Malcolm Marshal: बल्लेबाजों के जेहन में खौफ भरने वाले गेंदबाज को भुला सा दिया, उनकी कब्र की सुध लेने वाला कोई नहीं

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ब्रिजटाउन: दुनिया भर के बल्लेबाजों के जेहन में खौफ भरने वाले कैरेबियन गेंदबाज मैलकम मार्शल का पैर जब क्रीज पर पड़ता था तो लगता था उनके जूते जैसे नाच रहे हों। वह रूढ़िवादी तरीके से आउटस्विंग और इनस्विंग की महारत बनाए रखते थे। वह एक बाहुबली भुजा वाले फुर्तीले गेंदबाज थे। उनकी बाउंसर मौत की तरह बल्लेबाज की तरफ बढ़ती थी जिससे बचने के लिए एक पल भी काम था।

18 अप्रैल 1958 को बारबाडोस के ब्रिजटाउन में पैदा हुए इस खतरनाक कैरेबियाई गेंदबाज को अब उनके ही शहर ब्रिजटाउन ने भुला सा दिया है। ग्रांटले एडम्स अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम से कुछ ही दूरी पर वह स्थान है, जहां इस दिग्गज क्रिकेटर को दफनाया गया है, लेकिन विडंबना है कि इस जगह की सुध लेने वाला कोई नहीं है। मैलकम मार्शल की उपलब्धियों को क्रिकेट जगत ने सम्मान दिया है, लेकिन उनके असामयिक निधन के 25 साल बाद उनके गृहनगर में लगता नहीं है कि कोई उन्हें उस तरह से याद करता है, जिसका वह हकदार थे।

अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अगर किसी से पूछा जाता है कि मार्शल को कहां दफनाया गया है तो किसी के पास इसका जवाब नहीं होता है। अपनों ने भले ही मार्शल को भुला दिया हो, लेकिन कुछ साल पहले मुंबई की एक प्रशंसक मैन्सी से अपने पसंदीदा क्रिकेटर की कब्र की यह हालत देखी नहीं गई और उन्होंने इसका कायाकल्प करने का निर्णय लिया। मैन्सी बारबाडोस पहुंची और जिस कब्र के आसपास गंदगी थी, हर जगह जंगली घास उगी हुई थी, उस स्थान को बदलने में लग गईं। इसके लिए उन्होंने वेस्टइंडीज के कुछ पूर्व क्रिकेटरों की भी सहायता ली।

मैन्सी ने ब्रिजटाउन में क्रिकेट लीजेंड्स मैच में शिरकत की और कर्टनी वाल्श व एंब्रोस जैसे कई पूर्व खिलाडि़यों से दोस्ती की। इसके बाद वाल्श ने मैन्सी को रेव वेस्ली हाल से मुलाकात करने का सुझाव दिया। हालांकि उनके प्रयासों के बाद भी अब भी हालात ज्यादा नहीं बदले हैं। स्थानीय नागरिक राब ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि मार्शल महान खिलाड़ी थे लेकिन जब वह वेस्टइंडीज के लिए मैच जीता करते थे, तब वर्तमान पीढ़ी का जन्म भी नहीं हुआ था।

यहां क्रिकेट खेलने वाले एक 17 साल के बच्चे डेरेन ने कहा कि जो क्रिकेट खेलते हैं वे मार्शल को जानते हैं। उन्हें पूजते भी हैं लेकिन बाकी लोग अपने हीरो को भूल गए हैं। एक समय कैरेबियन गेंदबाजों का खौफ था और उसके अगुआ मार्शल थे। वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड और यहां के दिग्गज क्रिकेटरों को इसके लिए कदम उठाने चाहिए। हमें उनकी यादों को संजोकर रखना चाहिए।

ऐसा नहीं है कि यहां पर क्रिकेट को लेकर उत्साह नहीं है। वेस्टइंडीज ने 1975 और 1979 के शुरुआती दो वनडे विश्व कप जीते थे। इस टीम ने 2012 और 2016 में टी 20 विश्व कप भी जीते हैं। वेस्टइंडीज 14 वर्ष के बाद विश्व कप की मेजबानी कर रहा है और इसको लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह बना हुआ है। ब्रिजटाउन में हवाई अड्डे सहित हर जगह पर टी-20 विश्व कप को लेकर पोस्टर और बैनर लगे हैं। विश्व कप का फाइनल 29 जून को ब्रिजटाउन में ही होगा और इसलिए यहां चारों तरफ ‘होम आफ फाइनल’ के बैनर लगे हुए हैं। वेस्टइंडीज ने डेरेन सैमी की कप्तानी में दो बार टी-20 विश्व कप का खिताब जीता और प्रशंसकों को उम्मीद है कि वह कोच के रूप में भी यह उपलब्धि हासिल करने में सफल रहेंगे।

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