल्कुल अलग हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने ने टी20 क्रिकेट में ऐसे शॉट खेले और मैदान के ऐसे हिस्सों में रन बनाए, जिनकी कल्पना भी बहुत कम बल्लेबाज कर पाते हैं। कुछ रिकॉर्ड ऐसे होते हैं जिन्हें कोई दोहराना नहीं चाहेगा।
पिछले साल एशिया कप के दौरान उन्होंने टॉस पर विरोधी कप्तान से हाथ नहीं मिलाया। मैच के बाद औपचारिक अभिवादन से भी दूरी बनाए रखी और पुरस्कार वितरण समारोह में ट्रॉफी लेने से इनकार कर पूरे कार्यक्रम को विवादों में ला दिया। पाकिस्तान के खिलाफ उस मुकाबले में सूर्यकुमार का व्यवहार उन्हें एक अलग तरह का कप्तान बनाता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने खेल और राजनीति को खुलकर एक-दूसरे से जोड़ने का काम किया। उनके नेतृत्व में भारतीय टीम में वह संतुलन, गरिमा और परिपक्वता नजर नहीं आई, जिसकी अपेक्षा मुश्किल परिस्थितियों में खिलाड़ियों से की जाती है।
उस समय एशिया कप ऐसे माहौल में खेला गया था जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बना हुआ था और हालिया घटनाएं दोनों देशों के लोगों के मन में ताजा थीं। हालांकि, यह पहली बार नहीं था। अतीत में भी दोनों देशों के क्रिकेटर युद्ध और तनाव के बीच एक-दूसरे के खिलाफ खेले हैं, लेकिन खिलाड़ियों ने कभी राजनीतिक मतभेदों को मैदान पर अपने व्यवहार पर हावी नहीं होने दिया।
क्रिकेट में अक्सर देखा जाता है कि मैच खत्म होने के बाद खिलाड़ी खेल भावना का परिचय देते हुए एक-दूसरे से हाथ मिलाते हैं, गले मिलते हैं और पुरस्कार समारोहों के दौरान भी आपसी सम्मान बनाए रखते हैं। 2017 चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल के बाद विराट कोहली, युवराज सिंह और शोएब मलिक की बातचीत का वीडियो इसका बेहतरीन उदाहरण माना जाता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उस दृश्य को देखकर यह अंदाजा लगाना मुश्किल था कि कौन सी टीम विजेता रही और कौन पराजित हुई। हालांकि, एशिया कप के दौरान माहौल कुछ अलग देखने को मिला। भारत की हार के बाद सूर्यकुमार यादव की कुछ टिप्पणियां चर्चा का विषय बन गईं। उन्होंने विपक्षी टीम को लेकर तीखे बयान दिए और भारत-पाकिस्तान क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता पर भी अपनी राय खुलकर रखी, जिसके बाद उनके बयान पर काफी बहस और प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार `एशिया कप के दौरान एक पाकिस्तानी पत्रकार ने सूर्यकुमार यादव से पूछा था, “क्या आपको लगता है कि इस बार पाकिस्तान ने बेहतर मुकाबला किया?” इस सवाल के जवाब में सूर्यकुमार ने अपनी स्पष्ट राय रखते हुए कहा कि भारत-पाकिस्तान मुकाबलों को लेकर प्रतिद्वंद्विता की चर्चा को अलग नजरिए से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी मुकाबले को वास्तविक प्रतिद्वंद्विता तब माना जाता है, जब दोनों टीमों के बीच जीत-हार का अंतर काफी कम हो, जैसे 7-7 या 8-7 का रिकॉर्ड। सूर्यकुमार का मानना था कि यदि किसी एक टीम का रिकॉर्ड दूसरी टीम के मुकाबले बहुत अधिक बेहतर हो, तो उसे पारंपरिक प्रतिद्वंद्विता कहना उचित नहीं होगा। उनके इस बयान ने क्रिकेट जगत में काफी चर्चा बटोरी और प्रशंसकों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार,उनके ये शब्द उन प्रशंसकों को निराश कर सकते थे जो भारत-पाकिस्तान मुकाबलों की ऐतिहासिक प्रतिस्पर्धा का आनंद लेते हैं। खेल में जिम्मेदार कप्तान आमतौर पर ऐसे व्यापक और अंतिम फैसले सुनाने से बचते हैं। यह काम अक्सर उत्साही प्रशंसकों का माना जाता है, कप्तानों का नहीं। दिलचस्प यह है कि सूर्यकुमार कभी ऐसे खिलाड़ी नहीं माने गए जो विवादित या कटु बयान दें। उनके साथ खेलने वाले साथी और उन्हें बचपन से कवर करने वाले पत्रकार उन्हें एक मिलनसार इंसान बताते हैं। बॉलीवुड की हल्की-फुल्की कॉमेडी फिल्मों के शौकीन सूर्यकुमार यादव अक्सर मजाकिया जवाबों के लिए जाने जाते रहे हैं, तीखी टिप्पणियों के लिए नहीं।
