नई दिल्ली: भारत के नितेश सिवाच ने एशियन गेम्स 2026 में ग्रीको-रोमन कुश्ती में ऐतिहासिक सिल्वर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया। नितेश को गुरुवार को नागोया सिटी इनाए स्पोर्ट्स सेंटर में पुरुषों के 97 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में जापान के यूरी नकाजातो के खिलाफ 0-4 से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, फाइनल में हार के बावजूद नितेश का सिल्वर मेडल भारतीय ग्रीको-रोमन कुश्ती के लिए बड़ी उपलब्धि है।
नितेश का यह सिल्वर मेडल इसलिए भी खास है क्योंकि इस कैटेगरी में भारत को एशियन गेम्स में पदक के लिए 64 साल का इंतजार करना पड़ा। उनसे पहले 1962 में मारुति माने ने इसी वजन वर्ग में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीता था। नितेश एशियन गेम्स में ग्रीको-रोमन कुश्ती के फाइनल में पहुंचने वाले दूसरे भारतीय बने। उनकी इस उपलब्धि ने भारतीय कुश्ती के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया।
ऐतिहासिक सिल्वर मेडल जीतने के बाद नितेश ने अपनी सफलता अपने पिता को समर्पित की। उन्होंने कहा कि उनके पिता हमेशा उन्हें आगे बढ़ते रहने और अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटने के लिए प्रेरित करते थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार नितेश ने कहा, ‘सच कहूं तो मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है। मैंने एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीता है। मेरे पिता हमेशा मुझसे कहते थे कि एक बार जब मैंने यह सफर शुरू कर दिया है तो पीछे मुड़कर नहीं देखना है, मुझे घर मेडल लाना ही है, और आज, मैंने उनके लिए यह कर दिखाया।’
नितेश ने फाइनल से पहले नॉकआउट चरण में दमदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने क्वार्टर फाइनल में तुर्कमेनिस्तान के अमनबेर्डी अगामामेदोव को 7-1 से हराया। इसके बाद सेमीफाइनल में नितेश का सामना मंगोलिया के गनबाटारिन गनखुयाग से हुआ। भारतीय पहलवान ने इस मुकाबले में अपना दबदबा कायम रखते हुए 9-0 से जीत दर्ज की और फाइनल में जगह बनाई।
फाइनल में नितेश के सामने जापान के यूरी नकाजातो थे। मुकाबले के पहले राउंड में नितेश को पैसिविटी के लिए पेनाल्टी मिली, जिसके बाद नकाजातो ने 2-0 की बढ़त हासिल कर ली। दूसरे राउंड में जापानी पहलवान ने अपनी बढ़त को 4-0 कर लिया। नितेश ने वापसी की कोशिश की, लेकिन नकाजातो ने अपनी बढ़त बरकरार रखते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया और गोल्ड मेडल जीता। नितेश को सिल्वर से संतोष करना पड़ा।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार नितेश ने बताया कि अपनी कैटेगरी में लंबे समय बाद भारत के लिए पदक जीतने की उम्मीद के कारण उन पर काफी दबाव था। हालांकि, उन्होंने अपनी ट्रेनिंग पर भरोसा बनाए रखा और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश की। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, ‘मेरी वेट कैटेगरी से यहां पहले किसी ने मेडल नहीं जीता था, इसलिए बहुत दबाव था, लेकिन मुझे अपनी ट्रेनिंग पर भरोसा था और मैंने अपना सब कुछ झोंक दिया।’
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार नितेश ने कहा कि वर्षों की मेहनत के बाद हासिल किया गया यह पदक उनके लिए बेहद खास है। एशियन चैंपियनशिप 2026 में सिल्वर मेडल जीत चुके नितेश ने अपनी एशियन गेम्स की उपलब्धि पर कहा, ‘मैंने अपने देश का तिरंगा लहरा दिया।’ नितेश का यह सिल्वर मेडल भारतीय ग्रीको-रोमन कुश्ती के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। वह इस स्पर्धा में एशियन गेम्स के फाइनल तक पहुंचने वाले इतिहास के दूसरे भारतीय बने और 64 साल बाद भारत के लिए इस वजन वर्ग में पदक हासिल किया।


