नई दिल्ली: भारत और इंग्लैंड के बीच पांच टेस्ट मैचों की ऐतिहासिक सीरीज में ट्रॉफी का नाम भी चर्चा का केंद्र बना। पारंपरिक पटौदी ट्रॉफी को हटा दिया गया था, जिससे कई लोगों ने असंतोष जताया। इसके स्थान पर नई ट्रॉफी की शुरुआत की गई, जिसका नाम इंग्लैंड के प्रसिद्ध तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन और भारत के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के नाम पर रखा गया है। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि ट्रॉफी के वितरण समारोह में दोनों दिग्गज खिलाड़ी मौजूद नहीं थे, जिससे सवाल खड़े हो गए।
पटौदी ट्रॉफी के रिटायरमेंट पर गावस्कर की आलोचना
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सुनील गावस्कर ने अपने कॉलम में इस मुद्दे पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, ‘यह सीरीज क्रिकेट के दो महान दिग्गजों, सचिन तेंदुलकर और जिमी एंडरसन के नाम पर थी। उम्मीद की जाती थी कि दोनों कप्तानों को ट्रॉफी सौंपने के लिए दोनों दिग्गज मौजूद होंगे, खासकर जब सीरीज ड्रॉ रही।’ हालांकि, ट्रॉफी अनावरण समारोह में सचिन तेंदुलकर मौजूद थे।
बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी समारोह में गावस्कर की अनुपस्थिति
जेम्स एंडरसन अभी भी इंग्लैंड में घरेलू क्रिकेट खेल रहे हैं। जब यह सीरीज जारी थी, तब भी वह इंग्लैंड में ही मैदान पर थे। सुनील गावस्कर ने बताया कि उनकी जानकारी के अनुसार, पूर्व भारतीय कप्तान भी इंग्लैंड में ही मौजूद थे। उन्होंने इस घटना की तुलना इस साल की शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया में हुई घटना से की, जब उन्हें पुरस्कार वितरण समारोह में शामिल नहीं किया गया था और बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के अंत में केवल एलन बॉर्डर ही मौजूद थे।
उस समय यह तर्क दिया गया था कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि सीरीज ऑस्ट्रेलिया ने जीती थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सुनील गावस्कर ने लिखा, ‘जहां तक मुझे पता है, उस समय दोनों इंग्लैंड में थे। तो क्या उन्हें आमंत्रित ही नहीं किया गया? या फिर यह वैसा ही था जैसा इस साल की शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया में हुआ था, जब सिर्फ एलन बॉर्डर को बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी देने के लिए कहा गया था क्योंकि ऑस्ट्रेलिया ने सीरीज जीत ली थी? चूंकि इंग्लैंड की यह सीरीज ड्रॉ रही, इसलिए शायद दोनों में से किसी को भी प्रेजेंटेशन में शामिल होने के लिए नहीं कहा गया होगा।’
पटौदी मेडल की नई व्यवस्था को गावस्कर ने बताया अनुचित
सुनील गावस्कर ने नए पटौदी मेडल को सीरीज के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी की बजाय विजेता कप्तान को देने की प्रथा की आलोचना की। इस बार, भारत के कप्तान शुभमन गिल और इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स दोनों को सीरीज ड्रॉ रहने के कारण पदक दिया गया। गावस्कर ने कहा कि प्रशासक आमतौर पर मुनाफा कमाने में माहिर होते हैं, लेकिन खेल के इतिहास की समझ उनकी कम होती है, इसलिए ऐसी गलतियां हो जाती हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि पटौदी मेडल के लिए उनके परिवार का कोई सदस्य समारोह में उपस्थित नहीं था, जबकि यह पदक विजेता कप्तान को दिया जाना चाहिए था।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सुनील गावस्कर ने लिखा, ‘ड्रॉ सीरीज ने दिखाया कि पटौदी परिवार के नाम पर रखी गई ट्रॉफी को रिटायर करके उनसे बदला लेने की कोशिश करना कितना मूर्खतापूर्ण था। हर बार जब सीरीज ड्रॉ होती है, तो मेडल तो नहीं दिया जा सकता, है ना? तो क्या यह बेहतर नहीं होगा कि मैन ऑफ द सीरीज का मेडल विजेता टीम के कप्तान को देने के बजाय उसे दिया जाए? और अगर कप्तान की सीरीज साधारण रही हो और नतीजे पर उसका ज्यादा असर न रहा हो, तो क्या होगा?

