बीबीएल निजीकरण को लेकर ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में बड़ा विवाद

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मेलबर्न/नई दिल्ली. ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में इन दिनों Big Bash League के निजीकरण को लेकर बड़ी बहस छिड़ी हुई है। एक तरफ Cricket Australia निजी निवेश के जरिए बीबीएल को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना चाहता है, वहीं कुछ राज्य संघ और क्रिकेट से जुड़े लोग इसे खेल की परंपरा और नियंत्रण के लिए खतरा मान रहे हैं।  क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया का मानना है कि यदि बीबीएल में निजी निवेश नहीं लाया गया, तो ऑस्ट्रेलिया के शीर्ष खिलाड़ी दुनिया की दूसरी टी20 लीगों की ओर आकर्षित हो सकते हैं। मौजूदा समय में Indian Premier League, SA20, ILT20 और भविष्य की NZ20 जैसी लीग खिलाड़ियों को भारी रकम दे रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका की SA20 लीग में कुछ खिलाड़ियों को 13 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक की रकम मिली, जबकि बीबीएल में शीर्ष स्थानीय खिलाड़ियों की कमाई इससे काफी कम है। यही वजह है कि ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और घरेलू टी20 लीग के बीच संतुलन को लेकर सोचने लगे हैं।

ऑस्ट्रेलिया के कप्तान Pat Cummins ने हाल ही में संकेत दिया था कि खिलाड़ियों के सामने अब आर्थिक अवसरों का बड़ा सवाल है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि उन्हें ऑस्ट्रेलिया के लिए खेलने के बदले तीन साल का लगभग 40 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर प्रति सीजन का प्रस्ताव दिया गया है, ताकि वे विदेशी लीगों की ओर न जाएं।  वहीं कई स्टार खिलाड़ी बीबीएल से दूरी बना चुके हैं। David Warner ने 2013 के बाद बीबीएल नहीं खेला, जबकि मिचेल स्टार्क और ट्रैविस हेड जैसे खिलाड़ी भी लगातार उपलब्ध नहीं रहे। युवा ऑलराउंडर कूपर कॉनॉली जैसे खिलाड़ी आईपीएल और दूसरी विदेशी लीगों से घरेलू क्रिकेट से ज्यादा कमाई कर रहे हैं।

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की चिंता यह है कि यदि समय रहते बीबीएल को आर्थिक रूप से प्रतिस्पर्धी नहीं बनाया गया, तो खिलाड़ी सालभर दुनिया की फ्रेंचाइजी लीगों में खेलने के लिए राष्ट्रीय क्रिकेट छोड़ सकते हैं। दूसरी ओर न्यू साउथ वेल्स जैसे राज्य संघ निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया पहले मौजूदा संसाधनों और कमाई के तरीकों को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करे, बजाय इसके कि लीग का नियंत्रण निजी निवेशकों को सौंपा जाए।  इस पूरे विवाद ने ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के भविष्य को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पारंपरिक क्रिकेट ढांचा आने वाले समय में फ्रेंचाइजी क्रिकेट के दबाव को झेल पाएगा या फिर खेल पूरी तरह कारोबारी मॉडल की ओर बढ़ जाएगा।

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