फाइनल से पहले घबराई थीं शैफाली वर्मा, अपने आदर्श को प्रभावित करने के लिए कर दिखाया कमाल

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नई दिल्ली : किस्मत भी कभी-कभी अद्भुत खेल दिखा देती है! शैफाली वर्मा पिछले एक साल से भारतीय टीम से बाहर थीं। महिला वर्ल्ड कप के लिए वह भारत की रिजर्व सूची में भी शामिल नहीं थीं। लेकिन बांग्लादेश के खिलाफ एक अप्रभावी मुकाबले में फील्डिंग के दौरान प्रतिका रावल के चोटिल होने से अचानक शैफाली के लिए टीम इंडिया में वापसी का रास्ता खुल गया। इसके बाद उन्होंने इस मौके का पूरा फायदा उठाया। रविवार (2 नवंबर) को जब भारत ने साउथ अफ्रीका को हराकर खिताब अपने नाम किया, तब शैफाली ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ का पुरस्कार जीता और अपने आदर्श मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को प्रभावित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

भारतीय टीम की ओपनर शैफाली वर्मा का ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल में प्रदर्शन खास नहीं रहा था, लेकिन फाइनल में उन्होंने शानदार वापसी करते हुए 87 रनों की शानदार पारी खेली और 2 विकेट भी झटके। खिताबी मुकाबले से पहले हालांकि शैफाली को अपने फाइनल मैचों में खराब रिकॉर्ड को लेकर चिंता सता रही थी। इस बात को उन्होंने अपने पिता से फोन पर साझा किया, जिन्होंने उन्हें हिम्मत दी और डर को दूर कर आत्मविश्वास के साथ मैदान पर उतरने की सलाह दी।

“पापा, डर लग रहा है” — फाइनल से पहले घबराई थीं शैफाली वर्मा

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शैफाली के पिता ने बताया, “मैं अपनी बेटी को अच्छी तरह जानता हूं। उसकी आवाज़ सुनते ही मुझे एहसास हो गया कि कुछ ठीक नहीं है। जब उसने बाकी सबसे बात कर ली, तो मैंने फोन अपने हाथ में लिया, दूसरे कमरे में जाकर बैठ गया और उससे पूछा कि क्या हुआ। तब उसने धीरे से कहा — ‘पापा, डर लग रहा है… फाइनल में मेरा रिकॉर्ड अच्छा नहीं है।’”

“सचिन सर मैच देख रहे होंगे” — शैफाली वर्मा का भावुक बयान

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार संजीव ने बताया, “मैंने उसे उस दिन की याद दिलाई जब उसे टीम से बाहर किया गया था। मैंने कहा कि वह इससे भी कठिन दौर से गुजर चुकी है। वह सिर्फ 21 साल की है, लेकिन अब तक कई उतार-चढ़ाव देख चुकी है। मैंने उसे उसके पूरे सफर की झलक दिखाई — जब मैंने उसके बाल लड़कों की तरह कटवाए थे ताकि वह क्रिकेट खेल सके, जब वह पहली बार राम नारायण अकादमी गई थी। फिर मैंने कहा कि उसके ‘भगवान’ सचिन सर मैच देख रहे होंगे। यह सुनकर वह शांत हो गई, और उसके बाद जिस आत्मविश्वास के साथ उसने फाइनल में खेला, वह वाकई काबिले तारीफ था।”

दशहरा मेले से खरीदा था तेंदुलकर का पोस्टर

शैफाली वर्मा ने क्रिकेट खेलना मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को देखकर शुरू किया था। साल 2013 में जब तेंदुलकर ने रोहतक के लहली में अपना आखिरी फर्स्ट क्लास मैच खेला, तब 9 साल की शैफाली ने अपने पिता संजीव से स्टेडियम ले जाने की जिद की थी ताकि वह अपने आदर्श को करीब से देख सके। इससे ठीक एक हफ्ते पहले ही शैफाली ने दशहरा मेले से सचिन तेंदुलकर का पोस्टर खरीदा था। उस समय वह टेनिस बॉल से क्रिकेट खेला करती थीं और सचिन को अपना सबसे बड़ा प्रेरणास्रोत मानती थीं।

“बहुत हुआ टेनिस बॉल क्रिकेट, अब सचिन की तरह खेलना है” — शैफाली का बचपन का संकल्प

उस मैच में तेंदुलकर ने आखिरी दिन नाबाद 79 रनों की पारी खेली और मुंबई ने जीत दर्ज की। उस पल ने छोटी शैफाली के दिल पर गहरा असर छोड़ा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मैच के बाद उसने अपने पिता से कहा, “पापा, अब बहुत हुआ टेनिस बॉल क्रिकेट, अब सचिन की तरह खेलना है।” बारह साल बाद वही शैफाली वर्मा वर्ल्ड कप फाइनल में बल्ले और गेंद दोनों से चमकीं और भारतीय महिला टीम को पहली बार चैंपियन बनाया। खास बात यह रही कि उस ऐतिहासिक जीत के गवाह खुद उनके हीरो सचिन तेंदुलकर थे, जिन्हें प्रभावित करने में शैफाली ने कोई कसर नहीं छोड़ी।

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