नई दिल्ली : श्रीशंकर मुरली ने बुधवार (29 जुलाई) को कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की पुरुष लॉन्ग जंप स्पर्धा में 8.09 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक अपने नाम किया। हालांकि, अंतिम प्रयास के बाद टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) से समर्थित श्रीशंकर काफी निराश नजर आए। प्रतियोगिता समाप्त होने के बाद वह अपने कोच से लंबी चर्चा करते दिखे। उनके चेहरे पर स्वर्ण पदक से चूक जाने की कसक साफ दिखाई दे रही थी। इस स्पर्धा में जमैका के ताजय गेल ने 8.15 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता, जबकि श्रीशंकर महज 6 सेंटीमीटर के अंतर से गोल्ड से चूक गए।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार लगातार दूसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतने वाले केरल के पलक्कड़ निवासी श्रीशंकर मुरली ने बातचीत में कहा कि वह स्वर्ण पदक से महज 6 सेंटीमीटर दूर रह गए, लेकिन लॉन्ग जंप जैसी स्पर्धा में यह अंतर भी बेहद बड़ा माना जाता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने बताया कि चौथे प्रयास में उनकी छलांग काफी अच्छी थी, लेकिन उसे फाउल घोषित कर दिया गया। श्रीशंकर का मानना है कि वह उस दूरी तक छलांग लगाने में सक्षम थे। ऐसे में बड़े मंच पर अपनी पूरी क्षमता नहीं दिखा पाने का अफसोस उन्हें लंबे समय तक रहेगा।
श्रीशंकर मुरली ने बताई स्वर्ण से चूकने की वजह
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) की ओर से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में श्रीशंकर मुरली ने कहा, “स्वर्ण पदक मुझसे सिर्फ 6 सेंटीमीटर दूर रह गया, लेकिन लॉन्ग जंप में यह अंतर भी काफी बड़ा होता है। मुझे पूरा भरोसा था कि मैं एक बड़ी छलांग लगा सकता हूं, लेकिन ऐसा नहीं हो सका और यही वजह है कि मैं थोड़ा निराश था। चौथे प्रयास में मेरी एक छलांग काफी लंबी थी, लेकिन उसे फाउल घोषित कर दिया गया। मुझे पता था कि मेरे अंदर वह दूरी तय करने की क्षमता है, लेकिन जिस दिन इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी, उस दिन मैं वैसी छलांग नहीं लगा सका। यह मेरे लिए निराशाजनक जरूर है, लेकिन अब हमारा पूरा ध्यान अगले मुकाबले पर रहेगा।”
घुटने में दर्द के बावजूद श्रीशंकर मुरली ने दिखाया दम
श्रीशंकर मुरली ने 2022 में बर्मिंघम में हुए पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स में भी 8.08 मीटर की जंप के साथ सिल्वर मेडल जीता था। वह 2023 एशियन गेम्स में भी सिल्वर जीते थे। इसके बाद उनके करियर में काफी मुश्किल पल आया। उनके घुटने में दिक्कत हो गई थी, जिससे वह टेक-ऑफ करते हैं। इसके कारण वह 2024 पेरिस ओलंपिक से बाहर हो गए थे। अपेंडिक्स सर्जरी की वजह से वह कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 एडिशन में नहीं खेल पाए थे।
घुटने की चोट से उबरकर श्रीशंकर ने फिर दिखाया दम
घुटने की गंभीर चोट से उबरने के करीब एक साल बाद ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता गया रजत पदक श्रीशंकर मुरली के करियर का पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय पदक साबित हुआ। केरल के इस स्टार एथलीट के लिए यह उपलब्धि शानदार वापसी का प्रतीक है। इस साल वह लगातार 8 मीटर से अधिक की छलांग लगा रहे हैं। उन्होंने भुवनेश्वर में आयोजित राष्ट्रीय इंटर-स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 8.38 मीटर की छलांग लगाकर अपना सीजन बेस्ट प्रदर्शन भी दर्ज किया था। श्रीशंकर से पहले कॉमनवेल्थ गेम्स की लॉन्ग जंप स्पर्धा में भारत के लिए सुरेश बाबू (पुरुष वर्ग, कांस्य, 1978), अंजू बॉबी जॉर्ज (महिला वर्ग, कांस्य, 2002) और एम. प्रजुषा (महिला वर्ग, रजत, 2010) पदक जीत चुके थे।


