जानिए किस तरह पड़ा राहुल द्रविड़ का नाम ‘द वॉल’, और फिर बना डाला विश्व रिकॉर्ड

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नई दिल्ली। भारतीय टीम के पूर्व महान बल्लेबाज राहुल द्रविड़ के नाम टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा गेंद खेलने का वर्ल्ड रिकॉर्ड है। हाल ही में इंटरनेशनल क्रिकेट यानी आइसीसी ने खुलासा किया था कि राहुल द्रविड़ ने अपने टेस्ट करियर में 31 हजार 258 गेंदों का सामना किया है, जो कि किसी दूसरे बल्लेबाज से काफी ज्यादा हैं। यहां तक कि 200 टेस्ट मैच खेलने वाले सचिन तेंदुलकर भी इतनी गेंद नहीं खेल सके हैं।

टेस्ट क्रिकेट में राहुल द्रविड़ के द्वारा खेली गईं सबसे ज्यादा गेंदों की ही वजह से उनका निकनेक (द वॉल) न्यायसंगत लगता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनको द वॉल नाम किसने दिया था? अगर नहीं जानते हैं तो आज जान जाएंगे। दरअसल, द्रविड़ को द वॉल उपनाम निमा नामचु (Nima Namchu) ने दिया था और वे इस बात से हैरान नहीं हैं कि उन्होंने अपने इंटरनेशनल टेस्ट करियर में 31 हजार से ज्यादा गेंदे खेलीं।

नामचु जो कि पिछले 26 साल से इंडियन एडवरटाइजिंग इंडस्ट्री में एक स्वतंत्र क्रिएटिव कंसलटेंट के रूप में काम कर रहे हैं, उन्होंने दैनिक जागरण के सहयोगी अखबार मिड-डे से बात करते हुए कहा है, “मैं विश्व रिकॉर्ड (टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा गेंदों का सामना करने का) से हैरान नहीं हूं। अपनी शांत, समझदार शैली में राहुल द्रविड़ हमेशा गतिशील थे। राहुल की विशेषता वाले उस अभियान की एक पंक्ति थी ‘कल मेरा है'(tomorrow is mine)।”

निमा नामचु ने इटली से फोन पर बात करते हुए बताया, “यह 1997 और 1998 के बीच का समय था। मैं नई दिल्ली में लियो बर्नेट के साथ एक कॉपी सुपरवाइजर था, जो उस समय रिबॉक इंडिया (Reebok India) की विज्ञापन एजेंसी थी। उन्होंने कई खिलाड़ियों के साथ डील की थी और जिस अभियान पर हम काम कर रहे थे, उससे हमें प्रत्येक खिलाड़ी के लिए एक उपाधि या उपनाम देने की आवश्यकता थी।”

“हम हर स्टार के लिए एक नाम लेकर आए। मोहम्मद अजहरुद्दीन Azhar, the Assasin थे। जवागल श्रीनाथ जैवलिन श्रीनाथ थे। राहुल के लिए, मैं द वॉल के साथ आया। उपनामों के बारे में नहीं सोचा गया था। हमने देखा कि उन्होंने कैसे खेला और इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि कैसे उन्होंने मैदान पर खुद को संभाला। द वॉल से आया कि राहुल किस तरह से दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाज एलन डोनाल्ड के सामने खड़े थे। उस समय वह युवा थे, बावजूद इसके राहुल सबसे तनावपूर्ण स्थितियों में भी अस्थिर थे। तो, द वॉल स्वाभाविक रूप से उनके नाम के साथ फिट लग रहा था।”

नामचु एक-दो बार राहुल द्रविड़ से मिल चुके हैं, लेकिन उन्होंने कभी नहीं बताया कि वह उनके प्रसिद्ध उपनाम के पीछे हैं। पहली बार 1998 में वानखेड़े स्टेडियम में एक टेलीविजन विज्ञापन की शूटिंग के दौरान था। वे 2003 में बैंगलोर के पैलेस ग्राउंड्स में रोलिंग स्टोन्स कॉन्सर्ट के दौरान फिर से मिले, जहां हम एक दूसरे के बगल में बैठे थे।