500+ पदक, 190 स्वर्ण और 101 रजत के साथ भारत का कॉमनवेल्थ इतिहास

0

नई दिल्ली : स्कॉटलैंड के ग्लासगो में 23 जुलाई से शुरू होने वाले 23वें कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय दल एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करने के इरादे से उतरेगा। इन खेलों में 126 खिलाड़ियों वाला भारतीय दल 13 खेलों में पदक के लिए चुनौती पेश करेगा। पिछले संस्करण में भारत ने 61 पदक जीतकर पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया था। हालांकि, राष्ट्रमंडल खेलों का इतिहास भारतीय खेलों के लिए कई यादगार उपलब्धियों और सुनहरे पलों से भरा रहा है, जहां खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से देश का नाम रोशन किया है।

साल 1934 में कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना पहला पदक जीतने वाले भारत ने अब तक 18 संस्करणों में हिस्सा लेकर 500 से अधिक पदक अपने नाम किए हैं, जिसमें 190 स्वर्ण पदक भी शामिल हैं। भारतीय खिलाड़ियों ने इन खेलों में अपनी प्रतिभा, मेहनत और जज्बे के दम पर कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। आइए जानते हैं राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के गौरवशाली सफर, यादगार प्रदर्शनों और हर संस्करण में उसके प्रदर्शन का पूरा लेखा-जोखा।

दो पत्रकारों के विचार से जन्मा राष्ट्रमंडल खेलों का इतिहास

कॉमनवेल्थ गेम्स को शुरुआत में एम्पायर गेम्स कहा जाता था। इस प्रतियोगिता का विचार दो पत्रकारों जे एस्टली कूपर और बॉबी रॉबिन्सन ने दिया था। उनकी पहल पर पहला संस्करण 1930 में कनाडा के हैमिल्टन शहर में आयोजित हुआ। भारत ने पहले संस्करण में हिस्सा नहीं लिया। इसके बाद 1934 में लंदन में हुए दूसरे कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने पहली बार छह खिलाड़ियों का दल भेजा।

राशिद अनवर ने रचा था इतिहास, भारत को दिलाया पहला पदक

1934 में भारत को पहला कॉमनवेल्थ पदक पहलवान राशिद अनवर ने दिलाया। राशिद अनवर ने 74 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग में कांस्य पदक जीता। यही उस संस्करण में भारत का एकमात्र पदक था। 1938 में भारत कोई पदक नहीं जीत सका। इसके बाद 1950 के खेलों में भारत ने हिस्सा नहीं लिया। आजादी के बाद 1954 में स्वतंत्र भारत पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स में उतरा, लेकिन उस बार भी उसे कोई पदक नहीं मिला।

फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह ने रचा इतिहास, भारत को मिला पहला गोल्ड

1958 में वेल्स के कार्डिफ में भारत के इतिहास का नया अध्याय लिखा गया। महान धावक मिल्खा सिंह ने 440 गज की दौड़ जीतकर भारत को एथलेटिक्स और राष्ट्रमंडल खेलों का पहला स्वर्ण पदक दिलाया। इसी संस्करण में पहलवान लीला राम ने 100 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण जीतकर कुश्ती में भी भारत को पहला गोल्ड मेडल दिलाया।

कुश्ती, शूटिंग और वेटलिफ्टिंग में भारत का शानदार प्रदर्शन

शुरुआती वर्षों में भारत की सबसे बड़ी ताकत कुश्ती रही। साल 1966, 1970, 1974 और 1982 के खेलों में भारत के अधिकांश स्वर्ण पदक कुश्ती से आए। इसके बाद भारत्तोलन और निशानेबाजी ने भारत की झोली भरनी शुरू की। साल 1990 के ऑकलैंड कॉमनवेल्थ गेम्स में अशोक पंडित ने सेंटर-फायर पिस्टल स्पर्धा में भारत को शूटिंग का पहला स्वर्ण पदक दिलाया।

इसके बाद शूटिंग भारत का सबसे सफल खेल बन गया। भारत के 190 स्वर्ण पदकों में से 63 स्वर्ण केवल शूटिंग से आए हैं। महान निशानेबाज जसपाल राणा ने कॉमनवेल्थ गेम्स में सबसे ज्यादा 15 पदक जीते। इनमें नौ स्वर्ण शामिल हैं। वह कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के सबसे सफल खिलाड़ी हैं।

2010 राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने दिखाया अपना दम

भारत का अब तक का सबसे शानदार प्रदर्शन 2010 के नई दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में देखने को मिला, जब भारत ने पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की। घरेलू मैदान पर भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 38 स्वर्ण, 27 रजत और 36 कांस्य पदक सहित कुल 101 पदक अपने नाम किए। यह राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इसी संस्करण में भारत पदक तालिका में दूसरे स्थान पर रहा, जो अब तक उसका सबसे ऊंचा स्थान भी है।

कई खेलों में पहली बार मिला स्वर्ण
समय के साथ भारत ने कई नए खेलों में भी अपनी पहचान बनाई।
  • 1978 में प्रकाश पादुकोण ने बैडमिंटन में पहला स्वर्ण जीता।
  • 1978 में ही एकाम्बरम करुणाकरण ने वेटलिफ्टिंग में पहला स्वर्ण दिलाया।
  • 2002 में मोहम्मद अली कमर ने मुक्केबाजी में पहला स्वर्ण जीता।
  • 2002 में भारतीय महिला हॉकी टीम ने पहली बार स्वर्ण पदक जीता।
  • 2006 में अचंता शरत कमल ने टेबल टेनिस में पहला स्वर्ण जीता।
  • 2010 में राहुल बनर्जी और दीपिका कुमारी ने तीरंदाजी में पहले स्वर्ण दिलाए।
  • 2010 में ही सोमदेव देववर्मन ने टेनिस में भारत को पहला स्वर्ण दिलाया।
  • 2014 में दीपिका पल्लीकल और जोशना चिनप्पा ने स्क्वैश में पहला स्वर्ण जीता।
  • 2022 में भारत ने लॉन बॉल्स में अपना पहला पदक और पहला स्वर्ण जीतकर इतिहास रचा।

राष्ट्रमंडल खेलों में फिर इतिहास रचने उतरेगा भारत

कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का प्रदर्शन साल दर साल बेहतर होता गया है। कुश्ती, शूटिंग, बैडमिंटन, मुक्केबाजी, वेटलिफ्टिंग, टेबल टेनिस और एथलेटिक्स जैसे खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर दुनिया में अलग पहचान बनाई है। अब ग्लासगो में होने वाले 23वें संस्करण में भी भारतीय दल से शानदार प्रदर्शन की उम्मीद है। यदि खिलाड़ी अपनी क्षमता और अनुभव के अनुसार प्रदर्शन करने में सफल रहते हैं तो भारत एक बार फिर पदक तालिका में शीर्ष देशों को कड़ी चुनौती दे सकता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here