नई दिल्ली. अफग़ानिस्तान के दो प्रमुख स्पिनरों नूर अहमद और मुजीब उर रहमान को आईसीसी आचार संहिता का उल्लंघन करने पर एक-एक डिमेरिट अंक मिला है। यह मामला 18 सितंबर को अबू धाबी में खेले गए एशिया कप मुकाबले के दौरान सामने आया था, जब अफग़ानिस्तान का सामना श्रीलंका से हुआ। नूर अहमद पर आरोप है कि उन्होंने श्रीलंका की पारी के 16वें ओवर में अंपायर के फैसले पर असहमति जताई। अंपायर ने उनकी एक गेंद को वाइड करार दिया, जिस पर उन्होंने नाराज़गी दिखाई। यह आईसीसी कोड ऑफ कंडक्ट के आर्टिकल 2.8 का उल्लंघन माना गया, जो अंपायर के निर्णय पर असहमति या विरोध को लेकर है।
मुजीब का मामला
दूसरी ओर, मुजीब उर रहमान का मामला अलग था। मैच के दौरान उन्होंने गुस्से में अपने तौलिये से स्टंप तोड़ दिए। इसे आर्टिकल 2.2 के उल्लंघन की श्रेणी में रखा गया, जो “क्रिकेट उपकरण, कपड़े, ग्राउंड उपकरण या फिटिंग्स के दुरुपयोग” से संबंधित है। यह घटना तब हुई जब श्रीलंका का दबाव अफग़ानिस्तान पर बढ़ रहा था। मैदान पर मौजूद खिलाड़ियों और अंपायरों के मुताबिक यह व्यवहार खेल भावना के विपरीत था।
अंपायर और रेफ़री का फैसला
मैदान पर मौजूद अंपायर आसिफ़ याक़ूब और वीरेंद्र शर्मा ने इस मामले की रिपोर्ट की। तीसरे अंपायर फ़ैसल अफ़रीदी और चौथे अंपायर रोहन पंडित ने भी आरोपों की पुष्टि की। इसके बाद मैच रेफ़री रिची रिचर्डसन ने दोनों खिलाड़ियों को लेवल 1 के उल्लंघन का दोषी माना और उन्हें एक-एक डिमेरिट अंक दिए। नूर और मुजीब दोनों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया और रेफ़री द्वारा दी गई सज़ा को मान लिया। इसी कारण इस मामले में औपचारिक सुनवाई की ज़रूरत नहीं पड़ी।
अफग़ानिस्तान का अभियान समाप्त
यह घटना ऐसे समय हुई जब अफग़ानिस्तान पहले ही एशिया कप से बाहर हो चुका था। श्रीलंका ने उस मैच में अफग़ानिस्तान को छह विकेट से हराकर उनके अभियान का अंत कर दिया था। उस मैच में नूर अहमद और मुजीब उर रहमान ने एक-एक विकेट जरूर लिया, लेकिन टीम को जीत नहीं दिला पाए। अफग़ानिस्तान की टीम अब अपने खिलाड़ियों के अनुशासन पर भी सवालों का सामना कर रही है। डिमेरिट अंक तुरंत निलंबन का कारण नहीं बनते, लेकिन भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति खिलाड़ियों को बड़ी सज़ा तक ले जा सकती है।


