Chess: भारत के डी गुकेश ने खत्म की चीन की बादशाहत, बने दुनिया के यंगेस्ट वर्ल्ड चेस चैंपियन

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नई दिल्ली: भारत के डी गुकेश ने अपने शानदार खेल से 18वें वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप को जीतकर इतिहास रच दिया है। डी गुकेश ने सिर्फ 18 साल की उम्र में यह कारनामा कर दिखाया है। ऐसा करने वाले गुकेशन दुनिया के सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बने हैं। गुकेश ने खिताबी मुकाबले में चीन के डिंग लिरेन को हराकर यह उपलब्धि हासिल की है। डी गुकेश ने चैंपियनशिप मुकाबले के 14वें और आखिरी राउंड में चीन के चैंपियन डिंग लिरेन को कड़ी टक्कर दी, लेकिन अंतिम बाजी भारत के डी गुकेश ने जीतकर खिताब को अपने नाम कर लिया।

गुकेश ने 14 बाजी के इस मुकाबले की आखिरी क्लासिकल बाजी जीतकर लिरेन के 6.5 के मुकाबले जरूरी 7.5 अंक के साथ खिताब जीता। यह बाजी हालांकि अधिकांश समय ड्रॉ की ओर जाती दिख रही थी। गुकेश की खिताबी जीत से पहले रूस के दिग्गज गैरी कास्पारोव सबसे कम उम्र के विश्व शतरंज चैंपियन थे जिन्होंने 1985 में अनातोली कार्पोव को हराकर 22 साल की उम्र में खिताब जीता था।

गुकेश इस साल की शुरुआत में कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतने के बाद विश्व खिताब के लिए चुनौती पेश करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने थे। वह दिग्गज विश्वनाथन आनंद के बाद वैश्विक खिताब जीतने वाले दूसरे भारतीय हैं। पांच बार के विश्व चैंपियन आनंद ने अपना आखिरी खिताब 2013 में जीता था। इस तरह गुकेश ने भारत के लिए एक लंबे इंतजार को खत्म किया।

बता दें कि खिताबी मुकाबले में भारत के ग्रैंडमास्टर डी गुकेशन ने अपने विरोधी डिंग लिरेन के साथ 13 बाजियों के बाद 6.5-6.5 की बराबरी पर थे। ऐसा लग रहा था कि मुकाबला ड्रॉ की ओर बढ़ चला है, लेकिन काले मोहरों के साथ खेल रहे भारत के चाणक्य ने ऐसी चाल चली की चीन के डिंग लिरेन चारो खाने चित हो गए।

सपना पूरा होने पर साझा किया अपना अनुभव

विश्व चैंपियन बनने के बाद भारतीय गैंडमास्टर डी गुकेश ने अपनी मां से फोन पर बातचीत की। गुकेश ने कहा कि वह और उनकी मां फोन पर बातचीत के दौरान रो रहे थे। अपने माता-पिता के योगदान के बारे में गुकेश ने कहा, विश्व शतरंज चैंपियनशिप जीतने का सपना उनके लिए मुझसे बड़ा है। गुकेश ने कहा, मुझे भगवान पर भरोसा है और कई मौकों पर मेरी मदद भी की है। इसका उदाहरण पिछले साल कैंडिडेट्स के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाया था और फिर बाद में भगवान ने मुझे कई मौके दिए। उन्होंने कहा, शतरंज का आनंद लेते रहो। तुम एक दिन अपना सपना पूरा करोगे।

छह साल की उम्र से देख रहा था सपना

गुकेश ने कहा, मैं छह या सात साल की उम्र से विश्व चैंपियन बनने का सपना देख रहा था और इस पल को जी रहा था। हर शतरंज खिलाड़ी इस पल को जीना चाहता है।

आनंद सर मेरा समर्थन कर रहे थे

गुकेश ने कहा, विशी सर (विश्वनाथन आनंद) कभी भी आधिकारिक तौर पर टीम का हिस्सा नहीं थे, लेकिन हम सभी जानते हैं कि वह मेरा समर्थन कर रहे थे। उन्होंने एक प्रशिक्षण शिविर में भाग लिया, लेकिन कुछ सत्रों के लिए दूर से भी मदद की।

ध्वज देखना सबसे अच्छा क्षण था

गुकेश ने कहा, 2013 में मैंने विशी सर और मैग्नस को देखा और सोचा, एक दिन वहां होना वाकई बहुत अच्छा होगा और वास्तव में वहां होना और वहां बैठना और मेरे बगल में भारतीय ध्वज देखना शायद सबसे अच्छा क्षण था। जब कार्लसन जीते थे तो मैंने सोचा कि मैं एक दिन यह खिताब भारत वापस लेकर आऊंगा।

मेरी नजर में लिरेन विश्व चैंपियन

गुकेश ने कहा, सभी जानते हैं कि डिंग लिरेन कौन हैं। वह कई वर्षों से इस खेल के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में से एक रहे हैं। मेरे लिए वह असली विश्व चैंपियन हैं। लिरेन ने एक सच्चे चैंपियन की तरह लड़ाई लड़ी और मुझे डिंग और टीम के लिए खेद है। मैं अपने प्रतिद्वंद्वी को धन्यवाद देना चाहता हूं।

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