मज़ूमदार बोले : रॉड्रिग्स को बाहर करना सबसे कठिन फ़ैसलों में से एक था

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पुणे. भारत की महिला क्रिकेट टीम के मुख्य कोच अमोल मज़ूमदार ने कहा कि इंग्लैंड के ख़िलाफ़ वर्ल्ड कप मैच में जेमिमाह रॉड्रिग्स को बाहर रखना टीम के लिए सबसे कठिन फ़ैसलों में से एक था। उन्होंने बताया कि यह फ़ैसला पूरी तरह टीम संयोजन और इंदौर की बल्लेबाज़ी सहायक परिस्थितियों पर आधारित था। मज़ूमदार ने कहा, “कभी-कभी टीम की ज़रूरत के मुताबिक ऐसे कठिन निर्णय लेने पड़ते हैं। उस मैच में हमें छठे गेंदबाज़ की ज़रूरत थी और हमें लगा कि यह संयोजन टीम के लिए सही रहेगा।” रॉड्रिग्स ने टूर्नामेंट की चार पारियों में सिर्फ़ 65 रन बनाए हैं और दो बार शून्य पर आउट हुई हैं। इंग्लैंड के ख़िलाफ़ उनकी जगह तेज़ गेंदबाज़ रेणुका सिंह को मौका मिला। मज़ूमदार ने कहा कि रॉड्रिग्स ने यह फ़ैसला खेल भावना के साथ स्वीकार किया और अब वह नेट्स में अपनी बल्लेबाज़ी पर मेहनत कर रही हैं। न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ मैच में उनका खेलना अभी तय नहीं है।
घरेलू दबाव झेल रही टीम पर कोच का भरोसा कायम
भारत लगातार तीन मैच हार चुका है, लेकिन कोच मज़ूमदार ने टीम की क्षमता पर भरोसा जताया। उन्होंने माना कि घरेलू विश्व कप में दबाव स्वाभाविक है, पर टीम उसे संभालने में सक्षम है। उन्होंने युवा तेज़ गेंदबाज़ क्रांति गौड़ का बचाव करते हुए कहा, “गौड़ के पास भले अनुभव कम हो, लेकिन हमने उनकी मदद के लिए हर संभव प्रयास किए हैं। वह अभी सीखने के दौर में हैं और हमें उन पर पूरा विश्वास है।” टीम का प्रदर्शन अस्थिर रहा है, खासकर दूसरे स्पेल में तेज़ गेंदबाज़ों द्वारा रन लीक होने को लेकर। कोच ने कहा कि उन्होंने खिलाड़ियों से इस पर खुलकर बात की है और समाधान पर काम चल रहा है।
बल्लेबाज़ों से बड़ी पारी की उम्मीद, कप्तान पर नहीं है अतिरिक्त बोझ
अब तक इस विश्व कप में छह भारतीय बल्लेबाज़ अर्धशतक लगा चुके हैं, लेकिन कोई भी तीन अंकों के स्कोर तक नहीं पहुंचा है। मज़ूमदार ने कहा कि टीम इस पर गंभीरता से काम कर रही है। इंग्लैंड के ख़िलाफ़ मैच में स्मृति मांधना और हरमनप्रीत कौर की 125 रन की साझेदारी मजबूत रही, लेकिन दोनों बड़ी पारी में तब्दील नहीं कर सकीं।
कोच ने कहा, “खिलाड़ियों को खुद एहसास है कि 50 को 100 में बदलना ज़रूरी है। हमने इस पर ईमानदार चर्चा की है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि न तो हरमनप्रीत पर कप्तान के तौर पर कोई अतिरिक्त दबाव है और न ही ऋचा घोष पर मैच फ़िनिश करने की जिम्मेदारी अकेले डाल दी गई है। “हम चाहते हैं कि ऋचा को अपने शॉट खेलने की पूरी आज़ादी मिले।

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