46वीं राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता में रिकर्व टीम ने जीता कांस्य पदक, कैलाश मुरारका ने खिलाड़ियों का किया सम्मान
रायपुर। छत्तीसगढ़ के खेल इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। जयपुर में आयोजित 46वीं राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता में प्रदेश की रिकर्व टीम ने कांस्य पदक जीतकर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय स्तर पर रिकर्व वर्ग में प्रदेश को पहली बार मिली इस सफलता ने छत्तीसगढ़ तीरंदाजी संघ के करीब 25 वर्षों के लंबे इंतजार को समाप्त कर दिया है।
ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने के बाद जयपुर से भगत की कोठी एक्सप्रेस के जरिए लौटे खिलाड़ियों का रेलवे स्टेशन पर आत्मीय स्वागत किया गया। भारतीय तीरंदाजी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश आर्चरी एसोसिएशन के वरिष्ठ पदाधिकारी कैलाश मुरारका ने खिलाड़ियों को शॉल एवं पुष्पगुच्छ भेंटकर सम्मानित किया। उन्होंने खिलाड़ियों की उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनके संघर्ष, मेहनत और समर्पण की सराहना की।
कांस्य पदक जीतने वाली छत्तीसगढ़ की रिकर्व टीम में गीतेश यादव, श्रेयांश वर्मा, युवराज और अविनाश शामिल रहे। चारों खिलाड़ियों ने अपने शानदार प्रदर्शन से प्रदेश का मान बढ़ाया और राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की तीरंदाजी क्षमता को साबित किया।
लंबे संघर्ष के बाद मिली बड़ी कामयाबी
इस अवसर पर कैलाश मुरारका ने कहा कि छत्तीसगढ़ तीरंदाजी संघ पिछले लगभग 25 वर्षों से राष्ट्रीय स्तर पर इस तरह की सफलता की प्रतीक्षा कर रहा था। रिकर्व टीम का कांस्य पदक वर्षों की मेहनत, निरंतर प्रयास और खिलाड़ियों के मजबूत इरादों का परिणाम है। यह उपलब्धि प्रदेश में तीरंदाजी के विकास को नई दिशा देने के साथ ही युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
उन्होंने कहा कि यह सफलता भविष्य में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने की संभावनाओं को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण शुरुआत है। प्रदेश में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की भरमार है और यदि उन्हें बेहतर अवसर, आधुनिक उपकरण तथा उच्चस्तरीय प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए, तो वे देश और दुनिया में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं।
सीमित संसाधनों के बावजूद हासिल किया मुकाम
मुरारका ने खिलाड़ियों के जज्बे की सराहना करते हुए कहा कि संसाधनों की चुनौतियां भी उनके हौसले को कमजोर नहीं कर सकीं। कई खिलाड़ियों ने अपने निजी संसाधनों से आधुनिक उपकरणों की व्यवस्था की और कठिन परिश्रम के दम पर इस मुकाम तक पहुंचे।
उन्होंने जोर दिया कि छत्तीसगढ़ में तीरंदाजी को आगे बढ़ाने के लिए आधुनिक खेल उपकरणों, बेहतर प्रशिक्षण केंद्रों और अनुभवी प्रशिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है। इससे खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिलेगा और प्रदेश राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई उपलब्धियां हासिल कर सकेगा।
रिकर्व टीम की यह ऐतिहासिक सफलता छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभा और खिलाड़ियों के दृढ़ संकल्प का प्रमाण है। 25 वर्षों के इंतजार के बाद मिली इस उपलब्धि ने प्रदेश में तीरंदाजी के उज्ज्वल भविष्य की उम्मीदों को नई उड़ान दी है।


