नई दिल्ली: महान क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने हाल ही में टेस्ट क्रिकेट में कन्कशन के चलते स्थानापन्न खिलाड़ी (सब्सीट्यूट) के नियम पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने इस नियम को अब खिलाड़ियों की सुरक्षा के बजाय उनकी कमजोरी छिपाने का जरिया बताया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एक चैनल से बातचीत में गावस्कर ने कहा, “अगर आप शॉर्ट पिच गेंदें यानी बाउंसर नहीं झेल सकते, तो टेस्ट क्रिकेट मत खेलिए। ऐसे में बेहतर होगा कि आप टेनिस या गोल्फ जैसे खेलों की ओर रुख करें।” सुनील गावस्कर शायद कहना चाह रहे थे कि टेस्ट क्रिकेट बहादुरों का खेल है, न कि डरपोकों का। सुनील गावस्कर की यह टिप्पणी भारतीय विकेटकीपर ऋषभ पंत के बुधवार को मैनचेस्टर में बल्लेबाजी करते समय पैर की अंगुली में फ्रैक्चर होने के बाद आई है। ऋषभ पंत ने फ्रैक्चर होने के बावजूद बल्लेबाजी की और दूसरे दिन अपना अर्धशतक पूरा किया। सोनी स्पोर्ट्स पर क्रिकेट में लागू किए जाने वाले समान विकल्पों पर चर्चा के दौरान सुनील गावस्कर ने सबसे पहले मौजूदा कन्कशन सब्सीट्यूट नियम पर सवाल उठाया।
रिप्लेसमेंट की आड़ में रणनीति? गावस्कर बोले – हो निष्पक्ष चयन
मौजूदा नियमों के अनुसार, कन्कशन रिप्लेसमेंट केवल ‘लाइक-फॉर-लाइक’ यानी समान भूमिका निभाने वाले खिलाड़ी के रूप में ही होना चाहिए। इसका मतलब है कि बल्लेबाज के बदले बल्लेबाज, गेंदबाज के बदले गेंदबाज। आईसीसी का सब्स्टीट्यूट नियम कहता है कि कोई खिलाड़ी चोटिल होता है तो उसकी जगह सब्स्टीट्यूट के तौर पर दूसरे खिलाड़ी को मैदान में बुलाया तो जा सकता है, लेकिन वह बल्लेबाजी या गेंदबाजी नहीं कर सकता। अगर अंपायर मंजूरी देते हैं तो विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी भी संभाल सकता है। जैसाकि विकेटकीपर ध्रुव जुरेल मैच के बाकी हिस्सों में ऋषभ पंत के लिए करेंगे।
‘अयोग्य खिलाड़ी के लिए सब्सीट्यूट क्यों?’ – गावस्कर ने उठाए तीखे सवाल
सुनील गावस्कर ने 2019 के मध्य में लागू हुए कन्कशन सब्सीट्यूट नियम पर सवाल उठाते हुए कहा, “मुझे हमेशा से लगता रहा है कि आप किसी अयोग्य खिलाड़ी को लाइक-फॉर-लाइक सब्सीट्यूट दे रहे हैं।” उन्होंने यह भी तर्क दिया कि अगर कोई खिलाड़ी शॉर्ट पिच गेंदों या बाउंसर का सामना करने में सक्षम नहीं है, तो उसे टेस्ट क्रिकेट खेलने की बजाय कोई और खेल चुनना चाहिए। गावस्कर का मानना है कि यह नियम खिलाड़ियों की सुरक्षा से अधिक अब उनके प्रदर्शन की कमजोरी को छिपाने का साधन बन गया है, जिसे दोबारा समीक्षा की जरूरत है।
अगर आप शॉर्ट पिच गेंदें खेलने में सक्षम नहीं हैं, तो टेस्ट क्रिकेट मत खेलिए; टेनिस या गोल्फ खेलिए। आप किसी ऐसे खिलाड़ी को उसकी जगह ऐसा विकल्प दे रहे हैं जो शॉर्ट पिच गेंदें नहीं खेल सकता और चोटिल हो जाता है।’ सुनील गावस्कर ने हालांकि कहा कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) को नियमों की समीक्षा करनी चाहिए ताकि कुछ चोटों के लिए रिप्लेसमेंट की मंजूरी मिल सके। जैसे कि ऋषभ पंत को तेंदुलकर-एंडरसन ट्रॉफी में चौथे टेस्ट के पहले दिन तेज गेंदबाज क्रिस वोक्स की गेंद पर रिवर्स स्वाइप करने के प्रयास में लगी चोट।
गावस्कर ने मांगी नई समीक्षा समिति
उन्होंने कहा, ‘यहां साफ दिख रहा है कि ऋषभ पंत चोटिल हैं, ऐसे में उनके लिए एक उपयुक्त विकल्प होना चाहिए। मैं चाहता हूं कि इस पर निर्णय लेने के लिए एक अलग समिति गठित की जाए, भले ही एक क्रिकेट समिति पहले से मौजूद हो। ICC की क्रिकेट समिति है, फिलहाल उसके अध्यक्ष सौरव गांगुली हैं। आईसीस (ICC) के अध्यक्ष जय शाह हैं और ICC के CEO (सीईओ) संजोग गुप्ता हैं।’ अंतरराष्ट्रीय बोर्ड में कई पदों पर कई भारतीयों के होने के कारण सुनील गावस्कर ने कहा कि निष्पक्षता बनाए रखने के लिए एक नई समिति रिप्लेसमेंट की भूमिकाओं पर विचार कर सकती है। सुनील गावस्कर ने कहा, ‘…इसलिए हम नहीं चाहते कि यहां और ऑस्ट्रेलिया में मीडिया यह कहे, ‘ओह, क्योंकि यह भारत की बात है, इसलिए उन्होंने ऐसा करना शुरू कर दिया है, इसलिए इन चोटों को देखने के लिए एक पूरी तरह से अलग समिति होनी चाहिए, शायद डॉक्टरों आदि के साथ और उस समिति को निर्णय लेने दें।’
‘यह सही नहीं था’ – कन्कशन सब्सीट्यूट पर भारत की आलोचना करते नजर आए गावस्कर
यह कोई नई बात नहीं है कि इस महान क्रिकेटर ने कन्कशन सब्सीट्यूट के प्रयोग पर आपत्ति जताई हो। सुनील गावस्कर ने इस साल की शुरुआत में भारतीय टीम प्रबंधन की कड़ी आलोचना की थी, जब उन्होंने कन्कशन सब्सीट्यूट नियम की खामियों का फायदा उठाकर ऑलराउंडर शिवम दुबे की जगह तेज गेंदबाज हर्षित राणा को शामिल कर लिया था। उन्होंने द टेलीग्राफ के लिए एक कॉलम में लिखा था, ‘समानता की बात को अगर थोड़ा भी बढ़ा-चढ़ाकर देखा जाए, तो शिवम दुबे और हर्षित राणा के बीच ऐसा कुछ नहीं था। मजाक में कहा जा सकता है कि दोनों की लंबाई एक जैसी है और फील्डिंग का स्तर भी एक जैसा है। वरना, दोनों में कोई समानता नहीं है। इंग्लैंड के पास हार मानने की पूरी वजह है। यह भारतीय टीम एक शानदार टीम है और उसे अपनी जीत को ऐसे कृत्यों से धूमिल करने की जरूरत नहीं है।’


