भारत को मिला नया शतरंज स्टार! 3 साल 7 महीने के सर्वज्ञ बने दुनिया के सबसे कम उम्र के रैपिड-रेटेड खिलाड़ी

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नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के सागर शहर के रहने वाले सर्वज्ञ सिंह कुशवाहा ने अपनी अद्भुत प्रतिभा से दुनिया को चौंका दिया है। जहाँ आम तौर पर तीन साल के बच्चे खिलौनों में फर्क तक नहीं कर पाते, वहीं सरवज्ञ ने सिर्फ 3 साल 7 महीने 13 दिन की उम्र में इतिहास रच दिया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वे अब दुनिया के सबसे कम उम्र के फीडे रैपिड रेटेड खिलाड़ी बन गए हैं। FIDE की दिसंबर रेटिंग सूची में उन्हें 1572 की रैपिड रेटिंग मिली है, जो उनकी उम्र के हिसाब से एक असाधारण उपलब्धि मानी जा रही है। इससे पहले यह रिकॉर्ड अनिश सरकार के नाम था, जिन्होंने पिछले साल 3 साल 10 महीने की उम्र में रेटिंग हासिल की थी। लेकिन सर्वज्ञ ने उनसे भी कम उम्र में यह मील का पत्थर छूते हुए नया इतिहास लिख दिया।

स्क्रीन टाइम घटाने की पहल से शुरू हुआ सफर, अब बना विश्व रिकॉर्ड

सर्वज्ञ की शतरंज यात्रा सचमुच प्रेरणादायक है। उन्हें मोबाइल से दूर रखने के लिए माता-पिता ने खेल-खेल में शतरंज सिखाना शुरू किया, लेकिन देखते ही देखते उनकी दिलचस्पी इस खेल में बढ़ती चली गई। कुछ ही महीनों की नियमित प्रैक्टिस ने सर्वज्ञ को इतना निखार दिया कि उनके माता-पिता ने उन्हें विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा दिलाना शुरू कर दिया। शतरंज से शुरू हुई यह छोटी सी पहल अब एक बड़ी उपलब्धि में बदल चुकी है।

कम उम्र में बड़े खिलाड़ियों को हराने का कारनामा

सितंबर में आयोजित 24वें आरसीसी रैपिड रेटेड कप (मंगलूरू) में सर्वज्ञ ने पहली बार किसी प्रतियोगिता में भाग लिया और 1542 रेटिंग वाले खिलाड़ी को हराकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसके बाद अक्टूबर में खंडवा में हुई दूसरी रैपिड रेटिंग ओपन चैंपियनशिप में उन्होंने 1559 रेटिंग वाले खिलाड़ी को पराजित किया। नवंबर में उन्होंने छिंदवाड़ा और इंदौर की दो प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया, जहाँ अनुभवी खिलाड़ियों को मात देते हुए उन्होंने अपनी आधिकारिक फीडे रेटिंग सुनिश्चित की। उल्लेखनीय है कि रेटिंग हासिल करने के लिए किसी खिलाड़ी को कम से कम एक रेटेड प्रतिद्वंद्वी को हराना होता है, लेकिन सर्वज्ञ ने एक नहीं, बल्कि तीन रेटेड खिलाड़ियों को हराकर यह उपलब्धि प्राप्त की।

भारत की उभरती शतरंज शक्ति का नया चेहरा

सर्वज्ञ की यह उपलब्धि भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आज भारत के डी. गुकेश मौजूदा विश्व चैंपियन हैं और दिव्या देशमुख महिला विश्व कप विजेता बनी हुई हैं। ऐसे में सर्वज्ञ जैसे नन्हे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का उभरना यह संकेत देता है कि आने वाले समय में भी भारत शतरंज की दुनिया में अपना वर्चस्व कायम रखेगा। उनकी सफलता देश की बढ़ती चेस ताकत का मजबूत प्रमाण है।

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