नवी मुंबई. भारतीय सलामी बल्लेबाज प्रतिका रावल चोट के कारण महिला विश्व कप के सेमीफाइनल और फाइनल में नहीं खेल सकीं, लेकिन टीम की जीत का जश्न उन्होंने दिल से मनाया। फाइनल के बाद उन्हें उनका मेडल मिला, जिसे वे शुरू में मिस कर गई थीं। रावल ने कहा कि यह पल उनके लिए बहुत खास है और वह इसे लंबे समय तक याद रखेंगी। रावल ने बताया कि जब वे फाइनल से बाहर हुईं, तब टीम के सपोर्ट स्टाफ ने अस्थायी तौर पर अपना मेडल उन्हें थमाया था ताकि वे जश्न में हिस्सा ले सकें। बाद में पुष्टि हुई कि ICC अध्यक्ष जय शाह ने उनका असली मेडल भेजा है।
रावल ने कहा कि सोशल मीडिया पर इसे लेकर बातें बढ़ा-चढ़ाकर कही गईं, लेकिन अब उनके पास उनका मेडल है और वे खुश हैं। चोटिल होने के बाद उनकी जगह शेफाली वर्मा ने ओपनिंग की। शेफाली ने फाइनल में 87 रन बनाए और दो विकेट भी लिए। रावल ने कहा कि उन्हें शेफाली पर पूरा भरोसा था। उन्होंने फाइनल से पहले बातचीत का जिक्र करते हुए बताया कि शेफाली ने उनसे कहा कि उन्हें उनके न खेलने का अफसोस है, जिस पर रावल ने जवाब दिया कि टीम के लिए यह बदलाव जरूरी था और उन्हें उम्मीद थी कि शेफाली कुछ खास करेंगी।
टूर्नामेंट में 308 रन बनाने वाली रावल सबसे अधिक रन बनाने वाली बल्लेबाजों की सूची में चौथे स्थान पर रहीं। बांग्लादेश के खिलाफ लीग मैच में टखने की चोट लगने के बाद वे टूर्नामेंट से बाहर हो गई थीं। मनोविज्ञान की छात्रा होने के कारण उन्होंने कहा कि वे परिस्थिति को स्वीकार कर आगे बढ़ सकीं और अपनी ऊर्जा रिकवरी और टीम को सपोर्ट करने में लगाई। रावल ने बताया कि उनके पिता उनकी चोट से ज्यादा परेशान थे और उन्हें अपने पिता को संभालना पड़ा। टीम के कोच, परिवार और दोस्तों ने उनका लगातार साथ दिया, जिससे उन्हें मानसिक मजबूती मिली। अपनी रिकवरी को लेकर रावल आशावादी हैं।
उन्होंने कहा कि वे अब काफी बेहतर महसूस कर रही हैं और डॉक्टरों की अनुमति मिलने के बाद फिर से बल्लेबाजी शुरू करेंगी। उनका लक्ष्य है कि रिहैब पूरा कर घरेलू सीजन में वापसी करें। 2024 में डेब्यू करने के बाद से रावल ने 24 वनडे में 50 से ऊपर की औसत से 1110 रन बनाए हैं। स्ट्राइक रेट पर उठे सवालों पर उन्होंने कहा कि उनका ध्यान हमेशा टीम की जरूरत पर रहता है। मैच की स्थिति के आधार पर ही उनकी भूमिका तय होती है और व्यक्तिगत आंकड़े उनके लिए प्राथमिकता नहीं होते।