सूर्यकुमार यादव ने पेश की अनोखी बल्लेबाजी शैली, दुनिया भर में हुई चर्चा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यही सूर्यकुमार 2022 टी20 विश्व कप के दौरान दुनिया के सामने एक नई बल्लेबाजी शैली लेकर आए थे। क्रिकेट जगत ने शायद ही पहले कभी ऐसा बल्लेबाज देखा था, जो 145 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली गेंद को एक घुटने पर बैठ स्क्वायर लेग के ऊपर छक्के के लिए भेज दे। उनके पास रैंप शॉट था, रिवर्स रैंप था और विकेटकीपर के सिर के ऊपर से गेंद को स्टैंड में पहुंचाने की अद्भुत कला भी। उनकी बैटिंग रोमांच से भरी होती थी।
मुंबई के मैदानों पर सख्त प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में पले-बढ़े सूर्यकुमार मूल रूप से पारंपरिक बल्लेबाज थे, लेकिन टी20 युग में उन्होंने अपने खेल को बदला और रन बनाने के नए-नए तरीके खोजे। अपने सर्वश्रेष्ठ दौर में वह किसी गंभीर कला फिल्म की तरह नहीं, बल्कि ऐसी मनोरंजक फिल्म की तरह थे जिसे देखने के लिए दर्शक सिनेमाघरों में उमड़ पड़ते हैं।
सूर्या की अनोखी बल्लेबाजी में दिखती थी गली क्रिकेट की झलक
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सूर्यकुमार यादव की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण उनकी अनोखी बल्लेबाजी शैली थी, जो प्रशंसकों को गली क्रिकेट के दिनों की याद दिलाती थी। वह ऐसे रचनात्मक और साहसी शॉट खेलते थे, जिन्हें अधिकांश क्रिकेट प्रेमी खेलने की कल्पना तो करते हैं, लेकिन मैदान पर उतार नहीं पाते। उनकी इसी निडर और मनोरंजक बल्लेबाजी ने उन्हें दुनिया भर में खास पहचान दिलाई। लगातार शानदार प्रदर्शनों के दम पर सूर्यकुमार कप्तानी की दौड़ में शामिल हुए और उन्हें नेतृत्व का अवसर भी मिला। उनके लिए परिस्थितियां भी अनुकूल रहीं, क्योंकि उन्हें ऐसी भारतीय टीम की कमान मिली जो पहले से संतुलित थी और अपनी सफल रणनीति विकसित कर चुकी थी। कप्तान रोहित शर्मा द्वारा तैयार किया गया आक्रामक बल्लेबाजी मॉडल टीम के खिलाड़ियों के लिए बेहद प्रभावी साबित हुआ, जिसका लाभ सूर्यकुमार को भी कप्तान के रूप में मिला।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार टीम का सिद्धांत साफ था- विकेट गिरने पर भी आक्रमण जारी रखना है। गेंदबाजी में जसप्रीत बुमराह और वरुण चक्रवर्ती जैसे मैच विजेता खिलाड़ी मौजूद थे। सूर्यकुमार यादव को इस चैंपियन टीम को संभालने और सही दिशा देने का श्रेय जरूर मिलना चाहिए, लेकिन विश्व कप जीतने में इस मजबूत ढांचे की भी बड़ी भूमिका रही। अहमदाबाद की उस यादगार रात को सूर्यकुमार को लगा होगा कि उनकी खराब फॉर्म की लंबी चर्चा अब हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। जीत के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने भविष्य के सपनों की बात की। उन्होंने 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने और उसके बाद एक और टी20 विश्व कप जीतने की उम्मीद जताई।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विश्व कप जीत के बाद दिए गए एक इंटरव्यू में सूर्यकुमार यादव ने कहा था, “विश्व कप जीतने के बाद मेरी जिंदगी फिर बदल जाएगी।” उनकी यह बात सच भी साबित हुई, लेकिन शायद उस रूप में नहीं जैसी उन्होंने कल्पना की थी। खिताबी सफलता के बाद उनके करियर ने कई अप्रत्याशित मोड़ देखे और परिस्थितियां तेजी से बदल गईं। भारतीय क्रिकेट में लंबे समय से एक धारणा रही है कि किसी बल्लेबाज की पहचान और स्थान उसके प्रदर्शन से तय होता है। जब रन लगातार आते हैं तो प्रशंसा और अवसर मिलते हैं, लेकिन प्रदर्शन में गिरावट आते ही चुनौतियां बढ़ जाती हैं। सूर्यकुमार यादव के सफर ने भी यह दिखाया कि क्रिकेट में सफलता को बनाए रखना उतना ही कठिन है जितना उसे हासिल करना।


