नई दिल्ली : टोक्यो ओलंपिक के रजत पदक विजेता पहलवान रवि कुमार दहिया और ऊंची कूद के पैरालंपियन शरद कुमार ने केंद्रीय प्रशासनिक पंचाट (कैट) का दरवाजा खटखटाया है। दोनों ने दिल्ली सरकार में सहायक शिक्षा निदेशक (खेल) के पद पर अपनी सेवाओं के नियमितीकरण की मांग की है। उनका आरोप है कि वर्षों से लगातार प्रशासनिक कार्य करने के बावजूद उन्हें केवल अस्थायी विस्तार ही दिया जा रहा है और उनकी सेवाओं को स्थायी नहीं किया जा रहा है।
अलग-अलग लेकिन एक जैसी भाषा वाली याचिकाओं में दोनों खिलाड़ियों ने तर्क दिया कि उन्होंने अपनी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों की पहचान के तौर पर ग्रुप ए पदों की पेशकश मिलने के बाद और अंततः अपनी नौकरी पक्की होने की उम्मीद में सुरक्षित सरकारी नौकरियां छोड़कर दिल्ली सरकार से जुड़ गए। टोक्यो पैरालंपिक के कांस्य और पेरिस पैरालंपिक के रजत पदक विजेता शरद ने बताया कि उन्होंने 2022 में दिल्ली सरकार में शामिल होने के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) में अपनी स्थायी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था जहां वह एथलेटिक्स (पैरा) कोच के तौर पर काम कर रहे थे।
याचिका में क्या रखे गए मुख्य तर्क?
याचिकाओं में यह तर्क दिया गया है कि नियुक्तियों को शुरुआत में छह महीने के लिए या नियमित नियुक्ति होने तक तदर्थ माना गया था, लेकिन संबंधित ज्ञापन में दो साल की परिवीक्षा अवधि का प्रावधान भी शामिल था, जिससे यह वैध अपेक्षा बनी कि खिलाड़ियों की सेवाओं को अंततः नियमित किया जाएगा।
दोनों खिलाड़ियों ने कहा कि वे खेल विभाग में लगातार सरकारी कार्य कर रहे हैं, जिसमें चयन ट्रायल की निगरानी, स्टेडियम और खेल केंद्रों का निरीक्षण, कोच के प्रदर्शन का मूल्यांकन तथा खेलो इंडिया कार्यक्रम से जुड़े कार्य शामिल हैं। याचिकाओं में दिल्ली के उपराज्यपाल के 2023 के एक निर्देश का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें कहा गया था कि तदर्थ आधार पर नियुक्त पदक विजेता खिलाड़ियों को केंद्रीय लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) से परामर्श लेकर शीघ्र ही स्थायी किया जाना चाहिए।


